स्टॉक वायर

यह स्मॉल-कैप सालाना 20% बढ़ रहा है, मार्केट की नज़रों से है अछूता!

जानिए, इस स्मॉल-कैप ऑटो स्टॉक के बदलाव के पीछे क्या है

यह स्मॉल कैप हर साल 20% बढ़ रहा है. मार्केट को अभी नहीं पताVinayak Pathak/AI-Generated Image

सारांशः एक स्मॉल-कैप स्टॉक जिसके नंबर आमतौर पर सबका ध्यान खींचते हैं: एक आला दर्जे का बिज़नेस, पांच साल से सालाना 20% रेवेन्यू ग्रोथ और फिर भी सिर्फ़ 16 गुना वैल्युएशन. क्या मार्केट एक मौक़ा चूक रहा है? हमारी स्टोरी में जवाब मिलेगा.

सालों तक संधार टेक्नोलॉजीज़ ज़्यादातर दोपहिया वाहनों के लिए ताले और शीशे जैसे छोटे, कम कीमत वाले ऑटो पार्ट्स बनाती थी. यह एक टिकाऊ कारोबार था, लेकिन इसकी गुंजाइश सीमित थी. इसकी ग्रोथ काफ़ी हद तक गाड़ियों की बिक्री पर निर्भर थी और प्राइसिंग पावर कमज़ोर थी.

अब यह स्थिति बदल रही है. बीते कुछ सालों में Sandhar ज़्यादा वैल्यू वाले सेगमेंट में क़दम रख रही है और यह बदलाव रेवेन्यू ग्रोथ और मार्जिन दोनों में दिख रहा है. स्टॉक की क़ीमत को लेकर बाज़ार अभी भी सतर्क है लेकिन इसके पीछे का बिज़नेस अब पहले जैसा नहीं रहा.

एक सीमित दायरे से आगे

Sandhar का असली बिज़नेस लॉकिंग सिस्टम है. एक टू-व्हीलर में इनमें से पांच -स्टीयरिंग, इग्निशन, फ़्यूल कैप, सीट, टूलबॉक्स, हेलमेट-तक लॉक होते हैं और Sandhar इन्हें Hero, Honda, TVS और Suzuki को बड़े पैमाने पर सप्लाई करती है. यह बिज़नेस अभी भी अहम है लेकिन अब कंपनी पर उतना हावी नहीं जितना पहले था. लॉकिंग का रेवेन्यू में हिस्सा पहले के क़रीब 30% से घटकर 18% पर आ गया है क्योंकि दूसरे बिज़नेस बढ़े हैं.

बड़ा बदलाव शीट मेटल और डाई कास्टिंग से आया है जो अब मिलकर रेवेन्यू का आधा हिस्सा बनाते हैं. शीट मेटल का मतलब है वो प्रेस्ड और फ़ैब्रिकेटेड पार्ट जो गाड़ी के स्ट्रक्चर में जाते हैं. डाई कास्टिंग यानी प्रेसिशन-मोल्डेड एल्युमीनियम या ज़िंक पार्ट जो स्ट्रक्चरल और इंजन से जुड़े कॉम्पोनेंट में इस्तेमाल होते हैं. ये ज़्यादा जटिल प्रोडक्ट हैं और आमतौर पर साधारण मेकैनिकल लॉक या मिरर से बेहतर कमाई होती है.

सेगमेंट के हिसाब से रेवेन्यू मिक्स (%)

सेगमेंट
9M FY26 FY25 FY23 FY21 FY19
लॉकिंग 18 20 19 21 21
विज़न सिस्टम 5 6 8 8 10
शीट मेटल 18 19 13 12 11
कैबिन और फ़ैब्रिकेशन 12 14 15 15 14
असेंबलीज़ 10 11 8 10 15
डाई कास्टिंग 32 25 24 21 17
कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू के आधार पर

Sandhar को क्यों बदलना पड़ा?

पुराने मॉडल की एक सीमा थी. लॉक ज़्यादातर वॉल्यूम वाला बिज़नेस थे. रेवेन्यू तभी बढ़ता था जब OEM ज़्यादा गाड़ियां बनाते. हर यूनिट की वैल्यू बढ़ाने की ज़्यादा गुंजाइश नहीं थी.

यह तरीक़ा FY14 से FY19 के तेज़ी के दौर में काम आया, जब रेवेन्यू ₹1,269 करोड़ से बढ़कर ₹2,342 करोड़ हो गया. लेकिन जब ऑटो साइकिल घूमा, तो उस निर्भरता की कमज़ोरी साफ़ हो गई. Sandhar को ऐसे बिज़नेस चाहिए थे जो सिर्फ़ वॉल्यूम से नहीं बल्कि प्रोडक्ट की जटिलता और वैल्यू एडिशन से भी बढ़ सकें.

आगे बढ़ने के लिए सबसे स्वाभाविक रास्ता 'डाई कास्टिंग' और 'शीट मेटल' का था. ये कैपेबिलिटी कंपनी में पहले से थीं लेकिन ज़्यादातर अपने ही प्रोडक्ट के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन के तौर पर. संधार की स्ट्रैटेजी थी इन्हें अलग ग्रोथ इंजन के रूप में स्केल करना.

कैपेक्स अब अब नतीजे दे रहा है

इसके लिए कंपनी ने भारी निवेश किया. FY22 से FY25 के बीच Sandhar ने हर साल क़रीब ₹250 से ₹300 करोड़ कैपेक्स पर ख़र्च किए और डाई कास्टिंग और शीट मेटल पर केंद्रित 8 ग्रीनफ़ील्ड प्लांट बनाए.

इससे नज़दीकी रिटर्न पर असर पड़ा. ROCE में कुछ कमज़ोरी आई. लेकिन अब निवेश रंग लाने लगा है और FY25 में ROCE सुधरकर 13.4% पर आ गया.

रिटर्न में सुधार

रेशियो
FY25 FY24 FY23 FY22 FY21
ROCE (%) 13.4 13 9.6 8.3 9.5
ROE (%) 13.1 11.4 8.3 6.7 7.4

मार्जिन में भी सुधार साफ़ दिखाई दे रहा है. विदेशी ऑपरेशन को मिलाकर, कंसोलिडेटेड EBIT मार्जिन FY22 में 4.3% से बढ़कर, पिछले 12 महीनों के आधार पर 6.5% हो गया है. स्टैंडअलोन मार्जिन और भी तेज़ी से बढ़कर 4.9% से 8.2% के स्तर पर पहुंच गया. इससे पता चलता है कि नए मिक्स के स्केल होने के साथ कोर डोमेस्टिक बिज़नेस में ऑपरेटिंग लेवरेज साफ़ दिख रहा है.

ऑपरेटिंग लेवरेज काम कर रहा है

मेट्रिक
TTM FY25 FY24 FY23 FY22 FY21
रेवेन्यू (₹ करोड़) 4,559.20 3,884.50 3,521.11 2,908.90 2,323.70 1,863.60
EBIT (₹ करोड़) 298 241.2 201.7 136.1 99.2 94
कंसॉलिडेटेड मार्जिन (%) 6.5 6.2 5.7 4.7 4.3 5
स्टैंडअलोन मार्जिन (%) 8.2 7.1 6.2 5.4 4.9 6

एक और मौक़ा: स्मार्ट लॉक

Sandhar अपने पारंपरिक लॉकिंग बिज़नेस की इकोनॉमिक्स भी सुधारने की कोशिश कर रही है.

यह Honda और Suzuki को कीलेस इग्निशन सिस्टम पहले से सप्लाई कर रही है. ये प्रोडक्ट एक साधारण मेकैनिकल लॉक की क़ीमत से क़रीब 10 गुना ज़्यादा पर बिक सकते हैं जो आमतौर पर ₹200-300 पर मिलता है. मैनेजमेंट ने Suzuki के साथ इसे 20,000 यूनिट महीना तक बढ़ाने का संकेत दिया है. इससे पुराने बिज़नेस के भीतर रेवेन्यू की एक और संभावित परत बनती है.

लेकिन यह अभी शुरुआत है. इस सेगमेंट में Minda का दबदबा है और टू-व्हीलर में स्मार्ट-लॉक की मांग धीमी है क्योंकि कम्यूटर कस्टमर क़ीमत के प्रति संवेदनशील हैं और OEM प्रीमियम फ़ीचर्स को तेज़ी से स्केल करने में सतर्क हैं.

जोख़िम अभी भी हैं

तीन चीज़ें अभी भी अनसुलझी हैं और ध्यान देने लायक़ हैं.

1) ओवरसीज़ बिज़नेस, जो रेवेन्यू का क़रीब 10% है, FY26 की पहली नौ तिमाहियों में कमज़ोर मांग और करेंसी दबाव की वजह से ₹7 करोड़ के EBIT नुक़सान में रहा. ब्रेकईवन टाइमलाइन लगातार तिमाहियों में खिसकती रही है जिससे कंसॉलिडेटेड मार्जिन पर लगातार बोझ बना हुआ है.

2) रॉ मैटेरियल एक और दबाव का पॉइंट है. यह रेवेन्यू का 62% है. Sandhar OEM को लागत बदलाव पास ऑन करती है लेकिन तुरंत नहीं. कॉन्ट्रैक्ट हर 90 दिन में रीसेट होते हैं और कंपनी आमतौर पर 60 दिन की इन्वेंटरी रखती है. एल्युमीनियम या ज़िंक की क़ीमतों में तेज़ उछाल एक तिमाही तक मार्जिन दबा सकता है.

3) सबसे बड़ा जोख़िम वही है जिसने Sandhar को पहली जगह बदलाव के लिए मजबूर किया था: ऑटो पर निर्भरता. अभी भी क़रीब 68% रेवेन्यू टू-व्हीलर से आता है. जब कंज़्यूमर की मांग कमज़ोर पड़ती है, वॉल्यूम धीमे होते हैं और Sandhar जैसे सप्लायर इसे जल्दी महसूस करते हैं. यह अभी भी एक वॉल्यूम-लिंक्ड ऑटो-एंसिलरी बिज़नेस है, भले ही यह डाइवर्सिफ़ाइड होता जा रहा है.

आपके लिए क्या मायने रखता है

16 गुना ट्रेलिंग अर्निंग्स पर Sandhar उस बिज़नेस की तरह प्राइस हो रही है जिसने अपना ट्रांज़िशन पूरी तरह साबित नहीं किया. यह ऑटो एंसिलरी इंडस्ट्री के 27 गुना के मीडियन से भी काफ़ी कम है. मार्केट सतर्ती बरत रहा होगा. एंसिलरी प्लेयर में कॉम्पिटिशन कड़ा है, ऑटो निर्भरता ज़्यादा है, ओवरसीज़ बिज़नेस कमज़ोर है और स्मार्ट लॉक अभी एक भविष्य की संभावना है, मौजूदा ड्राइवर नहीं.

फिर भी कंपनी साफ़ तौर पर बेहतर हुई है. रेवेन्यू तेज़ी से बढ़ रहा है, मार्जिन फैल रहे हैं और कैपिटल-हेवी फ़ेज़ पीछे रह गया है. कम मल्टीपल का दोबारा आकलन होगा या नहीं, यह एग्ज़ीक्यूशन पर निर्भर है. अगर नए सेगमेंट स्केल हुए और ओवरसीज़ नुक़सान कम हुए तो सिर्फ़ अर्निंग्स ग्रोथ से रिटर्न बन सकता है. अगर एग्ज़ीक्यूशन फिसला तो मौजूदा वैल्यूएशन में भी एक वाजिब कुशन है. यह कोई ऐसा बिज़नेस नहीं है जो निवेशकों से अंधा भरोसा मांग रहा हो. यह उन्हें इस पर फ़ैसला करने को कह रहा है कि अब तक की तरक़्क़ी आगे का एक भरोसेमंद संकेत है या नहीं.

क्या आप ऐसे स्टॉक चुनना चाहते हैं जिन पर अमल किया जा सके?

कम वैल्यूएशन आपका ध्यान खींच सकता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बिज़नेस आपके सब्र का इनाम देने के लिए काफ़ी मज़बूत है. वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र आपको रिसर्च के आधार पर स्टॉक की सलाह, ख़रीदने, होल्ड करने और बेचने के साफ़ फै़सले, और हर नज़रिए के पीछे का कारण बताता है. इससे आपको उन स्टॉक्स पर फोकस करने में मदद मिलती है जिनमें लंबे समय तक चलने की संभावना है, न कि सिर्फ़ उन पर जो पहली नज़र में सस्ते लगते हैं.

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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