न्यूज़वायर

भारत में पहली बार: गहनों से ज़्यादा सोना निवेश के लिए ख़रीदा गया

इस बदलाव के पीछे की वजहें जानिए

india-bought-more-gold-investing-than-jewelleryVinayak Pathak/AI-Generated Image

सारांशः पहली बार भारतीय पहनने से ज़्यादा सोना निवेश के लिए ख़रीद रहे हैं. यह बड़ा बदलाव निवेशकों के पोर्टफ़ोलियो में सोने की बढ़ती जगह को पक्का करता है. लेकिन इस भीड़ में शामिल होने से पहले समझिए कि सोना बाज़ार के अलग-अलग दौर में असल में कैसे काम करता है और यह पोर्टफ़ोलियो में कहां फ़िट होता है.

बुधवार को वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एक अधिकारी ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि इतिहास में पहली बार भारत ने गहनों से ज़्यादा सोना निवेश के लिए ख़रीदा है.

काउंसिल की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, जनवरी-मार्च तिमाही में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना ख़रीदने वाले देश भारत ने निवेश के लिए, यानी गोल्ड ETF और सोने के सिक्के व बार में, 82 टन सोना ख़रीदा. वहीं, गहनों के लिए सिर्फ़ 66 टन ख़रीदा.

सिक्कों और बार की मांग 62 टन रही जो लगभग गहनों जितनी है, जबकि ETF में लगा सोना 20 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. सोने के गहनों की बिक्री, इस बीच, पिछले साल की तुलना में 19% गिर गई क्योंकि बढ़ती क़ीमतों ने आम ख़रीदारी को कम कर दिया.

भारत में सोने की खपत (जनवरी-मार्च 2026)

कैटेगरी
सोने की ख़रीद (टन) क़ीमत (करोड़ ₹) सालाना बदलाव (% में)
गहने 66 99,900 -19
सिक्के और बार 62 94,100 34
ETF 20 30,000 197
औद्योगिक 2 3,500 -8
कुल डिमांड/खपत 151 2,27,500 10
सिक्के, बार और ETF मिलकर निवेश मांग बनाते हैं.
स्रोत: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल रिपोर्ट

इसके नतीजे में कुल खपत में गहनों की हिस्सेदारी घटकर क़रीब 30% पर आ गई, जो 2002 से उपलब्ध डेटा में सबसे कम है. यानी निवेश ने कुल सोने की मांग का क़रीब 70% हिस्सा ले लिया.

दुनिया भर के ETF गोल्ड की मांग में भारत की एक तिहाई हिस्सेदारी

जैसे-जैसे शेयर बाज़ार दबाव में रहा, गोल्ड ETF में जनवरी 2026 में ₹24,040 करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा मंथली पैसा आया.

इसके नतीजे में उस तिमाही में दुनिया भर के ETF की सोने की मांग में भारत की हिस्सेदारी 32% रही, जो चीन के बाद दूसरे नंबर पर था.

हालांकि फ़रवरी और मार्च में ETF में आने वाला पैसा तेज़ी से कम हो गया और जनवरी के शिखर से 80% से ज़्यादा गिर गया, क्योंकि बाज़ार में गिरावट आने पर लोगों ने मुनाफ़ा निकाल लिया.

लंबे समय में गोल्ड का प्रदर्शन

यह उत्साह पूरी तरह बेबुनियाद नहीं है. लोगों का बढ़ता रुझान पिछले कुछ सालों में सोने के शानदार रिटर्न को दिखाता है. गोल्ड म्यूचुअल फ़ंड ने 2025 में औसतन क़रीब 74% रिटर्न दिया जबकि लार्ज-कैप फ़ंड सिर्फ़ 9% पर रहे.

लेकिन जब आप देखते हैं कि क्या सोना हमेशा और लंबे समय में इक्विटी से आगे रहा है, तो तस्वीर बदल जाती है. हमारा पांच साल का रोलिंग रिटर्न विश्लेषण यही दिखाता है.

अगर आपने जून 2005 से आज के बीच किसी भी पांच साल के लिए औसत गोल्ड फ़ंड रखा होता, तो क़रीब 10% संभावना थी कि आपका निवेश घाटे में रहता. इसकी तुलना करें औसत लार्ज-कैप फ़ंड से, जहां घाटे की संभावना सिर्फ़ 0.5% थी.

यह दिखाता है कि इक्विटी, तमाम शॉर्ट-टर्म के उतार-चढ़ाव के बावजूद, पांच साल की अवधि में कहीं ज़्यादा भरोसेमंद रही है.

सोना, इस बीच, लंबे दौर तक निराश कर सकता है. और आगे देखें तो तस्वीर और साफ़ होती है.

1981 से, सोने ने पांच साल की अवधि में सेंसेक्स को सिर्फ़ तीन बार पीछे छोड़ा है: 2006-2010, 2016-2020 और 2021-2025. चार दशकों से ज़्यादा में सिर्फ़ तीन बार. और हर बार शेयर बाज़ार किसी मुश्किल दौर से गुज़र रहा था.

यही वो पैटर्न है जो समझना ज़रूरी है. सोना तब बेहतर करता है जब शेयर बाज़ार दबाव में हो और यह भी साफ़ दिखता है. यह हाल की भीड़ की वजह भी बताता है. लोग सोने की तरफ़ भागते हैं, ज़्यादातर किसी ठोस वजह से नहीं बल्कि भीड़ देखकर.

वैल्यू रिसर्च की सलाह

सोना कोई ऐसी चीज़ नहीं जो अपने आप कमाई करे. लंबे समय में इक्विटी ने इसे साफ़ तौर पर पीछे छोड़ा है. सोने की असली ताक़त यह है कि जब इक्विटी गिरती है तो यह टिका रहता है या बढ़ता है. इसका मतलब है यह एक सहारा है, कमाई का इंजन नहीं.

इसलिए इसे पोर्टफ़ोलियो को संतुलित रखने के लिए रखें. इसे अपने कुल पोर्टफ़ोलियो के क़रीब 10% तक सीमित रखें और हर बार जब सुर्ख़ियां पिछले साल के रिटर्न याद दिलाएं तो इसे बढ़ाने की इच्छा को रोकें.

अगर आप ETF के ज़रिए सोना रखना चाहते हैं, जो सबसे सस्ता और आसान तरीक़ा है, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र के अनुभवी एनलिस्ट की रेकमेंड किए गए गोल्ड ETF की लिस्ट लें. वे ट्रैकिंग एरर, एक्सपेंस रेशियो, ट्रेडिंग लिक्विडिटी जैसे कई पैमानों पर जांच करके उन्हें चुनते हैं.

आज ही फ़ंड एडवाइज़र आज़माएं!

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

साल भर में 252% रिटर्न, लेकिन नए निवेशक नहीं लगा सकते पैसा, क्यों?

पढ़ने का समय 5 मिनटउज्ज्वल दास

क्या होगा अगर बाज़ार 10 साल तक कोई रिटर्न न दे?

पढ़ने का समय 5 मिनटउज्ज्वल दास

स्मॉल कैप के लिए मुश्क़िल रहा साल, फिर कैसे इस फ़ंड ने दिया 20% का रिटर्न?

पढ़ने का समय 4 मिनटचिराग मदिया

IEX का शेयर अपने पीक से 65% गिरा, क्या सबसे बुरा दौर बीत गया है?

पढ़ने का समय 5 मिनटसत्यजीत सेन

आपके पोर्टफ़ोलियो में 4.5% की समस्या

पढ़ने का समय 3 मिनटआशुतोष गुप्ता

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी