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मस्क की सपनों की दुनिया के लिए बचत कैसे करें?

मस्क बचत बंद करने की सलाह देते हैं. उनका अपना तर्क इसके उलट बात कहता है.

मस्क बचत बंद करने की सलाह देते हैं. उनका अपना तर्क इसके उलट बात कहता है.Anand Kumar/AI-Generated Image

एलन मस्क ने हाल ही में दुनिया को रिटायरमेंट के लिए बचत बंद करने की सलाह दी. उन्होंने इस साल एक पॉडकास्ट में यह बात कही. दुनिया के पहले खरबपति का मानना है कि अगले एक-दो दशकों के लिए पैसा अलग रखने का कोई मतलब नहीं, क्योंकि तब तक यह मायने नहीं रखेगा. आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोट लगभग हर चीज़ को इतना सस्ता और इतना सुलभ बनाने वाले हैं कि बुरे वक़्त के लिए बचत करना एक पुरानी, ग़रीब दुनिया की आदत बन जाएगी.

मैं आपसे पहले ही ईमानदार हो जाता हूं. मैं एक ऐसा बिज़नेस चलाता हूं जो लोगों को बचत और निवेश की सलाह देता है. तो ज़ाहिर है, मुझे किसी ऐसे शख़्स से असहमत होने का कोई न कोई कारण मिल ही जाएगा जो सबको रुकने को कह रहा हो. आप मेरे उत्साह पर थोड़ा संदेह करें, यह बिल्कुल ठीक है. लेकिन मेरी बात सुनिए, क्योंकि मुझे लगता है कि तर्क मेरे पक्ष में है, उनके नहीं.

शुरुआत उस बात से करते हैं जिससे मैं वाकई सहमत हूं. मैं इस बारे में आशावादी हूं कि हम कहां जा रहे हैं. कुछ सौ साल पीछे देखें कि एक सामान्य ज़िंदगी में सिर्फ़ ज़िंदा रहने के लिए कितनी ज़्यादा मेहनत करनी होती थी. यह कल्पना करना मुश्किल नहीं कि भविष्य में मशीनें ज़्यादातर कठिन काम करेंगी और चीज़ें बेहद सस्ती हो जाएंगी. हम उस मंज़िल से आधे से ज़्यादा पहले ही पहुंच चुके हैं. तो मस्क की इस सोच से कि हम जहां जा रहे हैं, मुझे इस पर कोई एतराज़ नहीं. मेरा एतराज़ इस बात से है कि वे आपको इसके बारे में क्या करने की सलाह देते हैं.

ज़रा सोचिए कि वह मशीनों से चलने वाली दुनिया असल में कैसी दिखेगी. अगर रोबोट उनमें से ज़्यादातर काम कर सकते हैं, आज जिनके लिए लोगों को पैसे मिलते हैं, तो नौकरी से होने वाली कमाई घटने लगती है. और उस सारी संपन्नता पर जिसका असली हक़ बनता है, वो है उसे बनाने वाली चीज़ों का मालिक. रोबोट. फ़ैक्ट्रियां. उनके पीछे की कंपनियां. आप और मेरे जैसे लोगों के लिए इसका मतलब है उन कंपनियों के शेयर, चाहे सीधे लिए हों या म्यूचुअल फ़ंड के ज़रिए.

और यही वह हिस्सा है जिसे मस्क छोड़ देते हैं. वह संपन्नता बारिश की तरह सब पर बराबर नहीं पड़ती. यह पहले उन लोगों तक पहुंचती है जो उत्पादक पूंजी के मालिक हैं. जो सिर्फ़ तनख़्वाह पर जीता है, उस तक यह आख़िर में पहुंचती है, अगर पहुंचती है तो. तो उनका भविष्य बचत को बेकार नहीं बनाता. यह मशीन का एक हिस्सा ख़रीदने को उस सबसे अहम काम में बदल देता है जो आप कर सकते हैं. उस दुनिया में मंथली SIP कोई पुरानी रस्म नहीं है. यही वह तरीक़ा है जिससे एक आम इंसान रोबोट में अपना छोटा-सा हिस्सा ख़रीदता है.

चलते रहने की एक और वजह है और यह इस पर निर्भर भी नहीं कि मस्क सही हैं या नहीं. दो संभावनाएं देखिए. अगर वे सही हैं और हम सब रोबोट-चालित संपन्नता की दुनिया में जागते हैं, तो अलग रखी गई रक़म का नुक़सान लगभग कुछ नहीं. अभी थोड़ा कम ख़र्च, बदले में एक ऐसा सहारा जिसकी ज़रूरत न पड़े तो ख़ुशी ही होगी. लेकिन अगर वे ग़लत हैं, या बस थोड़े जल्दबाज़ हैं और वह भविष्य कुछ दशक देर से आता है, तो जिसने उनकी बात पर बचत बंद कर दी वह ख़ाली हाथ खड़ा होगा. उसके पास दोबारा शुरू करने का वक़्त भी नहीं होगा. एक ग़लती थोड़ी शर्मिंदगी भरी है. दूसरी तबाही है. जब पलड़ा इतना झुका हो, तो समझदार दांव ज़ाहिर है.

मैं जिस बात पर बार-बार लौटता हूं वह यह है. मस्क जिस संपन्नता का सपना देखते हैं, वह बचत और निवेश का विकल्प नहीं है. बड़े पैमाने पर देखें तो यही वह चीज़ है जिसे बचत और निवेश अब तक बनाते रहे हैं. तकलीफ़ से निकलने का वह लंबा सफ़र इसलिए हुआ क्योंकि लोगों ने थोड़ा ख़र्च टाला, अपनी पूंजी को काम में लगाया और उसे उन फ़ैक्ट्रियों, दवाओं और मशीनों में कंपाउंड होने दिया -ऐसी चीज़ें जिन्हें आज हम बहुत मामूली या आम समझते हैं. खुशहाली भरा भविष्य उसी आदत का नतीजा है. इसे गंवा देना सही नहीं है.

तो मेरी सलाह मस्क की सलाह से कम रोमांचक है, लेकिन मुझे लगता है यह ज़्यादा समझदारी भरी है. अपनी SIPs चलते रहने दें. शोर-शराबे में भी निवेशित रहें. मशीनों से चलने वाले संपन्न भविष्य के विचार को रुकने की वजह नहीं, बल्कि उसमें हिस्सेदारी लेने की एक और वजह मानें. अगर वह दुनिया सच में आने वाली है, तो उसका सबसे ज़्यादा लुत्फ़ वे नहीं उठाएंगे जिन्होंने उसका इंतज़ार करते हुए सब ख़र्च कर दिया. वे उठाएंगे जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि जो कुछ बन रहा था उसमें उनका एक हिस्सा था.

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