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सारांशः गोल्ड और सिल्वर ETF के पीछे रखे असली सोने-चांदी की सुरक्षा के नियम अब सख़्त होंगे. SEBI बोर्ड ने वॉल्ट मैनेजर्स रेगुलेशंस में बदलाव को मंज़ूरी दी है. इसके बाद ये नियम सिर्फ़ EGR तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ETF और बुलियन डेरिवेटिव्स पर भी लागू होंगे. चोरी, फ़्रॉड और साइबर अटैक से सुरक्षा, हर प्रोडक्ट का सोना अलग रखने और शुद्धता के एक जैसे मानक इन बदलावों में शामिल हैं. विस्तृत नियम SEBI के सर्कुलर के बाद साफ़ होंगे.
गोल्ड ETF ख़रीदते वक़्त ज़्यादातर निवेशक सोने का भाव और रिटर्न देखते हैं. लेकिन कम ही लोग सोचते हैं कि उनकी हर यूनिट के पीछे असली सोना किसी तिजोरी में रखा होता है. वही सोना आपके निवेश की असली ताक़त है.
इसी कड़ी को मज़बूत करने के लिए SEBI ने 24 सितंबर 2026 की बोर्ड मीटिंग में SEBI (Vault Managers) Regulations, 2021 में बदलाव को मंज़ूरी दी है. ये बदलाव गोल्ड के साथ सिल्वर ETF के निवेशकों के लिए भी अहम हैं, क्योंकि अब दोनों के पीछे रखे बुलियन की सुरक्षा के लिए एक जैसे और सख़्त नियम होंगे.
अब तक नियम सिर्फ़ EGR तक सीमित थे
वॉल्ट मैनेजर्स (Vault Managers) के नियम 2021 में इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) के लिए आए थे. EGR स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाली रसीद है, जो तिजोरी में रखे असली सोने को दर्शाती है. इन नियमों में सोने की सुरक्षा, शुद्धता, रिकॉर्ड, मिलान (reconciliation) और इंश्योरेंस जैसी बातें शामिल थीं.
पिछले कुछ सालों में गोल्ड-सिल्वर ETF और बुलियन डेरिवेटिव्स में निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है. SEBI के मुताबिक़, इसलिए ऐसे साझा ढांचे की ज़रूरत महसूस हुई जो उन सभी प्रोडक्ट्स पर लागू हो जिनके पीछे असली सोना-चांदी रखा होता है.
क्या-क्या बदलेगा?
1. ETF और डेरिवेटिव्स भी दायरे में
सबसे बड़ा बदलाव यही है. अब ये नियम EGR के अलावा ETF और बुलियन डेरिवेटिव्स के पीछे रखे सोने-चांदी पर भी लागू होंगे. EGR वाले अलग चैप्टर की जगह एक ऐसा चैप्टर आएगा जो सभी बुलियन प्रोडक्ट्स पर एक जैसा लागू होगा.
2. शुद्धता के एक जैसे मानक
EGR के लिए बने "गोल्ड स्टैंडर्ड्स" की जगह अब "बुलियन डिलिवरी स्टैंडर्ड्स" आएंगे. यानी ETF के पीछे रखे सोने-चांदी की शुद्धता भी एक तय कसौटी पर परखी जाएगी.
3. चोरी, फ़्रॉड और साइबर अटैक से बचाव
तिजोरी की सुरक्षा के नियम और सख़्त होंगे, जिनमें चोरी, सेंधमारी, आग, फ़्रॉड, आतंकवाद और साइबर अटैक जैसे जोखिम शामिल होंगे. नुक़सान की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया भी इन्हीं जोखिमों के हिसाब से तय होगी.
4. हर प्रोडक्ट का सोना अलग रहेगा
Vault Manager को अलग-अलग प्रोडक्ट्स और संस्थाओं का बुलियन अलग रखना होगा. यानी एक ETF का सोना किसी दूसरे प्रोडक्ट के सोने में मिला नहीं होगा और हर प्रोडक्ट का हिसाब साफ़ रहेगा.
5. तिजोरी संभालने वालों की ज़िम्मेदारी बढ़ी
वॉल्ट मैनेजर के लिए ज़रूरी नेटवर्थ ₹50 करोड़ से बढ़ाकर ₹75 करोड़ की जाएगी. साथ ही, हर वॉल्ट मैनेजर को एक कंप्लायंस ऑफिसर नियुक्त करना होगा.
पहले और अब: एक नज़र में
| मुद्दा | अब तक | नए नियमों में |
|---|---|---|
| दायरा | सिर्फ़ EGR के पीछे रखा सोना | EGR, ETF और बुलियन डेरिवेटिव्स के पीछे रखा सोना-चांदी |
| शुद्धता के मानक | "गोल्ड स्टैंडर्ड्स" (सिर्फ़ EGR के लिए) | "बुलियन डिलिवरी स्टैंडर्ड्स" (सभी बुलियन प्रोडक्ट्स के लिए) |
| Vault Manager की नेटवर्थ | ₹50 करोड़ | ₹75 करोड़ |
| सुरक्षा के जोखिम | मौजूदा सिक्योरिटी पॉलिसी | चोरी, सेंधमारी, आग, फ़्रॉड, आतंकवाद और साइबर अटैक पर ख़ास ज़ोर |
| बुलियन को अलग रखना | कारोबार के आधार पर | कारोबार के साथ प्रोडक्ट और संस्था के आधार पर भी |
| कंप्लायंस ऑफिसर | अनिवार्य नहीं था | नियुक्ति अनिवार्य होगी |
| स्रोत: SEBI प्रेस रिलीज़ (PR No. 59/2026), 24 सितंबर 2026 | ||
आपके लिए इसका मतलब क्या है?
गोल्ड या सिल्वर ETF के निवेशक के लिए सबसे बड़ा फ़ायदा भरोसे का है. आपकी यूनिट्स के पीछे रखे सोने-चांदी की सुरक्षा, शुद्धता और हिसाब-किताब अब एक ही ढांचे में और सख़्त निगरानी में होगा. SEBI का कहना है कि इससे बुलियन की सुरक्षा, ट्रेसबिलिटी और गवर्नेंस मज़बूत होगी.
अभी क्या बाक़ी है?
SEBI बोर्ड ने फ़िलहाल इन बदलावों को मंज़ूरी दी है, नियमों का नोटिफ़िकेशन अभी बाक़ी है. इसके बाद SEBI एक सर्कुलर जारी करेगा, जिसमें स्टोरेज, क्वालिटी, मिलान, ऑडिट, इंश्योरेंस, रिस्क मैनेजमेंट और शिकायत निवारण की विस्तृत शर्तें तय होंगी. ज़मीनी स्तर पर क्या बदलेगा, इसकी पूरी तस्वीर उसी सर्कुलर के बाद साफ़ होगी.
निवेशक ध्यान रखें
- ये नियम सोने की हिफ़ाज़त के लिए हैं, भाव के लिए नहीं. तिजोरी की सुरक्षा बढ़ने से भाव के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम नहीं होता. चांदी में यह उतार-चढ़ाव सोने से भी ज़्यादा होता है.
- ख़र्च और ट्रैकिंग पर नज़र रखें. अलग-अलग ETF के एक्सपेंस रेशियो और ट्रैकिंग एरर में फ़र्क़ होता है, जो लंबे समय में रिटर्न पर असर डालता है.
- हर "डिजिटल गोल्ड" SEBI के दायरे में नहीं है. ऐप्स पर बिकने वाला डिजिटल गोल्ड SEBI का रेगुलेटेड प्रोडक्ट नहीं है, इसलिए उस पर ये नियम लागू नहीं होंगे.
- सोने-चांदी का हिस्सा सीमित रखें. ये पोर्टफ़ोलियो को संतुलन देते हैं, लंबे समय में दौलत बढ़ाने का मुख्य ज़रिया इक्विटी ही रहती है.
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