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पराग पारिख फ़्लेक्सी कैप: कैसे टॉप होल्डिंग्स में पहुंचीं Power Grid और Coal India?

5 साल के आंकड़े बताते हैं कि फ़ंड ने ये दांव एक झटके में नहीं, बल्कि गिरते प्राइस पर किस्तों में ख़रीदारी करके बड़े किए

5 साल के आंकड़े बताते हैं कि फ़ंड ने ये दांव एक झटके में नहीं, बल्कि गिरते प्राइस पर किस्तों में ख़रीदारी करके बड़े किएAI-generated image

सारांशः देश के सबसे बड़े फ्लेक्सी कैप फ़ंड के भारतीय शेयरों के पोर्टफ़ोलियो में दो सरकारी कंपनियां अब दूसरे और चौथे नंबर पर हैं. पांच साल के मासिक आंकड़े दिखाते हैं कि यह हिस्सेदारी कई साल में, किस्तों में ली गई है. सबसे बड़ी ख़रीदारी तब हुई जब इन शेयरों के प्राइस गिर रहे थे. आज दोनों मिलकर फ़ंड की भारतीय होल्डिंग का क़रीब 15% हैं और दोनों के प्राइस अपने पीक से नीचे चल रहे हैं.

सितंबर 2021 में पराग पारिख फ़्लेक्सी कैप के पास Coal India का एक भी शेयर नहीं था. आज यह फ़ंड के भारतीय शेयरों में चौथी सबसे बड़ी होल्डिंग है और Power Grid दूसरी. सितंबर 2026 के आख़िर में फ़ंड के पास Power Grid के 31.2 करोड़ और Coal India के 18.4 करोड़ शेयर थे, जिनकी कुल वैल्यू क़रीब ₹15,900 करोड़ है. Power Grid से आगे सिर्फ़ HDFC Bank है.

दिलचस्प यह है कि ये पोज़िशन तेज़ी के दौर में नहीं, बल्कि गिरते प्राइस पर बनीं.

कंपनी शुरुआती होल्डिंग सितंबर 2026 में होल्डिंग मौजूदा वैल्यू (₹ करोड़) भारतीय शेयरों में रैंक
Power Grid करीब 3.4 करोड़ शेयर (सितंबर 2021, बोनस जोड़कर) 31.2 करोड़ शेयर 8,127 2
Coal India 19 लाख शेयर (मई 2022) 18.4 करोड़ शेयर 7,811 4
स्रोत: वैल्यू रिसर्च, सितंबर 2021 से सितंबर 2026 तक का मासिक पोर्टफ़ोलियो डेटा

Power Grid: गिरावट में तेज़ हुई ख़रीदारी

Power Grid सितंबर 2021 से ही फ़ंड के पोर्टफ़ोलियो में है. सितंबर 2023 में कंपनी ने 1:3 के रेशियो में बोनस शेयर दिए थे. बोनस को जोड़ें तो सितंबर 2021 की होल्डिंग क़रीब 3.4 करोड़ शेयर बनती है. यानी पांच साल में फ़ंड के पास Power Grid के शेयर क़रीब 9 गुना हो गए.

सबसे बड़ी ख़रीदारी मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच हुई. इन 9 महीनों में फ़ंड ने हर महीने शेयर जोड़े, जो कुल क़रीब 12 करोड़ हो गए. इसी दौरान शेयर का प्राइस ₹307 (अप्रैल 2025) से गिरकर ₹256 (जनवरी 2026) पर आ गया.

फ़रवरी 2026 के बाद से होल्डिंग लगभग स्थिर है. Power Grid का प्राइस अभी ₹260 के आसपास है, जो सितंबर 2024 के ₹353 के पीक से क़रीब 26% नीचे है.

Coal India: ज़ीरो से टॉप-4 तक

फ़ंड ने मई 2022 में क़रीब ₹193 के प्राइस पर इसमें एंट्री ली. सितंबर 2023 में, जब प्राइस चढ़ रहा था, फ़ंड ने क़रीब 2 करोड़ शेयर बेचे भी.

असली दांव अगस्त 2024 के बाद लगा. उस महीने Coal India का प्राइस ₹525 के पीक पर था. फ़रवरी 2025 तक यह क़रीब 30% गिरकर ₹369 पर आ गया. इसी गिरावट के दौरान फ़ंड की होल्डिंग 8.4 करोड़ से बढ़कर 14.3 करोड़ शेयर हो गई.

इसके बाद मार्च 2026 में क़रीब 1.3 करोड़ और अगस्त 2026 में 82 लाख शेयर और जुड़े. Coal India का प्राइस अभी ₹424 है, जो पहली ख़रीद के मुक़ाबले दोगुने से ज़्यादा है, पर अगस्त 2024 के पीक से क़रीब 19% नीचे है.

कोयला और बिजली सेक्टर का हाल

फ़ंड की सबसे बड़ी ख़रीदारी जिस दौर में हुई, वह दोनों सेक्टर के लिए सुस्त रहा. कोयला मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़, फ़ाइनेंशियल ईयर 2025-26 में देश में कोयले का प्रोडक्शन 0.6% घटकर 1.04 अरब टन रहा, जो 1.16 अरब टन के टारगेट से कम था. इसी साल बिजली प्रोडक्शन भी सिर्फ़ 0.57% बढ़कर 1,840 अरब यूनिट रहा. पर 2026 की गर्मियों में तस्वीर बदली. मई 2026 में बिजली की पीक डिमांड 270.82 गीगावॉट के रिकॉर्ड पर पहुंची, जो मई 2025 से क़रीब 17% ज़्यादा है. अप्रैल 2026 की पीक के वक़्त क़रीब 67% बिजली थर्मल पावर से आई और फ़ाइनेंशियल ईयर 2024-25 में देश के कुल कोयला डिस्पैच का 82% पावर सेक्टर को गया. उस साल देश का क़रीब 74% कोयला अकेले Coal India ने निकाला. बढ़ती पीक डिमांड का मतलब ट्रांसमिशन नेटवर्क पर ज़्यादा बोझ भी है और यही Power Grid का मुख्य कारोबार है.

दोनों में एक जैसा पैटर्न

दोनों में फ़ंड ने कोई एकमुश्त दांव नहीं लगाया. प्राइस गिरने पर ख़रीदारी तेज़ हुई, जबकि तेज़ी के दौर में फ़ंड रुका रहा या उसने कुछ शेयर बेचे. दोनों सरकारी कंपनियां हैं, जिनका कारोबार स्थिर है और जो डिविडेंड के लिए जानी जाती हैं. हालांकि आंकड़े सिर्फ़ यह बताते हैं कि फ़ंड ने क्या किया, यह नहीं कि क्यों किया.

जोखिम भी समझिए

  • कंसंट्रेशन: दो शेयरों में भारतीय होल्डिंग का क़रीब 15% होना बड़ा दांव है. इनमें लंबी गिरावट का असर फ़ंड के रिटर्न पर साफ़ दिखेगा.
  • पीक से नीचे प्राइस: दोनों शेयर अपने पीक से 19-26% नीचे हैं. यानी पीक के आसपास की गई ख़रीदारी अभी घाटे में है.
  • कारोबारी जोखिम: सरकारी कंपनी होने से नीतिगत फ़ैसलों का असर पड़ता है. Coal India के लिए एनर्जी ट्रांज़िशन लंबी अवधि का सवाल है, जबकि Power Grid का कारोबार रेगुलेटेड है.

आपके लिए इसका क्या मतलब है

अगर आप इस फ़ंड में निवेश करते हैं, तो यह उसकी निवेश स्टाइल की झलक है: धैर्य, किस्तों में ख़रीदारी और गिरावट को मौक़े की तरह देखना. पर फ़ंड की होल्डिंग देखकर सीधे ये शेयर ख़रीदना ठीक नहीं है. फ़ंड के पोर्टफ़ोलियो की जानकारी देर से आती है, तब तक प्राइस बदल चुका होता है.

आपके लिए अगला कदम

क्या आपका स्मॉल कैप फ़ंड आपके लक्ष्य से मेल खाता है? कुछ फ़ंड तेज़ी से पोर्टफ़ोलियो बदलते हैं, तो कुछ सालों तक उन्हीं शेयरों पर टिके रहते हैं. दोनों का जोखिम और रिटर्न अलग होता है. Value Research Fund Advisor आपके गोल्स और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से सही फ़ंड चुनने और पोर्टफ़ोलियो को संतुलित रखने में मदद करता है.

सीधे शेयरों में निवेश करना चाहते हैं? किसी फ़ंड की होल्डिंग देखकर शेयर चुनना काफ़ी नहीं है. Just Dial का उदाहरण बताता है कि फ़ंड का लंबा साथ भी मुनाफ़े की गारंटी नहीं. Value Research Stock Advisor के रिसर्च-आधारित रेकमेंडेशन से जानिए कि किस कंपनी का कारोबार और वैल्यूएशन, दोनों लंबे निवेश के लायक हैं.

यह भी पढ़ेंः क्वांट स्मॉल कैप फ़ंड: 5 शेयर जो क़रीब 5 साल से पोर्टफ़ोलियो में बने हुए हैं

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