IPO अनालेसिस

Jio Platforms: अगले दौर की ग्रोथ कहां से आएगी?

भारत के टेलीकॉम बाज़ार की तस्वीर बदलने के बाद, Jio अब ग्रोथ के लिए होम ब्रॉडबैंड, कारोबारी सेवाओं और डिजिटल प्रोडक्ट की तरफ़ देख रही है.

भारत के टेलीकॉम बाज़ार की तस्वीर बदलने के बाद, Jio अब ग्रोथ के लिए होम ब्रॉडबैंड, कारोबारी सेवाओं और डिजिटल प्रोडक्ट की तरफ़ देख रही है.Anand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः Jio ने सस्ता डेटा देकर भारत का टेलीकॉम बाज़ार जीता. अब उसका अगला अध्याय इस पर टिका है कि वो अपने ग्राहकों से, और पहले से बने अपने विशाल नेटवर्क से, कितनी ज़्यादा कमाई निकाल पाती है. और भारत के सबसे बड़े IPO पर नज़र रख रहे निवेशक के लिए असली सवाल यह है कि इस भविष्य का कितना हिस्सा, IPO का प्राइस पहले से मानकर चल रहा है.

सस्ते मोबाइल डेटा से भारत के टेलीकॉम बाज़ार में हलचल मचाने के एक दशक बाद, Jio Platforms अब भारत का सबसे बड़ा IPO लाने जा रही है. 53.33 करोड़ ग्राहकों और मोबाइल ब्रॉडबैंड के लगभग आधे बाज़ार के साथ, कनेक्टिविटी में इसकी पकड़ बहुत मज़बूत है.

₹30,213 करोड़ का यह IPO 21 अक्टूबर 2026 को खुल रहा है, और इसमें सारे नए शेयर जारी होंगे. इसमें से ₹27,500 करोड़ तक कर्ज़ चुकाने के लिए रखे गए हैं. ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी की वैल्यू क़रीब ₹10.3 लाख करोड़ बैठती है.

मोबाइल

Jio Platforms के केंद्र में Reliance Jio Infocomm (RJIL) है, जो मोबाइल कनेक्टिविटी, होम ब्रॉडबैंड और कंपनियों के लिए नेटवर्क सेवाएं चलाती है. FY26 में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू का क़रीब 88% और EBITDA का 95% हिस्सा इसी से आया.

भारत के मोबाइल ब्रॉडबैंड बाज़ार में Jio का हिस्सा 49.8% है. देश में क़रीब 26.1 करोड़ कनेक्शन अब भी पुराने 2G नेटवर्क पर हैं. पर ये ग्राहक प्राइस को लेकर काफ़ी संवेदनशील हैं, इसलिए इन्हें अपनी तरफ़ खींचना Jio के लिए शायद सबसे बड़ा मौक़ा नहीं है.

असली मौक़ा कहीं और है. मान लीजिए Jio के सभी 53.33 करोड़ ग्राहकों का ARPU, यानी हर ग्राहक से हर महीने की औसत कमाई, सिर्फ़ ₹10 बढ़ जाए, और ग्राहकों की संख्या उतनी ही रहे. तो इससे सालाना क़रीब ₹6,400 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू आ सकता है. यह उतना ही है, जितना ₹100 महीना ख़र्च करने वाले क़रीब 5.3 करोड़ नए ग्राहक जोड़ने से आता.

पूरी इंडस्ट्री का मोबाइल कनेक्टिविटी बाज़ार FY26 के ₹2.9 लाख करोड़ से बढ़कर FY31 तक ₹5.2 लाख करोड़ होने का अनुमान है, और इसमें बड़ा हाथ ARPU बढ़ने का होगा. पर Jio का ARPU ₹215.6 है, जो Bharti Airtel के ₹263.9 से अब भी कम है.

होम ब्रॉडबैंड

मोबाइल से उलट, भारत में फ़िक्स्ड ब्रॉडबैंड अभी बहुत कम घरों तक पहुंचा है. इंडस्ट्री का अनुमान है कि इसके कनेक्शन जून 2026 के 6.61 करोड़ से बढ़कर FY31 तक 15.04 करोड़ हो जाएंगे.

इस बाज़ार में Jio का हिस्सा पहले से 43.3% है, और फ़िक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) वाले नए कनेक्शन में 78.6%. FWA में हर घर तक फ़ाइबर केबल बिछाने के बजाय, वायरलेस सिग्नल से इंटरनेट पहुंचाया जाता है.

जून तिमाही में पूरी इंडस्ट्री में जितने नए फ़िक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शन जुड़े, उनमें से क़रीब 62% Jio के थे. अगर Jio आगे इंडस्ट्री में जुड़ने वाले अनुमानित नए कनेक्शन में से आधे भी ले ले, तो उसके मौजूदा ब्रॉडबैंड ग्राहक दोगुने से भी ज़्यादा हो सकते हैं.

पर FWA की अपनी सीमाएं हैं. वायरलेस नेटवर्क की क्षमता सबके बीच बंटी होती है, इसलिए इस्तेमाल बढ़ने पर और नेटवर्क उपकरण और निवेश की ज़रूरत पड़ सकती है. और इन कनेक्शन से कितना मुनाफ़ा होता है, कंपनी ने इसकी पूरी जानकारी नहीं दी है.

भारत में कनेक्टिविटी का मौक़ा

इंडस्ट्री का पैमाना FY26 / जून 2026 FY31 का अनुमान
मोबाइल बाज़ार (₹ लाख करोड़) 2.9 5.2
मोबाइल ब्रॉडबैंड कनेक्शन (करोड़) 100.23 133.94
फ़िक्स्ड ब्रॉडबैंड बाज़ार (₹ करोड़) 34,000 से 35,000 92,000 से 93,000
फ़िक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शन (करोड़) 6.61 15.04
कारोबारी कनेक्टिविटी बाज़ार (₹ करोड़) 49,000 से 50,000 90,000 से 91,000
स्रोत: कंपनी का RHP, इंडस्ट्री के अनुमान.

एंटरप्राइज़

भारत में 7.9 करोड़ से ज़्यादा छोटे, मझोले और लघु कारोबार हैं, पर FY26 में कारोबारों के लिए फ़िक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शन 40 लाख से भी कम थे. इंडस्ट्री को उम्मीद है कि FY31 तक यह संख्या क़रीब 3.2 करोड़ तक पहुंच जाएगी.

Jio इस मौक़े को कनेक्टिविटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और मैनेज्ड सर्विसेज़ के ज़रिये भुनाना चाहती है. उसका मौजूदा नेटवर्क उसे इन तक पहुंचने में बढ़त देता है. जो कारोबार आज उससे कनेक्टिविटी ख़रीदता है, वो आगे चलकर उसकी दूसरी डिजिटल सेवाएं भी ले सकता है.

पर कारोबारी ब्रॉडबैंड कनेक्शन में जहां आठ गुना बढ़त का अनुमान है, वहीं कारोबारी कनेक्टिविटी से होने वाली कमाई इससे कहीं धीमी रफ़्तार से बढ़ने का अनुमान है. यानी कई नए ग्राहक, महंगी एंटरप्राइज़ सेवाओं के बजाय सस्ते कनेक्शन ही ख़रीद सकते हैं.

डिजिटल में Jio के बड़े इरादे

आम ग्राहकों के लिए इसके पास JioSaavn, JioGames, JioAICloud और JioPC जैसी सेवाएं हैं. इनके साथ MyJio और JioTV को मिलाकर, जून तिमाही में इन ऐप्स के औसतन 36.26 करोड़ मासिक एक्टिव यूज़र रहे. हालांकि जो लोग कई ऐप इस्तेमाल करते हैं, वो इसमें एक से ज़्यादा बार गिने गए हो सकते हैं.

इनके बढ़ने के सबूत भी दिखते हैं. Jio Platforms का स्टैंडअलोन रेवेन्यू, जो डिजिटल सेवाओं का है, FY24 के ₹7,571 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹16,167 करोड़ हो गया, यानी हर साल क़रीब 46% की बढ़त.

पर इन आंकड़ों में ग्रुप की ही कंपनियों के बीच के लेन-देन भी शामिल हो सकते हैं. इसलिए इन्हें पूरे ग्रुप के डिजिटल कारोबार का अलग से पहचाना जा सकने वाला रेवेन्यू नहीं माना जा सकता.

Jio के उभरते कारोबार

सब्सिडियरी FY26 रेवेन्यू (₹ करोड़) कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में हिस्सा EBITDA मार्जिन
Jio Things (IoT) 801 0.55% 1.80%
Jio Haptik (बातचीत वाला AI) 309.3 0.21% 20.40%
Radisys India (टेक्नोलॉजी) 867.5 0.59% 17.50%
Saavn Media (म्यूज़िक) 343.9 0.23% 12.50%
स्रोत: कंपनी का RHP.

FY26 में Jio Things का रेवेन्यू 77% बढ़ा, पर उसका EBITDA मार्जिन सिर्फ़ 1.8% रहा. वहीं Haptik और Radisys India का मार्जिन कहीं बेहतर रहा. इससे साफ़ है कि हर डिजिटल सेवा का कमाई का हिसाब अलग है. कुछ आगे चलकर मुनाफ़े वाले सॉफ़्टवेयर कारोबार बन सकती हैं, जबकि कुछ में हार्डवेयर या कंटेंट का ख़र्च जुड़ा रहता है.

क्या Jio की भारी-भरकम संपत्ति उसकी ताक़त बन सकती है?

Jio के पास ₹6.16 लाख करोड़ की कुल संपत्ति और ₹3.34 लाख करोड़ की नेट वर्थ है, और FY26 में इस पर उसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) सिर्फ़ 9.4% रहा. पर यह कम रिटर्न, कई सालों में बने इंफ़्रास्ट्रक्चर की असली कमाई की क्षमता को पूरी तरह नहीं दिखाता.

FY24 से FY26 के बीच रेवेन्यू 34% बढ़ा, और शेयरहोल्डरों के हिस्से का मुनाफ़ा 40%. जबकि कुल संपत्ति सिर्फ़ 14% बढ़ी. यानी Jio अपनी संपत्ति के मुक़ाबले पहले से ज़्यादा रेवेन्यू और मुनाफ़ा कमा रही है.

Jio Platforms का फ़ाइनेंशियल प्रदर्शन

अहम आंकड़े (₹ करोड़) FY24 से FY26 की सालाना ग्रोथ FY26 FY25 FY24
रेवेन्यू 15.80% 1,46,885 1,28,218 1,09,558
EBIT (दूसरी आय छोड़कर) 19.60% 46,133 38,918 32,238
शेयरहोल्डरों के हिस्से का मुनाफ़ा 18.50% 30,064 26,110 21,422
कर्ज़ और लीज़ 12.30% 84,669 85,696 67,111
स्रोत: कंपनी का RHP. EBIT यानी ब्याज और टैक्स से पहले की कमाई.
अहम रेशियो (%) FY26 FY25 FY24
ROE 9.4 9 8
ROCE 10.8 12.5 12.8
EBIT मार्जिन (दूसरी आय छोड़कर) 31.4 30.4 29.4
स्रोत: कंपनी का RHP.

दिलचस्प बात यह है कि ROCE, यानी कारोबार में लगी पूंजी पर रिटर्न, FY25 के 12.5% से घटकर FY26 में 10.8% रह गया. इसकी एक वजह यह है कि नेटवर्क और स्पेक्ट्रम में हुआ भारी निवेश, बनने के दौर से निकलकर इस्तेमाल में आ गया, जिससे लगी हुई पूंजी 31% बढ़ गई. Jio अपने ROCE के हिसाब में बन रही संपत्ति को नहीं गिनती. इसलिए जो संपत्ति नई-नई चालू होती है, वो पूरी कमाई शुरू करने से पहले ही लगी हुई पूंजी में जुड़ जाती है.

अब मौक़ा इस इंफ़्रास्ट्रक्चर का और ज़्यादा इस्तेमाल करने का है. टैरिफ़ बढ़ना, ज़्यादा ब्रॉडबैंड ग्राहक और डिजिटल सेवाएं, ये सब उतना ही नया निवेश किए बिना अतिरिक्त मुनाफ़ा दे सकते हैं.

पर आगे नेटवर्क अपग्रेड और विस्तार पर तो पैसा लगेगा ही. साथ ही Jio पर क़रीब ₹1.05 लाख करोड़ की स्थगित देनदारी है, जो ज़्यादातर स्पेक्ट्रम से जुड़ी है, और जिसे कंपनी अपने बताए नेट कर्ज़ में नहीं गिनती.

वैल्यूएशन क्या कहता है?

IPO के ऊपरी प्राइस बैंड पर Jio पिछले 12 महीनों की कमाई के क़रीब 33.6 गुना पर, और IPO के बाद की बुक वैल्यू के क़रीब 2.8 गुना पर मिल रही है.

Bharti Airtel से इसकी तुलना काम की है. मोबाइल ब्रॉडबैंड में Jio का साइज़ बड़ा है और फ़िक्स्ड ब्रॉडबैंड में उसका बाज़ार हिस्सा ज़्यादा. वहीं Airtel का ARPU ऊंचा है, और कारोबारी ग्राहकों में उसकी पकड़ पहले से मज़बूत है. फिर भी, बुक वैल्यू के 2.8 गुना पर शेयर ख़रीदने वाले निवेशक को इसके मौजूदा, कम ROE पर ध्यान देना होगा. अगर मौजूदा इंफ़्रास्ट्रक्चर आगे की ग्रोथ को सहारा दे भी दे, तब भी IPO का प्राइस सुधार की उम्मीदों को पहले से शामिल किए हुए है.

यह भी पढ़ें: टेलीकॉम या टेक? यही एक फ़ैसला तय करेगा कि Jio की क़ीमत क्या है

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