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आपका पहला म्‍यूचुअल फ़ंड

पहला फ़ंड यह तय करता है कि स्‍टॉक इन्‍वेस्टिंग में आपका भरोसा मजबूत होगा या टूट जाएगा

पहला फ़ंड यह तय करता है कि स्‍टॉक इन्‍वेस्टिंग में आपका भरोसा मजबूत होगा या टूट जाएगा

आपके पहले म्‍यूचुअल फ़ंड में तीन बातें होनी चाहिए। फ़ंड फ़ायदेमंद हो, उसे समझना आसान हो, और निवेश करने में सहूलियत हो। नए निवेशकों के लिए आम तौर पर दो तरह के फ़ंड हैं, जो इन बातों पर खरे उतरते हैं। ये हैं टैक्‍स सेविंग फ़ंड और अग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड।
हम ऐसा कह रहे हैं, इसकी वज़ह भी जान लीजिए। जब आप म्‍यूचुअल फ़ंड की दुनिया में पहला कदम रखने जा रहे हैं तो ऐसा फ़ंड चुनना ज़्यादा बेहतर है, जो रकम का बड़ा हिस्‍सा इक्विटी में निवेश करता हो। क्‍योंकि ज़्यादा संभावना इस बात की है कि पहले से इक्विटी में आपका कोई निवेश नहीं होगा। नए निवेशकों का निवेश आम तौर पर बैंक डिपॉजिट, पब्लिक प्रॉविडेंट फ़ंड और दूसरे फिक्‍स्ड इनकम इन्‍वेस्‍टमेंट्स में होता है। बहुत से बातों पर बहस हो सकती है लेकिन इक्विटी लंबी अवधि के निवेश के लिए सबसे अच्‍छा विकल्‍प है, इस बात पर बहस की गुंजाइश नहीं है।
म्‍यूचुअल फ़ंड इक्विटी में निवेश का सबसे सरल और सुरक्षित तरीका है। इसका मतलब है कि आपको अपने पहले फ़ंड के तौर पर जिस टाइप का फ़ंड चुनना चाहिए, वह ज़रूर एक इक्विटी फ़ंड होना चाहिए। दो तरह के फ़ंड हैं, जो नए निवेशकों के लिए खासे अच्‍छे हैं। ये हैं टैक्‍स सेविंग फ़ंड और अग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड।

टैक्‍स सेविंग फ़ंड: टैक्‍स सेविंग फ़ंड या इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग्‍स स्‍कीम्‍स। इसे ELSS भी कहते हैं। ये 100 फ़ीसदी रकम इक्विटी में निवेश करना वाला फ़ंड है। फ़ंड में निवेश की जाने वाली रकम पर इनकम टैक्‍स एक्‍ट के सेक्‍शन 80 सी के तहत टैक्‍स छूट भी मिलती है। सेक्‍शन 80 सी के तहत आप कई तरह के इंस्‍ट्रूमेंट में 1.5 लाख निवेश कर सकते हैं, और इन इंस्‍ट्रूमेंट में ELSS फ़ंड भी शामिल हैं। ये इक्विटी फ़ंड हैं, ऐसे में इनमें निवेश लंबी अवधि के लिए किया जाना चाहिए। यहां लंबी अवधि का मतलब है कम से कम 5 साल से ज्‍यादा समय के लिए। ELSS फ़ंड के मामले में लंबी अवधि का मामला कुछ हद तक अपने आप बन जाता है। ऐसा 3 साल के लॉक इन पीरियड की वज़ह से होता है। इस अवधि में निवेशक को अच्‍छा रिटर्न मिलता है, ऐसे में इक्विटी को लेकर उसकी राय अच्‍छी बनती है।

अग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड: अग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड में इक्विटी और डेट इन्‍वेस्‍टमेंट एक तय अनुपात में होते हैं। इस अनुपात को बनाए रखने के लिए फ़ंड मैनेजर गेन करने वाली होल्डिंग से निवेश बेच कर कम गेन करने वाली होल्डिंग में लगा देता है। इसे एसेट रीबैलेंसिंग कहते हैं।
वास्‍तव में डेट इक्विटी में होने वाले गेन को सुरक्षित रखता है। अग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि ये प्‍योर इक्विटी फ़ंड की तुलना में ज्‍यादा सुरक्षित हैं। बाज़ार बढ़ने पर ये फ़ंड भी अच्‍छी बढ़त हासिल करते हैं लेकिन बाज़ार गिरने पर वे कम तेजी से गिरते हैं। साथ ही ये अच्‍छे दिनो में हासिल किए गए गेन को बनाए रखते हैं।
पहले फ़ंड के साथ आपका अनुभव यह तय करेगा कि आप किस तरह से निवेश करते हैं। इसीलिए आप इस फैसले को ज़्यादा जटिल नहीं बनाना चाहेंगे। अग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड चुन कर आप चीजों को सरल रख सकते हैं। इससे आपको फिक्‍स्ड इनकम विकल्‍पों की तुलना में ऊंचा रिटर्न हासिल करने में मदद मिलेगी। निवेश से टैक्‍स बचाने के लिए ELSS चुनें। और नजरिया लंबी अवधि का रखें।

ये लेख पहली बार फ़रवरी 11, 2020 को पब्लिश हुआ.

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