
फंड में निवेश करते हुए हमको ग्रोथ और डिवीडेंड ऑप्शन में से एक चुनना होता है। कृपया बताएं किसको ग्रोथ ऑप्शन चुनना चाहिए और किसको डिवीडेंड ऑप्शन चुनना चाहिए ?
अज्ञात
2018 के आम बजट की घोषणाओं से पहले डिवीडेंड और ग्रोथ प्लान में चुनने का कारण था। मौजूदा समय में भी दोनों ही ऑप्शन उपलब्ध हैं लेकिन किसी को भी डिवीडेंड प्लान नहीं चुनना चाहिए। पहले अग्रेसिव हाइब्रिड या इक्विटी फंड में निवेश करने पर और निवेश एक साल तक बनाए रखने पर सारा मुनाफा या रिटर्न टैक्स फ्री था। इसी तरह से डिवीडेंड भी टैक्स फ्री था। लेकिन डिवीडेंड पर अब 10 फीसदी डिवीडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लगता है। तो आपको डिवीडेंड प्लान में निवेश करने पर डिवीडेंड तो मिलेगा लेकिन यह 10 फीसदी तक घट जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर आपका फंड 10 रुपए डिवीडेंड देता है तो आपको 9 रुपए ही मिलेगा। इसलिए अब डिवीडेंड प्लान में निवेश करने का कोई मतलब नहीं है।
म्युचुअल फंड से समय समय पर पैसा निकाल कर आप बेहतर रिटर्न हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा म्युचुअल फंड में सिस्टमेटिक विदड्रॉअल प्लान की मदद से यह तय कर सकते है कि कब कितना पैसा निकालना है। डिवीडेंड में आपकी आय का प्रवाह फंड कंपनियों के फैसले पर निर्भर करता है। जब वे चाहती हैं तभी डिवीडेंड घोषित करती हैं। लेकिन सिस्टमेटिक विद्ड्रॉअल प्लान के जरिए आप तय कर सकते हैं कि आपको हर महीने या सालाना कितना पैसा निकालना है। यानी एक तरह से अगर आप अपनी नियमित आय की जरूरत को आसानी से पूरी कर सकते हैं।
ये लेख पहली बार नवंबर 13, 2019 को पब्लिश हुआ.

