सैलरी क्लास के लोगों के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग काफी आसान होती है। आप को हर माह एक तय रकम सैलरी के तौर पर मिलती है ऐसे में आप यह आसानी से तय कर सकते हैं कि आपका फाइनेंशियल प्लान कैसा होना चाहिए। हालांकि प्रोफेशनल्स जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, डिजायनर और सलाहकार के लिए फाइनेंशियल चैलेंज अलग तरह के हैं। ऐसे में उनकी जरूरतों के हिसाब से समाधान की जरूरत है।
तय करें गोल
प्रोफेशनल्स की जिंदगी काफी व्यस्त होती है। सैलरी पाने वालों के काम के घंटे तय होते हैं लेकिन प्रोफेशनल्स के साथ ऐसा नहीं है। इसकी वजह से उनकी रूटीन का बड़ा हिस्सा काम में जाता है। ऐसे में फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए बहुत कम समय बचता है। सबसे पहले प्रोफेशनल्स को अपना फाइनेंशियल गोल तय करने और यह अनुमान लगाने पर फोकस करना चाहि कि गोल के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी। फाइनेंशियल गोल कम अवधि और लंबी अवधि दोनों तरह का हो सकता है। जैसै कार या घर खरीदना, छुट्टियों पर जाना, बच्चों की शिक्षा और शादी, रिटायरमेंट आदि। आपको इस बात का अनुमान लगाना होगा कि अगर आप को आज इन जरूरतों को पूरा करना है तो कितना खर्च करना पड़ेगा। इसके बाद आप इस रकम को महंगाई दर के हिसाब से बढ़ा सकते हैं। इससे आपको भविष्य के लिए एक मोटा अनुमान मिल जाएगा। आप चाहें तो इस काम में फाइनेंशियल प्लानर की मदद भी ले सकते हैं। एक बार यह पता चल जाए कि आपको किसी गोल के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी तो आप इसके लिए निवेश शुरू कर सकते हैं।
लंबी अवधि के गोल यानी ऐसे गोल जिनके लिए रकम की जरूरत पांच साल या इससे अधिक समय बाद होगी के लिए इक्विटी फंड के जरिए एसआईपी में निवेश करना फायदेमंद हो सकता है। सिर्फ इक्विटी ही ऐसा असेट क्लास है जो लंबी अवधि में महंगाई के असर से मुकाबला कर सकती है और महंगाई से कहीं अधिक रिटर्न दे सकती है। इस तरह से इक्विटी लंबी अवधि में रकम बनाने के लिहाज से बेहतर विकल्प है। हालांकि इक्विटी कम अवधि में तेज उतार- चढ़ाव के लिए भी जानी जाती है। ऐसे में उतार-चढ़ाव के बीच एअआईपी आपके निवेश की लागत को औसत बनाती है। एसआईपी आपमें निवेश को लेकर अनुशासन भी लाती है। हालांकि इस स्टेज पर प्राफेशनल्स के लिए एक बड़ी चुनौती एक तय आय का न होना है।
प्रोफेशनल्स के काम का नेचर कुछ ऐसा होता है कि उनकी एक तय आय नहीं होती है। आप एक डॉक्टर के बारे में सोचिए। किसी दिन वह ज्यादा मरीज देखता है वहीं किसी दिन कम मरीज आते हैं। किसी दिन वह हॉस्पिटल विजिट पर जाता है और ऑपरेशन करता है और किसी दिन कोई हॉस्पिटल विजिट नहीं होती है। आय तो कम ज्यादा होती है लेकिन प्रोफेशनल्स के कुछ खर्च फिक्स होते हैं। उदाहरण के लिए डॉक्टर की क्िलीनिक में कुछ स्टॉफ होते हैं जिनको हर माह सैलरी देनी होती है। इसके अलावा भी कुछ खर्च होते हैं जैसे ऑफिस रेंट, ट्रैवेल पर खर्च, उपकरण खरीदने पर खर्च आदि। ये सभी चीजें मिल कर प्राफेशनल्स की मासिक आय में उतार-चढ़ाव का कारण बनतीं हैं। ऐसे में वे एसआईपी कैसे कर सकते हैं।
एक रास्ता है। आपकी अपनी पिछले कुछ माह की आय पर गौर करना होगा। इस तरह से आप यह तय कर सकते हैं कि हर माह कितनी रकम बचा पाएंगे। आप उतनी ही रकम की एसआईपी शुरू कर सकते हैं। अगर आपके पास किसी माह निवेश के लायक अतिरिक्त रकम बचती है तो इस रकम को अलग रखें। इस रकम का इस्तेमाल कभी एसआईपी के लिए रकम कम पड़ने पर करें। उदाहरण के लिए अगर आप 10,000 रुपए की एसआईपी चला रहे हैं और किसी माह आपके पास 2,000 रुपए एक्स्ट्रा बच जाते हैं तो इस रकम को अलग रख दें। अगले माह, अगर आप के पास निवेश के लिए 9,000 रुपए ही हैं तो पिछले माह की बची हुई रकम से ले सकते हैं। अगर आपके पास निवेश के लिए ज्यादा रकम बच जाती है तो आप इसे थोड़ा थोड़ा करके इक्विटी फंड में लगा सकते हैं। इसी तरह से अगर आपको कहीं से बड़ी रकम मिलती है तो इसे भी आप छोटे छोटे भाग में बांट कर इक्विटी फंड में निवेश कर सकते हैं। आप सरप्लस रकम को एक बार में निवेश न करें। ऐसा करने पर हो सकता है कि निवेश उस समय हो जब बाजार रिकार्ड ऊंचाई पर हो। यह तरीका आपके लिए नुकसान का सबब बन सकता है।
कुछ प्रोफेशनल्स यह सोच सकते हैं कि जब वे हर माह खुद से निवेश कर सकते हैं तो एसआईपी की जरूरत क्या है। इस सवाल का जवाब देने के लिए हमें फिर से वहीं जाना पड़ेगा जहां से हमने शुरू किया था। अपने व्यस्त शेड्यूल की वजह से हो सकता है कि प्रोफेशनल्स सिस्टमेटिक तरीके से निवेश करने से चूक जाएं। इसके अलावा आय में उतार चढ़ाव की वजह से भी वे निवेश को नजरअंदाज कर सकते हैं। ऐसे में एसआईपी में निवेश करते हुए आप ज्यादा अनुशासित रहते हुए प्रभावी तरीके से अपना फाइनेंशियल गोल हासिल कर सकते हैं।
ये लेख पहली बार सितंबर 13, 2021 को पब्लिश हुआ.


