
फ्रैंकलिन प्राइमा फंड पर आपकी क्या राय है ? इसके स्टैंडर्ड डेविएशन एंड बीटा वैल्यूज इसके साथियों की तुलना में कमजोर हैं। इसके अलावा इसकी क्रिसिल रेटिंग और वैल्यू रिसर्च रेटिंग क्रमश: 2 और 3 हैं।
वायसाक आर
फ्रैंकलिन इंडिया प्राइमा 1993 में लांच हुआ था और यह सबसे पुराना मिड कैप फंड है। बाजार की तेजी के दौर में इसका प्रदर्शन शानदार रहा है। जैसा दौर अब से छह माह पहले तक बाजार में था। इसके बाद फंड का प्रदर्शन खराब रहा है।
शुरूआती तीनों फ्रैंकलिन फंड चाहे वह ब्लूचिप हो, इंडिया इक्विटी हो या प्राइमा तीनों क्वालिटी पर फोकस करते हैं और इनका बहुत लंबा ट्रैक रेकॉर्ड है। इसके अलावा इन फंडों की फोकस्ड अप्रोच अपने इन्वेस्टमेंट लक्ष्य पर कायम रहने की अनुमति देती है। ये फंड बाजार के संदिग्ध हिस्से में निवेश करने से दूर रहते हैं। ऐसा करना बाजार के कुछ खास दौर में रिटर्न के लिहाज से आकर्षक लग सकता है लेकिन बाजार में गिरावट आने पर यह निराशाजनक भी होता है। और फ्रैंकलिन के ये फंड बाजार के संदिग्ध पॉकेट से दूर रहते हैं। ऐसे में इसका असर बाजार के कुछ खास दौर में इनके प्रदर्शन पर दिखता है। कोविड संकट की वजह से इन फंडों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। कोरोना संकट के बारे में किसी ने कभी पहले सोचा नहीं था। ऐसे में इसका असर अब भी जारी है।
ऐसे में मैं कहूंगा कि यह अब भी उच्च गुणवत्ता का फंड है। तो आपको इसके प्रदर्शन को सीमित दायरे में नहीं देखना चाहिए कि फंड ने पिछले एक दो साल में कैसा प्रदर्शन करना चाहिए। मैं इस फंड को लेकर आशावान हूं लेकिन साथ यह भी कहना चाहता हूं कि हमारे पास ऐसे मौके कभी भी नही थे जैसे आज हैं। आज हमारे पास बड़ी संख्या में उच्च गुणवत्ता वाले मिड कैप फंड उपलब्ध हैं। ये बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
ये लेख पहली बार जुलाई 11, 2020 को पब्लिश हुआ.




