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हाइब्रिड फंड से बनाएं निवेश का संतुलन

अपना असेट अलॉकेशन बनाए रखने के लिए कुछ ही निवेश्‍कों को हाइब्रिड फंड के अलावा किसी और टूल की जरूरत है

अपना असेट अलॉकेशन बनाए रखने के लिए कुछ ही निवेश्‍कों को हाइब्रिड फंड के अलावा किसी और टूल की जरूरत है

पिछले माह मैंने इस कॉलम में बात की थी कि एक आइडियल इक्विटी डेट असेट अलॉकेशन पैटर्न क्‍या हो जो आपकी निवेश की जरूरत को पूरा करता हो। मैंने सलाह दी थी कि इक्विटी हो डेट आपको इसे होम्‍योपैथिक खुराक की तरह लेने से बचना चाहिए। इसका मतलब है कि अगर आप पोर्टफोलियो में इक्विटी या डेट का बहुत छोटा हिस्‍सा रख रहे हैं तो इसका कोई फायदा नहीं होगा। इक्विटी स्थिरता की कीमत पर रिटर्न देती है और डेट रिटर्न की कीमत पर स्थिरता देता है। यह समझना बहुत आसान है। अगर आप इस चीज को समझ रहे हैं तो यह साफ हो जात है कि एक इक्विटी पोर्टफोलियो में बहुत थोड़ा हिस्‍सा डेट का या डेट पोर्टफोलियो में छोटा हिस्‍सा इक्विटी का रखने का कोई मतलब नहीं हैं। आप इक्विटी रखें या डेटा उसका अलॉकेशन ठीक ठाक मात्रा में होना चाहिए जिससे वह कुड अंतर पैदा कर सके।
इसके कुछ अपवाद हैं। युवा जिन्‍होंने अभी निवेश शुरू ही किया है वे 100 फीसदी रकम इक्विटी में लगा सकते हैं क्‍योंकि वे जीवन के ऐसे दौर में हैं जहां थोड़ा ज्‍यादा उतार चढ़ाव ज्‍यादा मायने नहीं रखता। लेकिन समय बीतने के साथ साथ जैसे जैसे आप जीवन में आगे बढ़ते हैं फिक्‍स्ड इनकम में आपको अलॉकेशन बढ़ना चाहिए। हालांकि अब भी वीजों को ज्‍यादा जटिल बनाने की जरूरत नहीं है। मेरा मानना है कि दो सरल लेवल के बारे में सोचना चाहिए। एक तिहाई और दो तिहाई। आप या तो जीवन के इस दौर में हैं जहां एक तिहाई इक्विटी और दो तिहाई फिक्‍स्ड इनकम आपके लिए ठीक है या आप जीवन के उस चरण में हैं जहां एक तिहाई फिक्‍स्ड इनकम और दो तिहाई इक्विटी ठीक है।

इसके बारे में बहुत ज्‍यादा सोचने की जरूरत नहीं है। और न ही अलॉकेशन थोड़ा भी इधर उधर होने पर बहुत ज्‍यादा चिंता करने की जरूरत है। अगर आप एक तिहाई डेट चाहते हैं और बाजार में उतार चढ़ाव से यह 33 फीसदी से घट कर 30 फीसदी रह जाता है तो इसका यह मतलब नहीं है कि आपको तुरंत किसी तरह का कदम उठाने की जरूरत है। हां थोड़ा ज्‍यादा इधर उधर होने पर आपको इसे ठीक करना पड़ेगा लेकिन निवेश में बहुत ज्‍यादा कदम उठाने का कोई फायदा नहीं है।
बेहतर ऑप्‍शन यह होगा कि आप शुरूआत में एक दो म्‍युचुअल फंड में एसआईपी शुरू करें। और निवेश में संतुलन का काम एसआईपी खुद करेगी। निश्चित तौर पर मैं बैलेंस फंड की बात कर रह हूं। इसे हाइब्रिड फंड के नाम से भी जानते हैं। जून, 2018 में सेबी ने फंड की तमाम कैटेगरी की परिभाषा तय की है। तो हमारे पास विभिन्‍न तरह के हाइब्रिड फंड हैं जो असेट अलॉकेशन के तीन स्‍तरों में फिट हो सकते हैं। हालांकि यह अलॉकेशन के हिसाब से उतने सटीक नहीं है जितना मैंने अलग अलग स्‍तर के लिए बात की है लेकिन यह काम आपका काम अच्‍छी तरह से कर सकते हैं।

हाइब्रिड फंड की तीन बड़ी कैटेगरीज हैं जिनमें काफी संख्‍या में फंड उपलब्‍ध हैं। इनमें इक्विटी अलॉकेशन की रेंज अलग अलग है। पहला है कंजरवेटिव हाइब्रिड। इसमें इक्विटी अलॉकेशन की रेंज 10 से 25 फीसदी है। फिर है बैलेंस हाइब्रिड। इसमें इ क्विटी की रेंज 40 से 60 फीसदी है। और तीसरी है अग्रेसिव हाइब्रिड। इसमें इक्विटी की रेंज 65 से 80 फीसदी है। इनमें हर एक साथ कुछ शर्ते हैं। और कोई भी विकल्‍प चुनने से पहले आपको वैल्‍यू रिसर्च पर जाकर रिसर्च करना चाहिए। शुरूआत के लिए यह आर्टिकल आपका काम आसान कर सकता है।

दी गई रेंज में अलग अलग फंड मैनेजर अलग तरीका अपना सकते हैं लेकिन फिर भी ऐसा फंड तलाश करना मुश्किल नहीं है जो आपके लिए उस असेट अलॉकेशन लेवल को पूरा कर जिसका फैसला आपने खुद के लिए किया है। एक बार जब आपने ऐसा फंड चुन लिया है तो साफ है कि आप इस फड में एसआईपी शुरू करेंगे। समय बीतने के साथ आपको अपने असेट अलॉकेशन पर नजर रखनी चाहिए। क्‍या इससे आपके निवेश में कुछ जटिलता नहीं आएगी। ऐसा होगा लेकिन यह तभी होगा जब आप वैल्‍यू रिसर्च ऑनलाइन पर माई इन्‍वेस्‍टमेंट जैसे टूल का उपयोग न करें। माई इन्‍वेस्‍टमेंट का इस्‍तेमाल करते हुए आप अपना फंड स्‍टेटमेंट अपलोड कर सकते हैं और बदलता हुआ असेट अलॉकेशन ट्रैक कर सकते हैं। ऐसा आपको रोज करने की जरूरत नहीं है। आप अगर दो तीन माह पर ऐसा करती हैं तो यह काफी है। यह अलग अलग स्‍टॉक्‍स और फंड में निवेश करने और निवेश में संतुलन बनाने के लिए कदम उठाने की तुलना में काफी कम है।

जब ओरिजनल असेट अलॉकेशन ज्‍यादा डिस्‍टर्ब हो जाए तो आपको किसी फंड में निवेश्‍ बढाना होता है और किसी फंड में निवेश घटाना होता है। इसी तरह समय के साथ जीवन आगे बढ1ता है और आपकी जरूरतें बदलती हैं। तो आपको अपना असेट अलॉकेशन ज्‍यादा सुरक्षित या अग्रेसिव लेवल की ओर ले जाने की जरूरत होती है।

इस तरह का सुव्‍यवस्थित तरीका अपना कर जीवन भर बहुत कम प्रयास के साथ आप अपना निवेश मैनेज कर सकते हैं।

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