वैल्यू रिसर्च से पूछें

सेबी के नए नियम के बाद मल्‍टी कैप फंड निवेशक क्‍या कर सकते हैं ?

धीरेंद्र कुमार का कहना है कि अभी आप को कुछ करने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि असेट मैनेजमेंट कंपनियां अभी इस बात पर विचार कर रही हैं कि उनका अगला कदम क्‍या होना चाहिए। आप अपडेट के लिए वैल्‍यू रिसर्च ऑनलाइन विजिट करते रहें

धीरेंद्र कुमार का कहना है कि अभी आप को कुछ करने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि असेट मैनेजमेंट कंपनियां अभी इस बात पर विचार कर रही हैं कि उनका अगला कदम क्‍या होना चाहिए। आप अपडेट के लिए वैल्‍यू रिसर्च ऑनलाइन विजिट करते रहें

सेबी के नए नियम के बाद मल्‍टी कैप फंड निवेशकों को क्‍या करना चाहिए ?

आदित्‍य जिचकर

अभी आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है। सेबी के नए नियम ने बड़ा अंतर पैदा कर दिया है। मल्‍टी कैप फंड को अब अपने पोर्टफोलियो को नए सिरे से समायोजित करना होगा। कुछ बड़े मल्‍टी कैप फंड का स्‍माल केप में निवेश कुछ भी नहीं है और अगर इन फंडों को 25 फीसदी रकम स्‍माल कैप और 25 फीसदी मिड कैप में निवेश करना पड़ा तो उनके पोर्टफोलियो का कैरेक्‍टर पूरी तरह से बदल जाएगा।

इसके अलावा मुझे नहीं लगता है कि स्‍माल कैप यूनीवर्स में इतने कम समय में बड़े पैमाने पर निवेश को पचाने के लायक लिक्विडिटी है। तो मुझे उम्‍मीद है कि बहुत से फंड अपना रंग बदल लेंगे। वे या तो खुद को फोकस्‍ड फंड, लार्ज कैप या मिड कैप फंड में बदल लेंगे। या नए नियमों के अनुपालन के लिए कोई और कदम उठाएंगे।

और जो फंड इन नियमों का लागू करेंगे वे सही मायने में मल्‍टी कैप नहीं माने जाएंगे। ऐसा इसलिए होगा क्‍योंकि भारतीय इक्विटी मार्केट की समूची मार्केट कैप में टॉप 100 कंपनियों का योगदान 75 फीसदी तक है। बाकी लगभग 15 फीसदी मार्केट कैप मिड कैप या 11 से 12 फीसदी स्‍माल कैप कंपनियों का है। मैं आपको बीएसई 500 ब्रेकअप के आधार पर सिर्फ एक अनुमान दे रहा हूं। यहीं पर ज्‍यादातर मल्‍टी कैप म्‍युचुअल फंड निवेश करते हैं। म्‍युचुअल फंड का कुल पोर्टफोलियो लगभग 857 स्‍टॉक्‍स में फैला हुआ है और नीचे की लगभग 100 कंपनियों में निवेश बहुत कम है। ऐसे में भारत के म्‍युचुअल फंड बाजार में निवेश करने के लायक यूनीवर्स बहुत छोटा है।

आपके लिए साफ जवाब यह है कि अभी कुछ म‍त करिए। असेट मैनेजमेंट कंपनियों के पास जनवरी तक का समय है। इस समय का उपयोग करते हुए वे अपना कदम तय करेंगी। हालांकि फंड को अपने कदम के बारे में पहले से घोषणा करनी होगी जिससे निवेशक फैसला ले सकें। वैल्‍यू रिसर्च में हम आपको बताते रहेंगे कि आपको अपने अलग अलग मल्‍टी कैप फंड के साथ क्‍या करना चाहिए। क्‍योंकि सेबी का नया नियम हमारे लिए बड़ी चिंता की सबब है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि मैं सालों से एक ही बात कहता रहा हूं कि चीजों को सरल रखें। और दो तीन फंड में ही निवेश करें और ये फंड मल्‍टी कैप फंड होने चाहिए। और यह सवाल उठ रहा है कि मल्‍टी कैप फंड का क्‍या होगा।

हम आपको बताते रहेंगे कि आपको अपने मल्‍टी कैप फंड के साथ क्‍या करना चाहिए। आप अपडेट के लिए वैल्‍यू रिसर्च वेबसाइट पर विजिट करते रहें। हम फंड कंपनियों पर लगातार नजर रख रहे हैं कि वे अपने मल्‍टी कैप फंड के साथ क्‍या करने जा रही हैं।


ये लेख पहली बार अक्तूबर 05, 2020 को पब्लिश हुआ.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

कुछ इंटरनेशनल फ़ंड निवेश के लिए खुले, लेकिन घरेलू फ़ंड भी दे सकते हैं मौक़ा

पढ़ने का समय 7 मिनट•आकार रस्तोगी

Jio Platforms: अगले दौर की ग्रोथ कहां से आएगी?

पढ़ने का समय 7 मिनट•सत्यजीत सेन

YES Bank की ₹8,415 करोड़ की मुसीबत: क्या ये झटका सह पाएगा बैंक?

पढ़ने का समय 6 मिनट•सत्यजीत सेन

धनतेरस पर सोना ख़रीदना निवेश नहीं है

पढ़ने का समय 5 मिनट•धीरेंद्र कुमार

एक साल में LG का शेयर उछला पर मुनाफ़ा पीछे रह गया

पढ़ने का समय 6 मिनट•Ananya Khurana

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

तीन साल का इंतज़ार

अभी-अभी पैर जमा रहे फ़ंड्स को परखने का चार-टेस्ट वाला तरीक़ा

अन्य एपिसोड

दूसरी कैटेगरी