ABCD ETF

क्या होता है ETF और इनमें निवेश के क्या फ़ायदे हैं?

ETF कम ख़र्च में स्टॉक की एक बास्केट में निवेश का तरीक़ा है, जो इंडेक्स को ट्रैक करता है.

ETF कम ख़र्च में स्टॉक की एक बास्केट में निवेश का तरीक़ा है, जो इंडेक्स को ट्रैक करता है.

What is ETF and how it works: अगर आप निवेश में दिलचस्पी रखते हैं, तो हो सकता है कि आपने 'ETF' के बारे में सुना हो. एक्सचेंज-ट्रेडेड फ़ंड (ETF) शेयरों की एक बास्केट होती है, जो किसी कंपनी के स्टॉक की तरह ही ट्रेड करते हैं. एक ETF आमतौर पर निफ़्टी या सेंसेक्स जैसे इंडेक्स को ट्रैक करता है. इस तरह से, ETF में एक स्टॉक और एक फ़ंड दोनों की ख़ूबियां जुड़ी होती हैं.

भारत में पहला ETF 2001 में लॉन्च किया गया था, लेकिन 2015 तक ETF को लोकप्रियता नहीं मिली थी. पिछले सात साल में, इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट सालाना 47.4 फ़ीसदी की दर से बढ़ा है. अप्रैल 2017 में ये ₹51,700 करोड़ के स्तर पर था और अप्रैल 2024 में बढ़कर ₹7.83 लाख करोड़ से ज़्यादा हो गया. अगस्त 2024 में, निफ़्टी 50 इंडेक्स को ट्रैक करने वाले ETF का एसेट अंडर मैनेजमेंट ₹3 लाख करोड़ के आंकड़े के करीब पहुंच गया है.

ETF के फ़ायदे

ETFs से निवेश के कई फ़ायदे होते हैं:

आसान: ETFs एक इंडेक्स को ट्रैक करते हैं, इसलिए ये बाज़ार जैसा रिटर्न पाने का एक आसान ज़रिया हैं. अगर आप भारतीय इकोनॉमी के बारे में पॉज़िटिव हैं और इसकी क्षमताओं से फ़ायदा उठाना चाहते हैं, तो सेंसेक्स या निफ़्टी ETF ख़रीदना इस लक्ष्य का सबसे आसान तरीक़ा है.

कम ख़र्च: ETFs का एक बड़ी फ़ायदा एक्टिव मैनेजमेंट वाले फ़ंड्स की तुलना में उनकी कॉस्ट कम होना है. ETFs केवल एक निश्चित इंडेक्स की नकल करते हैं, इसलिए उनके साथ फ़ंड मैनेजर के फ़ैसले लेने की शर्त नहीं जुड़ी होती. साथ ही, एक्टिव मैनेजमेंट वाले फ़ंड की तुलना में ETFs में ट्रांज़ेक्शन बहुत कम होते हैं. इसलिए, उनकी कॉस्ट बहुत कम हो जाती है.

डाइवर्सिफ़िकेशन: अगर आप कुछ शेयरों में निवेश करते हैं, तो आपको सही डाइवर्सिफ़िकेशन पाने के लिए पर्याप्त संख्या में कंपनियों के स्टॉक ख़रीदने होंगे. जब आप ETF में निवेश करते हैं, तो आपको तुरंत डाइवर्सिफ़िकेशन मिल जाता है. इसके अलावा, आप चाहे कितनी भी रक़म निवेश करें, आपका ये डाइवर्सिफ़िकेशन क़ायम रहता है.

ट्रांसपरेंसी: ETF की क़ीमतें रियल टाइम में उपलब्ध होती हैं और उनका पोर्टफ़ोलियो, अपने इंडेक्स के जैसा ही होता है. इससे आपको ये पता चला जाता है कि आपको क्या मिल रहा है और आपका निवेश कैसा चल रहा है.

ETF में किसे निवेश करना चाहिए?

जो कोई भी लंबे समय के दौरान भारतीय में इक्विटी से फ़ायदा उठाना चाहता है, वो ETF में निवेश कर सकता है. ETF आपकी पूंजी बढ़ाने का एक आसान और व्यावहारिक तरीक़ा हैं. इसलिए, अगर आपके पास अपना पोर्टफ़ोलियो मैनेज करने का पर्याप्त समय नहीं है, तो ETF एक संभावित समाधान हो सकता है. इसके अलावा, अगर आप एक नए निवेशक हैं और आपको स्टॉक या म्यूचुअल फ़ंड के बारे में कम जानकारी है, तो ETF आपका शुरुआती बिंदु हो सकता है. अगर आप एक अनुभवी निवेशक हैं, तो अपने कॉर्पस का एक हिस्सा ETF में निवेश करने से आपको विविधता लाने और निवेश के ख़राब फ़ैसले के असर को सीमित करने में मदद मिल सकती है.

डिसक्लेमरः म्यूचुअल फ़ंड निवेश बाज़ार जोख़िमों के अधीन हैं. योजना से संबंधित सभी दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें.

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ये लेख पहली बार अक्तूबर 13, 2023 को पब्लिश हुआ, और मई 21, 2024 को अपडेट किया गया.

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