फ़र्स्ट पेज

परफेक्‍ट होने की चाहत कितनी सही

एक अच्‍छे निवेश पोर्टफोलियो में हो सकता है कि कुछ निवेश अच्‍छा प्रदर्शन न करें लेकिन आपको इसको लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है

परफेक्‍ट होने की चाहत कितनी सही

कुछ कमियों के साथ हीरा इसके बिना पत्‍थर के टुकड़े से बेहतर है। किसी चीज का परिपूर्ण होना अच्‍छे का दुश्‍मन है। कई भाषाओं में इस तरह से कई कहावते कहीं जाती हैं। लेकिन इन सबका मतलब एक ही है। अगर आप सबसे बेहतर संभावित नतीजे पाने पर बहुत अधिक जोर देते हैं तो हो सकता है कि आपको सबसे खराब नतीजे मिले या हो सकता है कि आप अपना गोल हासिल न कर पाएं। हम लोगों में से बहुत से लोग पेशेवर तौर पर और व्‍यक्तिगत तौर पर इस बात को समझते हैं।

निवेश का मामला अलग है। बहुत से निवेशक ऐसा मानते हैं कि उनके चुने हुए सारे निवेश का प्रदर्शन अचछा होना चाहिए वरना निवेश चुनने के उनके तरीके में कुछ समस्‍या है। कुछ साल पहले मैंने कुछ खास तरह की एनॉलिसिस स्‍टाइल के बारे में लिखा था। इस एनॉलिसिस स्‍टाइल का इस्‍तेमाल कुछ म्‍युचुअल फंड एक्‍सपर्ट ने किया था। उनका तरीका यह था कि वे बीते समय के इक्विटी म्‍युचुअल फंड के कुछ पोर्टफोलियो को देखेते थे और ऐसे स्‍टॉक्‍स का उदाहरण देते थे जिसे फंड ने खरीदा था लेकिन स्‍टॉक्‍स ने अच्‍छा प्रदर्शन नहीं किया। इस तरीके के साथ समस्‍या यह थी इसमें निवेश पोर्टफोलियो और डायवर्सीफिकेशन की अहमियत को पूरी तरह से नजरअंदा कर दिया गया था।

जब आप निवेश पोर्टफोलियो का आंकलन करते हैं तो आपको कुछ ऐसे स्‍टॉक्‍स मिलेंगे जिनका प्रदर्शन अच्‍छा नहीं रहा है। जल्‍दी ही या थोड़ी देर से अनुभवी और वास्‍तविकता में जीने वाले निवेशक इस बात को समझ जाते हैं कि यह संभव नहीं है कि सब कुछ अच्‍छा हो। अगर आप इस बात पर जोर देंगे कि सब कुछ अच्‍छा हो तो शायद आप कुछ नहीं कर पाएंगे और आपकी रकम या तो सेविंग बैंक अकाउंट में पड़ी रहेगी या आप बाजार के हर उतार चढ़ाव पर अपनी रकम निकालते या निवेश करते रहेंगे।

इसके लिए मैं अपना एक व्‍यक्गित उदाहरण आप के साथ साझा करने जा रहा हूं। मेरी कंपनी ने पांच साल पहले वैल्‍यू रिसर्च स्‍टॉक एडवाइजर कंपनी लांच की। यहां हमने लगभग 50 स्‍टॉक्‍स रिकमेंड किए । ये स्‍टॉक्‍स हर तरह की कंपनियों, सेक्‍टर और बैकग्राउंड के थे। मेरे व्‍यक्तिगत निवेश पोर्टफोलियो में भी ये स्‍टॉक्‍स शामिल थे। लेकिन इस बार ऐसा हुआ कि कुछ स्‍टॉक्‍स का प्रदर्शन अच्‍छा नहीं रहा। हालांकि ज्‍यादातर स्‍टॉक्‍स ने अच्‍छा प्रदर्शन किया और कुछ स्‍टॉक्‍स ने बहुत अच्‍छा प्रदर्शन किया। कुछ मिला यह एक अच्‍छा पोर्टफोलियो साबित हुआ।

क्‍या मुझे उन स्‍टॉक्‍स पर ज्‍यादा जोर देना चाहिए जिनका प्रदर्शन अच्‍छा नहीं रहा। निश्चित तौर पर हमने इस बात पर काफी एनॉलिसिस किया कि क्‍या हुआ। न सिर्फ कंपनियों का बल्कि अपने तर्को और विचार प्रक्रिया का। हालांकि हमने इस बात की ज्‍यादा चिंता नहीं की। समय समय पर मिलने वाली असफलता का समाधान यह है कि अपने निवेश में सबकुछ अच्‍छा होने पर जोर न दिया जाए बल्कि अपने पोर्टफोलियो को काफी बड़ा रखते हुए इसे सही तरीके से डायवर्सीफाइ किया जाए।

हालांकि जब आप एक बार समझ जाते कि पोर्टफोलियो की जरूरत क्‍यों है और डायवर्सीफिकेशन का क्‍या फायदा है तो यह साफ हो जाता है कि आपके पूरे निवेश पोर्टफोलियो का प्रदर्शन मायने रखता है न कि इंडीविजुअल निवेश का प्रदर्शन। निवेशक के तौर पर मैं असफलता से नहीं डरता हूं। ऐसा कोई पोर्टफोलियो नहीं है जिसमें शामिल कुछ स्‍टॉक्‍स लंबी अवधि में खराब प्रदर्शन न करें। इक्विटी निवेश इसी तरह से काम करता है।

इसका समाधान बहुत स्‍पष्‍ट है। दुनिया का जोखिम कम करने का सबसे पुराना तरीका। यह है डायवर्सीफिकेशन। डायवर्सीफिकेशन का सिद्धांत बहुत सरल है। आपके सभी निवेश एक साथ अच्‍छा प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं। सामान्‍य तौर पर आपके कुछ निवेश अच्‍छा प्रदर्शन करेंगे और कुछ निवेश अच्‍छा प्रदर्शन नहीं करेंगे या कुछ निवेश किसी समय खराब प्रदर्शन करेंगे। अगर आपने किसी निवेश में बहुत ज्‍यादा रकम निवेश की है जो एक समय बहुत खराब प्रदर्शन करता है तो आप मुश्किल में आ सकते हैं। डायवर्सीफिकेशन आपको एक छोटे निवेश के खराब प्रदर्शन से बचाता है। अगर कोई कंपनी या सेक्‍टर मुश्किल में है तो इसमें छोटा निवेश आपकी मदद करता है। सेक्‍टर्स के अलावा डायवर्सीफिकेशन सभी साइज की कंपनियों में भी किया जाना चाहिए। कभी कभी बड़ी या सिर्फ छोटी कंपनियां खराब प्रदर्शन करती हैं।

निश्चित तौर पर यह ऐसी चीज है जिसे किया जाना चाहिए और बरकरार रखा जाना चाहिए। निवेश और डायवर्सीफिकेशन को ट्रैक करना ज्‍यादा अहम है बजाए इसके कि निवेश चुन कर खराब निवेश चुनना।

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

20% रिटर्न, हर महीने ₹1 लाख: क्या ऐसी उम्मीद लगाना सही है?

पढ़ने का समय 6 मिनटअभिषेक राणा

मिडिल ईस्ट में युद्ध और असर आपकी जेब पर

पढ़ने का समय 6 मिनटउदयप्रकाश

‘मेरे पोर्टफ़ोलियो में 25 फ़ंड हैं. शुरुआत कहां से करूं?’

पढ़ने का समय 5 मिनटउदयप्रकाश

इमरजेंसी फ़ंड की समस्या

पढ़ने का समय 5 मिनटअमेय सत्यवादी

क्या आपका म्यूचुअल फ़ंड सच में आपके लिए काम कर रहा है?

पढ़ने का समय 5 मिनटअमेय सत्यवादी

स्टॉक पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

फ्रॉड के शिकार लोगों के लिए दो नियम

फ्रॉड के शिकार लोगों के लिए दो नियम

जब ताक़तवर लोगों के साथ लूट होती है तो न्याय तेज़ी से मिलता है. बाक़ी लोगों के लिए, ऐसा नहीं है

दूसरी कैटेगरी