
इस वित्तीय वर्ष की शुरूआत में सेबी ने म्युचुअल फंड डिवीडेंड प्लान का नाम बदल दिया है। हालांकि म्युचुअल फंड में डिवीडेंड जैसी चीज कभी नहीं थी। जिसे पहले डिवीडेंड कहा जाता था उसे अब डिस्ट्रीब्यूशन कहा जाएगा और म्युचुअल फंड डिवीडेंड प्लान को अब इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम कैपिटल विदड्रॉअल प्लान कहा जाएगा। यह नाम काफी बड़ा है ऐसे में इसे आईडीसीडब्ल्यू कहा जाएगा।
यह नाम एकदम सटीक है। सही मायने में देखें तो म्युचुअल फंड में कभी डिवीडेंड का भुगतान नहीं किया जाता था। यह हमेशा एक भ्रम था। डिवीडेंड हमेशा से इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम कैपिटल विदड्रॉअल था। हालांकि काफ निवेशक अब भी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि डिवीडेंड का असली मतलब क्या है और उनको लगता है कि उनके अकाउंट में आने वाला भुगतान डिवीडेंड था। और अब इसक नाम बदल गया है। हकीकत इसके ठीक उलट है। यह कभी भी डिवीडेंट नहीं था और इसका नया नाम सटीक है।
एक समय था। ज्यादा पहले नहीं बस अब से सिर्फ दो माह पहले। डिवीडेंड को प्लान की बिक्री बढ़ाने की ट्रिक समझा जाता था। इस ट्रिक का इस्तेमाल म्युचुअल फंड स्कीम बेचने वाले और डिस्ट्रीब्यूटर निवेशकों को लुभाने के लिए करते थे। जब भी कोई फंड डिवीडेंड के साथ आता था तो फंड बेचने वाले इसे संभावित निवेशकों को सबूत के तौर पर दिखाते थे कि यह एक अच्छा फंड है। सालों की अवधि में सेबी ने इस खेल को खोल दिया। लेकिन इसे फंड की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए फिर भी इस्तेमाल किया जाता रहा।
आइये समझते हैं कि डिवीडेंड/आईडीसीडब्लू है क्या। मान लेते हैं कि फंड में आपकी 1000 यूनिट हैं। जिसकी एनएवी 20 रुपए है। इस तरह से आपके निवेश की कीमत 20000 रुपए है। अब फंड 20 फीसदी डिवीडेंड /आईडीसीडब्लू घोषित करता है। यह फेसवैल्यू का 20 फीसदी यानी 10 रुपया या प्रति यूनिट 2 रुपए का पेमेंट बनता है। आपको 1000 यूनिट के लिए 20000 रुपए मिलेंगे। हालांकि यह रकम सीधे आपके निवेश की वैल्यू से आएगी। रेकॉर्ड डेट पर आपके फंड की एनएवी 20 रुपए से गिर कर 18 रुपए हो जाएगी। इसका मतलब है कि जब आपको 2000 रुपए डिवीडेंड / आईडीसीडब्लू के तौर पर मिलेंगे तो आपके निवेश की वैल्यू भी 2000 रुपए कम हो जाएगी।
इस तरह से आपको कोई फायदा नहीं हुआ। वित्तीय तौर पर देखें तो इसका मतलब है कि आपने अपने फंड से रकम निकाल ली है। तो एक तरह से म्युचुअल फंड डिवीडेंड/आईडीसीडब्लू मिलना एक तरह से जीरो सम गेम है। डिवीडेंड / आईडीसीडब्लू का आपके निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर कोई असर नहीं पड़ता है। इसका कोई अपवाद नहीं है और इसका कोई अतिरिक्त फायदा नहीं है। डिवीडेंड के नाम पर पेमेंट लेने का मतलब है कि अपनी ही रकम से कुछ रकम निकाल कर खुद को देना। जब तक आपको रकम की जरूरत न हो तब तक इक्विटी फंड में डिवीडेंड ऑप्शन लेने का कोई मतलब नहीं है। अगर आपको इनकम की जरूरत भी है तो बेहतर है कि ग्रोथ ऑप्शन चुना जाए और अपनी जरूरत और चुने हुए समय पर रकम निकाल ली जाए।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि डिवीडेंड पर लोगों का भरोसा इतना ज्यादा है और यह भरोसा लंबे समय तक बना रहा। डिवीडेंड प्लान का नाम बदलने का फैसला सालों या सही मायने में दशकों पहले किया जाना चाहिए था। हालांकि इसका नाम बदलने की जरूरत पर लंबे समय तक सार्वजनिक तौर पर चर्चा की गई। लेकिन यह साफ है कि डिवीडेंड शब्द को भुलाने में कुछ सालों का समय लगेगा। अब जब डिवीडेंड प्लान का नाम बदल दिया गया है तो कम से कम बेहतर समझ रखने वाले निवेशकों को डिवीडेंड के भ्रम से बाहर निकल जाना चाहिए।





