
कुछ दिन हुए जब हमने क्रिप्टोकरंसी में जोरदार गिरावट देखी। गिरावट की वजह बनी सरकार की घोषणा। सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने की बात की। इससे क्रिप्टोकरंसी में निवेश करने वालों में डर का माहौल बन गया।
निश्चित तौर पर निवेशकों में डर का माहौल एक असामान्य चीज नहीं है। सोशल मीडिया में, एक सप्ताह से भी कम समय पहले, पेटीएम आईपीओ की लिस्टिंग ने उन लोगों में घबराहट पैदा कर दी जिनको अच्छी संख्या में स्टॉक अलॉट हुए थे। यहां तक कि जब मैं यह पेज लिख रहा हूं तो भारतीय इक्विटी मार्केट कम अवधि में तेज उतार चढ़ाव वाले माह का गवाह रहा है। कोरोना वायरस के प्रसार के साथ बाजार में आई बड़ी गिरावट थमने के बाद से बाजार में लंबे समय से तेजी का दौर चल रहा है। इस तेजी को लेकर निवेशक थोड़ा चिंतित हैं। इसके अलावा इस अवधि में बड़े पैमाने पर नए निवेशक बाजार में आए है, ऐसे में निवेशकों की चिंता कुछ ज्यादा ही दिख रही है।
जब निवेश कमजोर दिखे तो इक्विटी निवेशकों को क्या करना चाहिए ? इस माह में कई ऐसे स्टॉक्स, जिनमें मैंने निवेश किया है, कम अवधि में तेज उतार-चढ़ाव की जद में रहे हैं। मैंने जो किया वह बहुत सरल है। मैं थोड़ा पीछे गया और उन बातों पर फिर से गौर किया जिनकी वजह से मैंने स्टॉक में निवेश किया था और अब भी स्टॉक को होल्ड कर रहा हूं। हर एक स्टॉक के मामले में मेरे लिए यह साफ था कि स्टॉक खरीदने का तर्क अब भी उतना ही मायने रखता है। वास्तव में ज्यादातर मामलों में, कभी-कभी कीमतें नीचे जाने का मतलब है कि हमें कुछ और स्टॉक खरीदना चाहिए।
अब अगर हम 23 नवंबर को बिटक्वाइन के निवेशकों के बीच घबराहट की बात करें तो मुझे लगता है कि क्रिप्टो में निवेश करने वालों की यही तरीका क्यों नहीं अपनाना चाहिए ? कीमतें गिरने पर उनको भी उन तर्कों की जांच नए सिरे से करनी चाहिए जिनके आधार पर उन्होंने क्रिप्टोकरंसी खरीदा है। इसका जवाब बहुत साफ है। इनके पास कोई तर्क नहीं है। इसके बजाए सोच यह है कि अगर कीमतें बढ़ रही हैं तो कीमतें बढ़ती रहेंगी। यहां तक कि पेटीएम के मामले को भी देखें तो निवेशकों में भले ही घबराहट हो लेकिन उनके पास फिर भी निवेश को कोई तर्क है। भले ही यह तर्क गलत हो।
इक्विटी में निवेश के लिहाज से इसका क्या मतलब है ? कम अवधि में तेज उतार-चढ़ाव जीवन का एक तरीका है। ऐसे में निवेश की थीसिस और इसमें आपका भरोसा काफी अहम है। इसके बिना, जब भी कुछ होगा, तो निवेशक निवेश बंद कर सकता है या निवेश बेच कर बाजार से भाग सकता है। इसका नतीजा यह होगा कि निवेशक ऊंची कीमत पर खरीदेगा और कम कीमत में बेचेगा और आखिरकार नेगेटिव रिजल्ट हासिल करेगा।
बिल्कुल यही काम वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइजर करता है। यह खरीदने के लिए स्टॉक की लिस्ट के साथ निवेश की थीसिस भी देता है। यही नहीं, हमारी टीम थी सिस का बार-बार परीक्षण करती रहती है और इसे अपडेट करती रहती है। मेंबर्स को सिर्फ ‘क्या’ नहीं मिलता है बल्कि ‘क्यों’भी मिलता है। मैं जो कहता हूं, उस पर खुद भी अमल करता हूं। मेरा स्टॉक पोर्टफोलियो उन्हीं स्टॉक से बना है, जो वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइजर रिकमेंड करता है और जब ये स्टॉक्स उतार-चढ़ाव की जद में आते हैं तो मैं व्यक्तिगत रूप से इनका अनुभव करता हूं।
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चलिए मैं आपको याद दिला दूं,जब आप मेंबर बनते हैं तो आपको क्या मिलता है
· हमारे सभी स्टॉक पिक्स तक एक्सेस।
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आप इससे क्या निकाल पाते हैं यह आप पर निर्भर करता है। सबसे अहम चीज है आपको निवेश के लिए जरूरी जानकारी से लैस करना और भरोसा पैदा करना। बहुत से निवेशक बहुत अच्छे फंड में निवेश करते हैं लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव आने पर वे भरोसा खो देते हैं और निवेश बेच कर निकल लेते हैं। हम आपको हर जरूरी जानकारी देते हैं , जिससे आप अपने निवेश को लेकर भरोसा बनाए रख सकें। हमारी जॉब का अहम हिस्सा लगातार आपके संपर्क में रहना है और चीजें जब कमजोर लग रहीं हों, उस समय आपका समर्थन करना है।
आखिरकार, रिकमेंडेशंस सिर्फ वे स्टॉक्स हैं, जो हम रिकमेंड करते हैं। Value Research Stock Advisor
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