
एक साल पहले जब मैं नए साल का पहला पेज लिख रहा था तो मैंने कहा था, ‘चीनी वायरस का साल ख़त्म हो गया है’। मेरी इस बात में ये ख़याल छुपा था कि साल के साथ ही, कोविड भी बहुत हद तक ख़त्म हो गया है। मगर उसके बाद, अब दूसरा साल भी गुज़र गया है और हम वहीं के वहीं खड़े हैं। तो इस साल, पेज की शुरुआत मैं कुछ इस तरह से करूंगा: कोविड-19 का दूसरा साल ख़त्म भी हो गया है।
जहां तक पैनडैमिक का सवाल है, तो 2021 में इसने अपने पहले साल के मुक़ाबले अपना अलग रूप दिखाया। पर इसका बिज़नस और अर्थव्यवस्था पर असर क्या होगा, इसे लेकर हमारी समझ 2020 के मुक़ाबले में बहुत बेहतर हो गई है।
पैनडैमिक के शुरुआती दिनों में ज़्यादातर लोग मानते थे कि ये केवल चीन की परेशानी है। फ़रवरी 2020 के पहले सप्ताह में, गोल्डमैन साक्स की कही एक बात काफ़ी चर्चित भी रही, जब उन्होंने कहा कि ग्लोबल ग्रोथ पर इस महामारी का असर ‘ग्लोबल जीडीपी की सालाना-औसत से कम होगा’, और ये असर 0.1% से 0.2% तक सीमित रहेगा। ये भी कहा गया कि उन्हीं बिज़नस पर इसका असर होगा जो सीधे चीन से जुड़े हैं। ज़ाहिर है, उस वक़्त इस तरह का अंदाज़ा लगाने वाला गोल्डमैन साक्स अकेला नहीं था।
फिर बयानों का पेंडुलम बड़ी तेज़ी से दूसरे अतिरेक की तरफ़ घूम गया और विशेषज्ञों के ज्ञान सिरे से उलट गए। अब बयान कुछ ऐसे थे, कि आसमान सिर पर गिर रहा है, बिज़नस और अर्थव्यवस्थाएं बर्बादी की ओर हैं, और आने वाले कई बरस तक मुसीबतें बनी रहेंगी। फिर जैसा कि हुआ, ठीक पहले की तरह, ये अनुमान भी उतने ही ग़लत साबित हुए। लोग अब समझने लगे हैं कि इस स्तर की वैश्विक महामारी भी, विश्व स्तर पर अर्थव्यवस्था में अचानक कोई बहुत बड़ा बदलाव लाने की ताक़त नहीं रखती। क्योंकि इस अर्थव्यवस्था के पीछे इस ताक़त से भी बड़ा, ऐसे कई अरब लोगों का सामर्थ्य है, जो अपने रोज़मर्रा के जीवन में जी-जान से जुटे हुए हैं। मुश्किल हालात में कई बार ज़िंदगी अपनी लीक से कुछ हटती तो है, मगर किसी भी अनुमान से कहीं ज़्यादा तेज़ी से ये फिर वापस अपनी मौलिक स्थिति में लौट भी आती है। इसका मतलब ये नहीं कि ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता जिससे बड़ा परिवर्तन हो जाए, मगर ये भी सच है कि कम-से-कम ये महामारी ऐसा नहीं कर पाई है।
कोविड को शुरु हुए कुछ वक़्त गुज़र चुका है, और उसके असर को बढ़ा-चढ़ा कर और कम कर के आंकने की कई कोशिशें हो चुकी हैं। ऐसा सिर्फ़ अर्थव्यवस्था और बिज़नस के में ही नहीं किया गया है, बल्कि ख़ुद वायरस और वैक्सीन के संदर्भ में भी यही हुआ है। कोविड के साथ-साथ, हमारे सामने एक्सपर्ट्स की लगातार चलने वाली परेड को दो साल हो चुके हैं, जिसमें उन्होंने हर चीज़ की - पहले भविष्यवाणियां की हैं, फिर ग़लत साबित हुए हैं, और फिर से नई भविष्यवाणियां करने में जुट गए हैं। इस प्रक्रिया में सिर्फ़ एक ही अनुमान सही साबित हुआ है, और वो है, उन पर भरोसे के कम होने का। हालांकि, ये मेरा काम नहीं है कि इस पेज पर मैं इन बातों को बार-बार दोहराता रहूं। इसी को लेकर आइंस्टाईन की कही एक बात याद आ रही है (ज़रा शक़ के साथ), “एक ही काम को बार-बार करते जाना और अलग नतीजे की उम्मीद करना पागलपन है।”
निवेश में सबसे बुरा होता है घटनाओं का पहले से अनुमान लगाना, और कोविड ने बिना शक़, इस बात को साबित कर दिया है। जिसने भी फ़रवरी 2020 के बाद से ऐसा किया होगा, उसे बाज़ार के ऊपर और नीचे होने की दोनों ही स्थितियों में मुश्किलों का सामना करना पड़ा होगा। यानि नीचे जाते हुए बाज़ार से निकलने पर पैसे गंवाना, और बाज़ार से बाहर हो जाने पर, ऊपर जाते हुए बाज़ार में अवसर खो बैठना। आप पूछ सकते हैं कि फ़रवरी 2020 में ख़बरों और घटनाओं का अनुमान लगाना क्यों ग़लत था? तो इसका जवाब है - पैसे बनाने के लिए असल बात है, आप सही अनुमान लगाएं और अगर नहीं लगा सकते तो ये करना बेकार है। हालांकि ये बेकार ज़रूर है, लेकिन दुर्भाग्य से, हममें से ज़्यादातर लोग काफ़ी हद तक ऐसा करना स्वीकार करेंगे।
जैसे-जैसे स्टॉक मार्केट ऊपर, और ऊपर जा रहे हैं, फिर कुछ नीचे आकर, पहले से ज़्यादा ऊपर हो जाते हैं, ऐसे में उन लोगों की कमी नहीं है जो ये जानने के लिए बेचैन हैं कि आगे क्या होने जा रहा है। मैं उन्हें दो बिल्कुल सटीक बातें बता सकता हूं, शत-प्रतिशत भविष्यवाणी की तरह। भविष्य में, एक ऐसा वक़्त आएगा जब बाज़ार अब से ऊपर होगा और ऐसा वक़्त भी आएगा, जब बज़ार मौजूदा स्तर से कम हो जाएगा। ये एक सटीक भविष्यवाणी है, और हां, ये भविष्यवाणी किसी काम की नहीं है। तो अब मैं, एक काम की बात कहता हूं: वो निवेशक, जो बहुत ज़्यादा उत्साह या निराशा के बिना बुनियादी बातों पर डटे रहते हैं, वो हमेशा बेहतर करेंगे। और यही एक निवेशक के तौर पर आपके लिए अमल करने लायक़ एक सरल फ़ॉर्मूला होना चाहिए।


