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ज्‍यादा एक्टिव, कम रकम

क्‍या औसत एक्टिव स्‍टॉक ट्रेडर बहुत कम रकम बनाता है ? क्‍या यह पूछने की जरूरत है

ज्‍यादा एक्टिव, कम रकम


50287_20220111 कुछ दिनों पहले एक बड़े ऑनलाइन स्‍टॉकब्रोकर के सीईओ जेरोधा के सीईओ नि‍थिन कामथ ने कहा कि तीन साल में सिर्फ एक फीसदी स्‍टॉक ट्रेडर ही बैंक फिक्‍स्ड डिपॉजिट से बेहतर रिटर्न हासिल कर पाए हैं। सोशल मीडिया पर उनकी इस बात पर बड़े पैमाने पर रिएक्‍शन आए। बहुत से लोगों को उनकी इस बात से झटका लगा। हालांकि उनकी बात पर रिएक्‍शन देने वालों का एक और समूह था, जिसने कहा कि इसमें नया क्‍या है ?

मैं उस दूसरे कैंप से हूं। मैं दशकों से लगातार देख रहा हूं कि सभी एक्टिव ट्रेडर्स खराब प्रदर्शन करते हैं। सिर्फ यही नहीं, मेरा मानना है कि कामथ ने शायद सफलता के प्रतिशत को थोड़ा ज्‍यादा बताया है। एक फीसदी वास्‍तविक डाटा नहीं है। यह नंबर काफी छोटा होना चाहिए। उनका शुरूआती कमेंट उस प्रैक्टिस के बारे में है जिसमें निवेश से शानदार रिटर्न दिखाने वाला स्‍क्रीनशॉट ट्विटर पर पेस्‍ट किया जाता है। निश्चित तौर पर यह कुछ भी साबित नहीं करता है। सोशल मीडिया पर लाइफ और हकीकम में लाइफ काफी अलग है। हर व्‍यक्ति के पास कोई ट्रेड है और वह उससे रकम बनाता है। इस ट्रेड की रिपोर्ट का स्‍क्रीनशॉट लेकर दुनिया को दिखाना सामान्‍य व्‍यवहार है।

यहां कई ऐसी चीजें हैं जिनके बारे में मैं जानना चाहता हूं। निवेशक खराब प्रदर्शन क्‍यों करते हैं ? क्‍या वे खराब स्‍टॉक्‍स खरीदते हैं ? या वे अच्‍छे स्‍टॉक खरीदते हैं लेकिन गलत समय पर ट्रांजैक्‍शन करते हैं ? क्‍या पुराने बनाम नए निवेशक, युवा बनाम उम्रदराज निवेशक, फुल टाइम बनाम पार्ट टाइम निवेशक में कोई पैटर्न है।

सबसे अहम बात, कुछ वर्षों तक खराब प्रदर्शन करने के बाद क्‍या होता है ? यह सोचना थोड़ा मुश्किल है कि लोग सिर्फ रकम गंवाने या मामूली रिटर्न हासिल करने के लिउ साल दर साल दर साल ट्रेडिंग करते रहते हैं। या तो वे ट्रेडिंग छोड़ देंगे या उनका प्रदर्शन बेहतर होगा। कितने लोग समय से ट्रेडिंग छोड़ देते हैं और कितने लोग बरबाद हो जाते हैं ? और कितने लोग लंबी अवधि के निवेश को अपना लेते हैं और खुद से स्‍टॉक्‍स में या म्‍युचूअल फंड में निवेश करते हैं।

इन सवालों का कोई मतलब नहीं है। अगर आप ऐसी स्थिति में हैं- आप एक्टिव इन्‍वेस्टिंग कर रहे हैं और खराब प्रदर्शन कर रहे हैं- तो आपको इनके बारे में सोचना चाहिए। कई ऐसे रास्‍ते हैं जो आपके लिए खुले हैं। थोड़ा आत्‍मनिरीक्षण करने से यह साफ हो जाएगा कि आपके लिए सही रास्‍ता कौन सा है। शुरूआत में ही कोर्स करेक्‍शन करना मुश्किल नहीं है।

कामथ के कमेंट पर हो रही बातचीत में किसी ने भी इस पर कमेंट नहीं किया है कि एक्टिव शब्‍द के मायने क्‍या हैं। आप जितना ज्‍यादा एक्टिव हैं और जितना ज्‍यादा आप ट्रेड करते हैं आप उतना ही ज्‍यादा खराब प्रदर्शन करेंगे। लोग बहुत ज्‍यादा ट्रेड क्‍यों करते हैं ? इसका आम तौर पर जवाब यह होता है कि लोग यह महसूस करते हैं कि स्‍टॉक इन्‍वेस्टिंग एक एक्‍िटिविटी है जो खबरों और दूसरी घटनाओं की निगरानी करना और उपयुक्‍त ट्रेड करते हुए इस पर रिएक्‍ट करने से बनती है। बिजनेस मीडिया में रोज की खबरें इस विचार को मजबूती देती हैं। अगर किसी ने निवेश शुरू किया और बिजेनस न्‍यूज चैनल भी देखना शुरू कर दिया तो उसे यही समझ आएग कि निवेश का मतलब है कि खबरों पर गौर करना और तेजी से ट्रेडिंग करते हुए इन खबरों पर रिएक्‍ट करना।


एक एक्टिव निवेशक को पहली चीज करनी चाहिए कि वह कम एक्टिव होने का प्रयास करे और खबरों पर गौर करना बंद करे। जो लोग आपके लिए खबरें लेकर आते हैं वे इसलिए ऐसा नहीं कर रहे हैं क्‍योंकि वे इस बिजनेस में हैं जो यह दिखाता है कि अपने निवेश से रकम कैसे बनाई जाए। यहां पर प्रोत्‍साहन में बड़ा विरोधाभाष है। खबरें एक उत्‍पाद हैं और खास डिजिटल डेलिवरी के साथ, जितनी ज्‍यादा खबरें बनाईं जाती हैं और उन खबरों का आप जितना देखते या पढ़ते हैं उन खबरों को बनाने वाला उतना ही ज्‍यादा रकम बनाता है। यह किसी भी अन्‍य उत्‍पाद की तरह है। खबरें निवेश से आपके रिटर्न को बढ़ाने के लिए नहीं हैं। यह ऐसी चीज है जिसका पता आपको खुद लगाना होगा। तथ्‍य यह है कि अगर खबर बनने वाली घटनाएं हो रही हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि ज्‍यादा गहन और ज्‍यादा एक्टिव ट्रेडिंग उचित है।

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