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बजट 2022: बदलाव न होना भी अच्‍छा

यह बजट अच्‍छे काम को जारी रखने वाला है और कोविड के दौरान अच्‍छे वित्‍तीय प्रबंधन का पुरस्‍कार है

यह बजट अच्‍छे काम को जारी रखने वाला है और कोविड के दौरान अच्‍छे वित्‍तीय प्रबंधन का पुरस्‍कार है


यह एक ऐसा बजट है, जिस पर कुछ कमेट करना मुश्किल है। वास्‍तव में यह अच्‍छी बात है। एक समय तक आम बजट के बारे में हर कोई बहुत बात करता था। पहले बजट में कीमतें और शुल्‍क में बदलाव होता था और परिवार के बजट पर इसका असर होता था। इसके अलावा कॉरपोरेट पर भी इसका असर होता था। एनॉलिस्‍ट सैकड़ों कंपनियों पर शुल्‍क के बदलाव से होने वाले असर का कैलकुलेशन करने के लिए मशक्‍कत करते थे। बिस्किट, फुटवियर, स्‍टील और फर्टिलाइजर से लेकर सिगरेट सब पर शुल्‍क में बदलाव होता था।

जीएसटी ने इन सब पर विराम लगा दिया। पेट्रोलियम की कीमतें मार्केट के हिसाब से तय होती हैं और कस्‍टम रेट स्थिर हो गए हैं। ऐसे में बजट के दिन कुछ खास नहीं बदलता है। बजट पेश होने के कुछ घंटों के बाद बजट पेपर जारी किए जाते थे और राजनीतिज्ञ इस पर पहले से तय प्रतिक्रिया देते थे। अब यह काफी हद तक खत्‍म हो गया है। सिर्फ एक क्षेत्र है जिसमें अभी भी बजट के दिन लोगों की दिलचस्‍पी बनी हुई है। और यह मेरा क्षेत्र है। पर्सनल फाइनेंस और टैक्‍स सेविंग इन्‍वेस्‍टमेंट। बजट में होने वाले बदलाव इस क्षेत्र पर असर डालते हैं। लेकिन साल का बजट इस पर भी पूरी तरह से खामोश है।

यह भी अच्‍छी बात है। पर्सनल फाइनेंस में स्थिरता होनी ही चाहिए। हालांकि टैक्‍स सेविंग नियमों में चीजों को बेहतर करने की गुंजाइश हमेशा रहती है। फिर भी बदलाव न होना भी बुरा विकल्‍प नहीं है। जहां तक लोगों के पर्सनल बजट की बात है तो आम बजट में ऐसा कुछ नहीं है जो महंगाई बढ़ाएगा। और यह आने वाले माह में सबसे ज्‍यादा सकरात्‍मक चीज साबित होने वाली है। सरकार ने कोविड के दौरान राहत देने के लिए जिस तरह का संतुलित रवैया अपनाया यह उसका नतीजा है। सरकार ने वह सब कुछ किया जिसकी जरूरत थी और ऐसा वित्‍तीय हालात को खराब किए बिना किया।

इन सकारात्‍मक बातों में वे लोग शामिल नहीं हैं जिनका पर्सनल फाइनेंस वर्चुअल डिजिटल असेट्स में फंस गया है। भारत में क्रिप्‍टो को लेकर नियम आ गए हैं। कम से कम टैक्‍सेशन के लिहाज से। टैक्‍स काफी अधिक है और ऐसा लगता है कि यह टैक्‍स यह सुनिश्चित करने के लिए लगाए गए हैं कि क्रिप्‍टो की ट्रेडिंग से रकम बनाना मुश्किल हो जाए। मुनाफे पर 30 फीसदी टैक्‍स लगेगा और नुकसान को सेट ऑफ नहीं किया जा सकता है। सबसे अहम बात यह है कि मुनाफे को इनकम के तौर पर लिया जाएगा और इस पर टैक्‍स लगाया जाएगा न कि कैपिटल गेन्‍स के तौर पर। यह एक अलग चीज है कि कोई असेट है लेकिन इसकी बिक्री से होने वाला मुनाफा इनकम है। क्रिप्‍टो जैसी चुनौती के लिए यह एक अच्‍छा समाधान है।

क्रिप्‍टो के नियमों को सावधानी से तैयार किया गया है और इस बात को ध्‍यान में रखा गया है कि क्रिप्‍टो को दूसरी डिजिटल असेट के अगेंस्‍ट बेचा जा सकता है और इसका इस्‍तेमाल गैर डिजिटल असेट खरीदने में भी किया जा सकता है। अगर आप क्रिप्‍टो खरीदते हैं इसके बाद किसी विदेशी वेबसाइट पर इसका इस्‍तेमाल गैर क्रिप्‍टो असेट खरीदने में करते हैं तो ऐसा लगता है कि इसे क्रिप्‍टो की बिक्री मान जाएगा और हासिल किए गए भुगतान पर टैक्‍स लगेगा। तो अगर आप के पास 2 बिटकॉइन हैं और आप इसका इस्‍तेमाल कार खरीदने में करते हैं तो यह माना जाएगा कि आपने 2 बिटकॉइन बेचा है और भुगतान के तौर पर कार हासिल की है और किसी भी मुनाफे पर टैक्‍स लगेगा।

क्रिप्‍टो के नियमों के दूसरे पहलू भी हैं जिनसे निपटना जरूरी है। उदाहरण के लिए, स्‍वयंभू क्रिप्‍टो एक्‍सचेंज की बढ़ती गतिविधियां और इनके बारे में कोई नियम-कानून न होना। इसके अलावा क्रिप्‍टोकरंसी का इस्‍तेमाल आपराधिक गतिविधियों जैसे रैनसमवेयर, आतंकी फंडिंग और ऐसी कई चीजों में हो सकता है। यह एक अलग कहानी है। अब भारत डिजिटल रूपी भी जारी करेगा। लेकिन आजकल जो लोग क्रिप्‍टो में दिलचस्‍पी रखते हैं उनके लिए यह काम की बात नहीं होगी।

एक और बात जो गौर करने वाली है वह है देश में फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के विस्‍तार पर लगातार फोकस। एक साल के अंदर देश में सभी पोस्‍ट ऑफिस कोर बैकिंग सिस्‍टम में जुड़ जाएंगी। और लोगों को एटीएम और फंड ट्रांसफर एक्‍सेस भी मिलेगा। फाइनेंशियल सिस्‍टम के विस्‍तार का किसी भी छोटे बदलाव की तुलना में काफी बड़ा असर होगा।

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