
स्मॉल-कैप फ़ंड का बड़ा AUM उसके प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करता है? किस लेवल तक निवेश करना सुरक्षित रहता है? -रजत
स्मॉल-कैप फ़ंड को तब दिक्कत का सामना करना पड़ता है जब उनका साइज़ बहुत बड़ा हो जाता है, क्योंकि ऐसे फ़ंड के पास निवेश के लिए नए और अच्छे आइडिया की कमी हो सकती है. लार्ज-कैप फ़ंड या एक अच्छी तरह से डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड की तुलना में स्मॉल-कैप फ़ंड को मैनेज करना काफ़ी अलग होता है, क्योंकि स्मॉल-कैप फ़ंड में निवेश के लिए बहुत सारे आइडिया की ज़रूरत होती है.
जब आप एक फ़ंड मैनेजर द्वारा चलाए जा रहे एक लार्ज-कैप फ़ंड की तुलना दूसरे फ़ंड मैनेजर्स द्वारा चलाए जा रहे फ़ंड या इंडेक्स फ़ंड से तुलना करते हैं, तो उनके पोर्टफ़ोलियो में क़रीब 80 प्रतिशत हिस्सा एक जैसा हो सकता है. असल में, लार्ज-कैप फ़ंड को सिर्फ़ टॉप 100 कंपनियों में निवेश करना होता है. अगर आपको इन 100 कंपनियों में से 25 कंपनियां चुननी हों, तो उनमें से 20 कंपनियां एक जैसी हो सकती हैं.
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लार्ज-कैप फ़ंड का फ़ायदा
लार्ज-कैप फ़ंड का एक और फ़ायदा ये है कि उनके लिए लिक्विडिटी की चिंता नहीं करनी पड़ती. ये कंपनियां बाज़ार में आसानी से उपलब्ध होती हैं और ₹100-200 करोड़ के ट्रांजेक्शन का भी उन पर ज़्यादा असर नहीं पड़ता. हालांकि, स्मॉल-कैप फ़ंड के साथ ऐसा नहीं है. कई स्मॉल-कैप कंपनियों की मार्केट वैल्यू ₹1,000-1,500 करोड़ के आसपास होती है. ऐसे में, अगर कोई फ़ंड ₹100-200 करोड़ का है, तो वो ऐसी कंपनी में अच्छा-ख़ासा निवेश कर सकता है. लेकिन अगर फ़ंड का साइज़ बहुत बड़ा हो जाए, तो कई स्मॉल-कैप कंपनियों में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी लेना मुश्किल हो जाता है, और इन हिस्सेदारियों को बेचना भी आसान नहीं होता.
इसलिए, जैसे-जैसे फ़ंड का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) बढ़ता है, स्मॉल-कैप फ़ंड के लिए अच्छी पोजिशन बनाना मुश्किल हो जाता है. जब फ़ंड का साइज़ बढ़ता है, तो उसे और निवेश के ज़्यादा आइडिया तलाशने पड़ते हैं. लिक्विडिटी की चुनौती को सिर्फ़ पोर्टफ़ोलियो में ज्यादा कंपनियों को शामिल करके ही हल किया जा सकता है. लेकिन ऐसी कंपनियां खोजना आसान नहीं है और ऐसी स्मॉल-कैप कंपनी को खोजने में काफ़ी मेहनत लगती है, जो सस्ती हो और अभी तक लोगों का ज़्यादा ध्यान न खींच पाई हो.
क्या होता 'विनर्स कर्स'?
अब बात करते हैं कि प्रदर्शन पर इसका असर क्या होता है? म्यूचुअल फ़ंड की दुनिया में एक चीज़ होती है, जिसे 'विनर्स कर्स' (विजेता का अभिशाप) कहते हैं. जब कोई स्मॉल-कैप फ़ंड अच्छा प्रदर्शन करता है, तो निवेशक उसमें ढेर सारा पैसा डालने लगते हैं. लेकिन, फिर बड़ा AUM उसके प्रदर्शन में रुकावट बन जाता है, जैसा कि मैंने ऊपर बताया. तो अगर स्मॉल-कैप फ़ंड अच्छा करता है, तो उसे 'विनर्स कर्स' का सामना करना पड़ता है और अगर वो अच्छा नहीं करता, तो वैसे भी लोग उसे पसंद नहीं करते.
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ये लेख पहली बार मई 27, 2025 को पब्लिश हुआ.
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