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म्यूचुअल फ़ंड निवेश में AUM की अहमियत

म्यूचुअल फ़ंड निवेश से पहले आपको एसेंट अंडर मैनेजमेंट क्यों देखना चाहिए

Importance of AUM in Mutual Fund Investment. in Hindi

एसेट अंडर मैनेजमेंट या AUM किसी भी म्यूचुअल फ़ंड में निवेश की कुल मार्केट वैल्यू होती है. आसान लफ़्ज़ों में, ये फ़ंड द्वारा मैनेज किया जाने वाला पैसा है. इसमें शामिल होता है - इक्विटी की मार्केट वैल्यू, बॉन्ड, कैश और स्कीम के दूसरे निवेश, जो देनदारियों (liabilities) के लिए एडजस्ट किए गए हों.

AUM में बदलाव की दो वजह

  • जब निवेशक फ़ंड से पैसा निकालें (redeem) या फ़ंड में ज़्यादा निवेश करें.
  • या फिर मार्केट के उतार-चढ़ाव से पोर्टफ़ोलियो की वैल्यू में बदलाव हो.

कुछ लोग सोचते हैं कि फ़ंड जितना बेहतर प्रदर्शन करता है उतना ज़्यादा उसमें निवेश होता है.वहीं कुछ निवेशकों का मानना है कि एक बड़ा फ़ंड अपने प्रदर्शन को बरक़रार रखता है. ये कुछ हद तक वैसा ही है जैसे किसी रेस में सबसे अच्छे घोड़े पर दांव लगते और लोगों को लगता है कि अंत में यही जीतेगा.

  • एक बड़ा AUM फ़ंड बेहतर सर्विस दे सकता है और बेहतर रिसर्च के लिए ज़्यादा ख़र्च कर सकता है, ये बात निवेशकों के हित में आती है.
  • बड़े AUM वाले फ़ंड का एक्सपेंस रेशियो छोटे AUM वाले फ़ंड के मुक़ाबले कम होता है.

अगर हमेशा ऐसा मुमक़िन नहीं. कभी-कभी कमज़ोर पक्ष भी जीत सकता है. आइए दूसरे पक्ष पर ग़ौर करते हैं.

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शक्की मिज़ाज वाले मानते हैं कि छोटे और बड़े फ़ंड के अपने-अपने फ़ायदे और नुक़सान हैं. एक अच्छा प्रदर्शन करने वाला म्यूचुअल फ़ंड जैसे-जैसे बड़ा होता जाएगा, उसे अपनी गति बनाए रखने में परेशानी होगी. साथ ही, बड़े म्यूचुअल फ़ंड बहुत छोटी कंपनियों पर बड़ा दांव नहीं लगा सकते क्योंकि इससे उनके शेयर की क़ीमत बढ़ सकती हैं. और वो अपने शेयर आसानी से नहीं बेच सकते क्योंकि छोटी कंपनियों के पास लिक्विडिटी की कमी होती है क्योंकि शेयर में गिरावट आ सकती है.

एक सवाल जो कई निवेशकों को परेशान करता है. वो है कि कौन सा फ़ंड बेहतर है, बड़ा फ़ंड या जिसका AUM कम हो? असल में इसका जवाब है - 'ये निर्भर करता है'.

अगर कोई म्यूचुअल फ़ंड लार्ज कैप शेयर में निवेश करता है

जो फ़ंड ज़्यादातर लार्ज कैप कंपनियों में निवेश करते हैं, उनका साइज़ आमतौर पर मायने नहीं रखता. बड़ी कंपनियां, एक्टिव तरीक़े से ट्रेड करती हैं और इनमें लिक्विडिटी की दिक़्क़त नहीं आती है.

अगर कोई म्यूचुअल फ़ंड स्मॉल कैप शेयर में निवेश करता है

यहां छोटे साइज़ वाले म्यूचुअल फ़ंड के लिए स्मॉल कैप में निवेश करना आसान हो सकता है. क्योंकि फ़ंड छोटी कंपनियों पर बड़ा दांव नहीं लगा सकते हैं.

ये भी पढ़िए - लंबे समय के निवेश के लिए म्यूचुअल फ़ंड कैसे चुनें?

मान लीजिए कि स्मॉल कैप स्टॉक कैटेगरी में आने वाली एक कंपनी की क़ीमत ₹1,000 से ₹1,500 करोड़ है. यानि, जब ₹100 से ₹200 करोड़ के AMU वाला कोई छोटा फ़ंड उस कंपनी में अपने पैसे का 5 फ़ीसदी निवेश करने का प्लान करता है, तो वो ऐसा कर सकता है. क्योंकि निवेश की रक़म बहुत बड़ी नहीं है.

हालांकि, अगर ₹5,000 करोड़ के AMU वाला कोई बड़ा फ़ंड उस कंपनी में अपने पैसे का 5 फ़ीसदी निवेश करने का प्लान करता है, तो निवेश के साइज़ के कारण ये मुमक़िन नहीं हो सकता. और अगर ऐसा मुमक़िन भी है, तो उसे 'इम्पैक्ट कॉस्ट' उठानी पड़ सकती है. वहीं, फ़ंड की ट्रेडिंग स्टॉक की क़ीमत में काफ़ी असर डाल सकती हैं. साथ ही, अगर फ़ंड कम समय में निवेश से बाहर निकलने का प्लान करता है, तो उसके लिए इतने बड़े निवेश को बेचना आसान नहीं हो सकता है.

इसके अलावा, ऐसा फ़ंड, जो मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों में निवेश करता है, उसका इस सेग्मेंट में बड़ी रक़म निवेश करना, साइज़ बढ़ने के साथ-साथ परेशानी खड़ी कर सकता है. ऐसा इसलिए, क्योंकि फ़ंड मैनेजर को या तो ज़्यादा ख़रीदने क़ाबिल स्टॉक तलाशने होंगे या उन कंपनियों में अपना निवेश बढ़ाना होगा. लेकिन स्मॉल कैप की ऐसी कंपनीयां, जो अच्छी हो और पहले से नज़र में न आई हो उन्हें तलाशना आसान नहीं है.

यही वजह है कि स्मॉल-कैप फ़ंड अक्सर बड़ी पूंजी नहीं लगा पाते और अपने निवेश को सीमित कर देते हैं. क्योंकि वो फ़ंड इतने बड़े हो गए हैं कि वो अपने मौजूदा स्मॉल-कैप ऑपर्च्यूनिटीज़ में और ज़्यादा पैसा नहीं लगा सकते. साथ ही, अच्छे आइडिया की कमी जो फ़ंड के साथ बढ़ सकें.

फ़ंड का साइज़ कितना होना चाहिए?

इसका कोई फ़ॉर्मूला नहीं, जो तय करे कि फ़ंड का साइज़ कितना हो कि उसे बहुत बड़ा कहा जाए. मगर, जब तक फ़ंड मैनेजर, फ़ंड के निवेश की स्ट्रैटजी के मुताबिक़ निवेश करना जारी रखता है, साइज़ के लिहाज़ से ठीक रहता है.

ध्यान दें!

फ़ंड मैनेजर की क़ाबिलियत, AMC का ट्रैक-रिकॉर्ड और फ़ंड की स्ट्रैटजी ज़्यादा मायने रखने वाली बातें हैं. एक अच्छा फ़ंड, मार्केट के अलग-अलग दौर में लगातार बेहतर प्रदर्शन करता है.

ये भी पढ़िए - आपका पहला म्‍यूचुअल फ़ंड कैसा हो?

ये लेख पहली बार जून 28, 2022 को पब्लिश हुआ, और नवंबर 25, 2024 को अपडेट किया गया.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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