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क्या आप मुझे लंबी अवधि के लिए म्यूचुअल फ़ंड चुनते समय ध्यान रखने वाली एक चेकलिस्ट बनाने में मदद कर सकते हैं? मैं केवल पिछले प्रदर्शन पर निर्भर नहीं रहना चाहता. - एक पाठक
म्यूचुअल फ़ंड निवेश करते समय केवल पिछले प्रदर्शन पर निर्भर रहना भ्रामक हो सकता है, क्योंकि इससे केवल उन लोगों को फ़ायदा होता है जिन्होंने उस प्रदर्शन के पहले निवेश किया था.
अगर किसी म्यूचुअल फ़ंड ने 100 प्रतिशत रिटर्न दिया है, तो ये केवल उन लोगों के लिए ही ख़ुशी की बात है जिन्होंने ये मुनाफ़ा पाने से पहले अपने पैसे फ़ंड में लगाए. उस फ़ंड के नए निवेशकों के लिए, पिछला प्रदर्शन केवल एक संकेत है मगर भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं.
पिछले प्रदर्शन की असली बात इसे समझने में है कि फ़ंड ने बढ़ते हुए और गिरते हुए, दोनों तरह के मार्केट में कैसा प्रदर्शन किया और फ़ंड कितनी जल्दी मंदी से उबर पाया. कुछ फ़ंड्स को वापसी करने में लंबा समय लग सकता है, जबकि कुछ दूसरे, अपनी ख़ूबियों के कारण जल्दी और मज़बूती से उबर जाते हैं. आपको पिछला रिटर्न को दोहराने की उम्मीद करने के बजाय, इन ख़ूबियों पर ध्यान देना चाहिए.
यहां हम इसी काम के लिए एक ज़रूरी चेकलिस्ट दे रहे हैं:
अपनी कैटेगरी के बाक़ी फ़ंड्स से तुलना करें
किसी फ़ंड का रिटर्न अकेले देखने से कुछ ख़ास पता नहीं चलता. 12 फ़ीसदी रिटर्न अच्छा लगता है, जब तक आपको यह न पता चले कि उसी कैटेगरी के हर फ़ंड ने 15 फ़ीसदी दिया. हमेशा परफ़ॉर्मेंस को उसी कैटेगरी के बाक़ी फ़ंड्स के मुक़ाबले देखें, वो भी मीडियम और लॉन्ग-टर्म पीरियड में. एक साल से कम का शॉर्ट-टर्म परफ़ॉर्मेंस इक्विटी फ़ंड्स के लिए बहुत अस्थिर होता है और इससे कोई ठोस नतीजा नहीं निकाला जा सकता.
रोलिंग रिटर्न देखें, सिर्फ़ ट्रेलिंग रिटर्न नहीं
ट्रेलिंग रिटर्न दो तय तारीख़ों के बीच की परफ़ॉर्मेंस दिखाता है. यह उस फ़ंड को ज़रूरत से ज़्यादा अच्छा दिखा सकता है जिसने बस एक बार ज़बरदस्त परफ़ॉर्म किया हो. रोलिंग रिटर्न ज़्यादा सच्ची तस्वीर देता है. यह एक के बाद एक, ओवरलैपिंग टाइम विंडो में फ़ंड की परफ़ॉर्मेंस मापता है, मसलन पिछले एक दशक में हर तीन साल या पाँच साल की विंडो. इससे पता चलता है कि फ़ंड लगातार अच्छा रहा या बस कभी-कभार. जिस फ़ंड के रोलिंग रिटर्न मज़बूत हों, उसने कई मार्केट साइकल में अपनी काबिलियत साबित की है, न कि सिर्फ़ एक बार.
तेज़ी और मंदी, दोनों में फ़ंड का व्यवहार देखें
लॉन्ग-टर्म रिटर्न इस बात पर टिका होता है कि फ़ंड तेज़ी में थोड़ा ज़्यादा चढ़े और मंदी में थोड़ा कम गिरे. जो फ़ंड यह संतुलन नहीं बना पाता, वो लंबे समय में निराश कर सकता है.
एक्सपेंस रेशियो पर ध्यान दें
हर म्यूचुअल फ़ंड फ़ंड मैनेजमेंट और ऑपरेटिंग ख़र्चों के लिए हर साल एक फ़ीस लेता है, जिसे एक्सपेंस रेशियो कहते हैं. 15 से 20 साल में सालाना 0.5 फ़ीसदी का फ़र्क़ भी कंपाउंडिंग की वजह से अंतिम रक़म में बड़ा अंतर बन जाता है. म्यूचुअल फ़ंड के डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो रेगुलर प्लान से कम होता है, क्योंकि उसमें डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन नहीं जुड़ता. लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए उसी फ़ंड का डायरेक्ट प्लान लगभग हमेशा बेहतर विकल्प होता है.
फ़ंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड देखें
किसी फ़ंड की पिछली परफ़ॉर्मेंस तभी मायने रखती है जब वही शख़्स अभी भी उसे मैनेज कर रहा हो. अगर वो फ़ंड मैनेजर जा चुका है जिसने वो रिटर्न दिए थे, तो उसका ट्रैक रिकॉर्ड किसी और का हुआ. यह देखें कि फ़ंड अभी कौन मैनेज कर रहा है और कब से. हाल ही में मैनेजर बदलना ज़रूरी नहीं कि बुरा संकेत हो, लेकिन इसका मतलब यह ज़रूर है कि पुराने परफ़ॉर्मेंस की अहमियत अब उतनी नहीं रही.
एक चीज़ जो यह चेकलिस्ट नहीं पकड़ पाती
ऊपर बताई सब बातें अहम हैं. लेकिन आपके लॉन्ग-टर्म रिटर्न का सबसे बड़ा फ़ैसला यह नहीं है कि आपने कौन सा फ़ंड चुना. असली सवाल यह है कि आप उसे जब तक रखें, उस दौरान क्या करते हैं.
जो निवेशक गिरावट में भी टिके रहते हैं, मार्केट नीचे जाने पर भी SIP जारी रखते हैं और एक बुरी तिमाही के बाद फ़ंड बदलने की जल्दबाज़ी नहीं करते, वो लगभग हमेशा उन लोगों से आगे निकल जाते हैं जो बार-बार बेहतरीन फ़ंड खोजते रहते हैं लेकिन हर बार जज़्बात में बह जाते हैं. मुश्किल दौर में जिस फ़ंड में आप टिके रहे, वो उस "परफ़ेक्ट" फ़ंड से बेहतर साबित होगा जिसे आपने गिरावट पर छोड़ दिया.
यह भी पढ़ेंः क्या आपका म्यूचुअल फ़ंड सच में आपके लिए काम कर रहा है?
ये लेख पहली बार नवंबर 15, 2024 को पब्लिश हुआ, और मई 28, 2026 को अपडेट किया गया.





