
BAAP, SAAP, HODL, शायद ऐसे कई और कॉन्सेप्ट भी होंगे जिनके बारे में मैंने नहीं सुना हो। हो सकता है मेरे कुछ पाठक भी इन्हें नहीं समझते होंगे। तो, BAAP है ‘buy at any price’ यानि किसी भी क़ीमत पर ख़रीदो, SAAP है ‘sell at any price’ यानि किसी भी क़ीमत पर बेचो, और HODL है ‘hold on for dear life’ जान बचाने के लिए थामे रहो। अगर तलाशेंगे, तो ऐसे शब्दों का पूरा चिड़ियाघर आपको मिल जाएगा। एक शख़्स जिसके 25 लाख फ़ॉलोअर हैं, उसने सवाल किया कि HODL का उलटा क्या होता है, इसके जवाब में मुझे SODL, DUPM, FODL, FOOM और इसके अलावा भी कई तरह-तरह के नए टर्म ट्विटर पर मिले। मगर किसी ने इनके मतलब समझाने की ज़हमत नहीं उठाई थी, शायद इसीलिए ये सब सिर्फ़ कुछ लोगों की गढ़ी हुई बक़वास ही होगी, और ट्विटर पर ऐसी बक़वास में कुछ भी अनोखा नहीं।
क्या आपने नोटिस किया कि BAAP-SAAP-HODL की ये तिकड़ी, असल में निवेशकों के लिए नया विकल्प नहीं? इन तीन नए टर्म्स के बीच, आपके पास अपना पुराना जाना-पहचाना वर्ज़न भी मौजूद है - Buy, ,Sell या Hold. ये बात ठीक वही है, सिवा एक फ़र्क़ के-जो एक बड़ा फ़र्क़ है-कि पुराने buy-sell-hold और नए BAAP-SAAP-HODL के बीच फ़ैसलों पर कितना सोच-विचार करना है। एक इन्वेस्टर के तौर पर हम Buy-sell-hold का विकल्प, सोच-समझ कर और सावधानी से फ़ैसले लेने में करते हैं। जिन फ़ैसलों का आधार कई सवाल होते हैं, जैसे - क्या अब भी ये निवेश अच्छा है? क्या भविष्य में मुनाफ़ा कमाने की अच्छी संभावना है? क्या और निवेश करना फ़ायदेमंद होगा? होल्ड करने और न बेचने का तर्क क्या है? यानि, इसी तरह की और कई बातें और सवाल।
उसके ठीक उलट, इस नई त्रिवेणी, BAAP-SAAP-HODL में सोचने का कोई टाइम नहीं है। किसी भी दाम पर बस अंजाम दीजिए, फिर चाहे जो हो। अनालेसिस या सोचने-विचारने के बासी फ़ैशन की कोई ज़रूरत ही नहीं। इस नए परिवर्तन का सबसे अहम पहलू इस बात से चिंता मुक्त हो जाना है कि आप अपने निवेश का क्या मूल्य अदा कर रहे हैं। जिसने भी, असल में लंबे समय का निवेश किया है और उन्हें निवेश के ख़राब और अच्छे दौर का अनुभव है, और जिन्हें असल में कोई अनुभव मिला है, उनके लिए इस फ़लसफ़े में विश्वास करना अजीब है। असल निवेश में लोग अक्सर इतने उत्साहित हो जाते हैं कि वो दाम नज़रअंदाज़ कर बैठते हैं। किसी-न-किसी मौक़े पर हम सभी ने ये किया है। हालांकि, हम जानते रहे हैं कि ये एक ग़लती है। ऐसा नहीं करना चाहिए। दाम या प्राइस नज़रअंदाज़ करने को, निवेश का एक सिद्धांत बना देना, एक विद्रूपता है।
जिसे निवेश कहते हैं, वो पूरी तरह से-और फिर कहता हूं, पूरी तरह से-ख़रीदने और क़ीमत बढ़ जाने पर बेच देने का नाम है। एक निवेश के चुनाव का पूरा आकलन और विश्लेषण होने के बाद, आपको ये सोचना ही होगा कि जो लागत आप अदा कर रहे हैं वो आगे जा कर मुनाफ़े में बदलेगी या नहीं। पर हां, ये कहना कि निवेश के दाम पर ही फ़ोकस बनाए रखना ‘वैल्यू इन्वेस्टिंग’ है, और आज, ग्रोथ और वैलुएशन के दौर में ये दिवंगत हो गई है, ये बात सच से कोसों दूर है। जैसा कि चार्ली मंगर ने एक बार कहा था, “सारी अच्छी इन्वेस्टिंग वैल्यू इन्वेस्टिंग है।” ये व्याख्या, सबसे सरल और व्यापक है। कि किसी चीज़ को उसके अंतर्निहित मूल्य (Intrinsic value) से कम में ख़रीदना ही वैल्यू इन्वेस्टिंग है। और अगर आप पैसा बनाना चाहते हैं, तो उसका तरीक़ा यही है।
BAAP-SAAP-HODL को अगर इस फ़्रेमवर्क में देखें, तो इन पर इतना फ़ोकस, चकरा देने वाला है। हालांकि, इसके कुछ और कारण हैं। पहला, क्रिप्टो की दुनिया ने काफ़ी वक़्त तक इस बेवकूफ़ाना निवेश के तरीक़े को सैद्धांतिक तौर पर मज़बूती दी। लोगों ने फ़्रॉड ‘करंसियां’ बनाईं जिनका असल दुनिया में कोई आधार ही नहीं है और उसे बेचने को सही ठहराया गया क्योंकि उन्होंने, भविष्य की करंसी के नाम पर ये बेमतलब चीज़ ईजाद कर दी। ये सिर्फ़ एक सेल्स-पिच है, लोगों का पैसा अपनी जेब में ट्रांसफ़र करने का तरीक़ा है। बिना दाम की चिंता किए, या कोई बुनियादी मापदंड जांचे-परखे, निवेश करने की संस्कृति को न्यू एज डिजिटल कंपनी के तौर पर प्रमोट किया जाता रहा है क्योंकि-स्टॉक के दाम को बिना किसी तरह के मुनाफ़े के सही साबित कर के ये भी उसी नाव की सवारी कर रहे हैं।
ये सबकुछ, बेकार की सेक्योरिटीज़ बेचने वालों के लिए तो काम कर गया है, मगर इसने उनके लिए उतना काम नहीं किया है जिन्होंने इन कहानियों पर भरोसा किया और निवेश किया है। ऐसी बातों के चक्कर में मत आएं-कोई भी चीज़ ‘किसी भी क़ीमत पर’ ख़रीदने लायक़ नहीं होती।






