
Debt Fund: निवेश के विकल्पों के मामले में अक्सर डेट फ़ंड की फ़िक्स्ड डिपॉजिट से तुलना की जाती है. इक्विटी की तुलना में भले ही इन दोनों में कम रिटर्न मिलता है, लेकिन इन्हें ज़्यादा सेफ़ माना जाता है. हालांकि, इन दोनों, यानी डेट फ़ंड और FD के बीच तुलना करने की बात आए तो निवेशकों के लिए ये आसान नहीं होता. और, बड़ी बात ये है कि इन्वेस्टर्स के लिए 16 तरह के डेट फ़ंड्स के बीच अपने लिए बेस्ट डेट फ़ंड चुनने में ख़ासी मुश्किल होती है. वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार ने निवेशकों की इसी समस्या को दूर करने की कोशिश की है.
Debt Fund से एक दिन में निकाल सकते हैं पैसा
उन्होंने कहा कि डेट फ़ंड में निवेश का एक ख़ास फ़ायदा ये मिलता है कि आप कभी भी एक दिन के नोटिस पर पैसा निकाल सकते हैं. ख़ास बात ये है कि इस पर थोड़ा ज़्यादा रिटर्न मिलता है और जब तक आप पैसा निकालते नहीं है, आपको कोई टैक्स नहीं देना होता. इसे कुछ ऐसे समझिए, आप आज अगर डेट फ़ंड (Debt Fund) में पैसा लगाते हैं तो जब तक निकालेंगे नहीं, तब तक आपको निवेश पर मुनाफ़ा नहीं होगा और मुनाफ़ा नहीं होगा तो आपको टैक्स नहीं देना होगा.
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कब तक नहीं लगता टैक्स
हालांकि, धीरेंद्र कुमार ने कहा कि पहले डेट फ़ंड और भी अट्रैक्टिव था. पहले जब आप डेट फ़ंड में पैसा लगाते थे और तीन साल तक होल्ड करने पर मिलने वाले पूरे रिटर्न में से महंगाई को घटा दिया था. इसके बाद, महंगाई से ऊपर की ग्रोथ पर ही आपको टैक्स देना होता था. लेकिन अच्छी बात ये है कि इस बदलाव के बावजूद, डेट फ़ंड अभी भी अट्रैक्टिव है. दरअसल, अगर आप बैंक में फ़िक्स्ड डिपॉजिट (fixed deposit) करते हैं तो आपको हर साल मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना होता है. लेकिन डेट फ़ंड में ऐसा नहीं है. अगर आप किसी डेट फ़ंड को पांच साल के होल्ड करते हैं, तो पांच साल तक आपको टैक्स नहीं देना होगा. और निकालने पर होने वाले मुनाफ़े पर आपको टैक्स देना होगा.
सरल शब्दों में कहें तो डेट फ़ंड में एक तरह से आप टैक्स देने का समय आगे टाल सकते हैं. इसमें थोड़ा ज़्यादा रिटर्न मिलता है और जब चाहे पैसा निकाल सकते हैं.
कौन सा डेट फ़ंड है बेहतर
म्यूचुअल फ़ंड (Mutual Fund) को आपकी जिंदगी आसान करने के लिए बनाया गया था, लेकिन 16 तरह के डेट फ़ंड में से आपके लिए चुनना मुश्किल होगा. हालांकि, इसके लिए आपको कई फ़ंड्स की अनदेखी करनी होगी और ये इसी लायक़ भी हैं. दरअसल, आपकी ज़रूरत लिक्विड फ़ंड या अल्ट्रा शॉर्ट टर्म बॉन्ड फ़ंड से आपकी ज़रूरत पूरी हो जाती है.
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धीरेंद्र कुमार ने कहा कि अगर आपके पास कुछ दिन, सप्ताह या कुछ महीनों के लिए पैसा हो, तो उस पैसे को ही इसमें लगाएं तो बैंक से थोड़ा बेहतर रिटर्न मिलेगा और आप जब चाहें इसे निकाल सकते हैं. अगर आप कई साल के लिए पैसा लगाना चाहते हैं तो शॉर्ट टर्म डेट फ़ंड या शॉर्ट टर्म मेच्योरिटी फ़ंड में पैसा लगाइए.
कहां हो सकता है थोड़ा नुकसान
आपको क्रेडिट रिस्क फ़ंड, गिल्ट फ़ंड, लॉन्ग मेच्योरिटी फ़ंड, लॉन्ग टर्म गिल्ट फ़ंड जैसी कैटेगरी के उतार-चढ़ाव को समझने में समय लग जाएगा. कभी कभार आपको नुक.सान भी होगा. क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने पर लॉन्ग टर्म मेच्योरिटी फ़ंड में भारी गिरावट आती है, जिसके लिए हम तैयार नहीं होते हैं.
क्रेडिट रिस्क फ़ंड (credit risk fund) आमतौर थोड़ा अच्छा रिटर्न देते हैं, लेकिन कभी कभार रिस्क भी पैदा होता है. इसमें 2, 4 या पांच साल में 5-10 फ़ीसदी पैसा डूब सकता है. अगर कोई बॉन्ड पैसा डिफ़ॉल्ट कर रहा है तो आपको नुक़सान होगा. इसलिए आपको ऐसे नुक़सान या इसकी आशंकाओं से बचना चाहिए. इसलिए भले ही कम रिटर्न मिले, लेकिन निश्चित मिले. दरअसल, डेट फ़ंड से हम ऐसी ही उम्मीद करते हैं.
बैंक FD और डेट फ़ंड में अंतर
अगर आपको अपनी पूंजी को पूरी तरह सुरक्षित रखनी है तो एक अच्छे बैंक में फ़िक्स्ड डिपॉजिट (Bank FD Rates) कराने का विकल्प है. अगर आपका पैसा इसमें एक निश्चित अवधि तक यानी 1 या 3 साल या किसी अन्य समय तक फंसा रहेगा तो उतनी अवधि तक के लिए रिटर्न मिलता है. हालांकि, उससे पहले निकालने पर आपको मिलने वाली ब्याज कम हो जाती है. इसके अलावा, आपको मिलने वाले रिटर्न पर हर साल टैक्स देना होगा.
अगर शॉर्ट ड्यूरेशन फ़ंड से तुलना करें तो इसमें खासा अंतर हो जाता है. अगर आप स्टेट बैंक में फ़िक्स्ड डिपॉज़िट कराते हैं तो आपको 6.8 फ़ीसदी रिटर्न मिलेगा. यही पैसा आपने शॉर्ट ड्यूरेशन फ़ंड (short duration fund) में लगा हो तो बीते एक साल में आपको 7.61 फ़ीसदी रिटर्न मिला होता. ₹1 करोड़ की जमा पर ₹81,000 का अंतर आता. ये ख़ासा बड़ा अंतर है.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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