
Jio Finance demerger from RIL: इस साल की शुरुआत में फ़ाइनेंशियल सर्विस के बिज़नस में उतरने का ऐलान करने के बाद, रिलायंस इंडस्ट्रीज के मैनेजमेंट ने अपनी फ़ाइनेंशियल इकाई को डीमर्ज करने के लिए 20 जुलाई, 2023 की तारीख तय कर दी है.
रिलायंस स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (अलग होने वाली कंपनी RSIL), रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी है. अलग होने के बाद इसका नाम बदलकर जियो फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ (JFS) कर दिया जाएगा. ये मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का पहला बड़ा डीमर्जर है.
डीमर्जर की पूरी बात
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के शेयरहोल्डर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के हर शेयर पर JFS के एक शेयर के हक़दार होंगे.
रिकॉर्ड डेट (record date) की घोषणा के बाद, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के शेयर की क़ीमत में अच्छी तेज़ी देखने को मिली है. कंपनी पहले से ही भारत में सबसे ज़्यादा मार्केट वैल्यू वाली कंपनी है और उसने 10 जुलाई, 2023 को ₹18.5 लाख करोड़ से ज़्यादा का मार्किट कैपिटलाइज़ेशन दर्ज किया.

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डीमर्जर के फैक्ट
पिछले कुछ साल में, भारतीय फ़ाइनेंशियल सर्विस इंडस्ट्री में ज़बरदस्त ग्रोथ देखने को मिली. इसके अलावा, अभी इसमें और ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज़ इस डीमर्जर के ज़रिये इस ग्रोथ का फ़ायदा उठाने और ख़ुद को भारत में सबसे बड़ी NBFC में से एक के तौर पर खड़ा करना चाहती है.
JFSL को रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की तकनीकी क़ाबिलियत और बड़े कैश रिज़र्व से बहुत ज़्यादा फ़ायदा होगा. डीमर्जर के बाद, JFSL ने अपने क़र्ज़ देने के बिज़नस (lending business) को शुरू करने की अहम रेग्युलेटरी शर्तों को पूरा करने के लिए लिक्विड एसेट हासिल करने की योजना बनाई है. इसका ज़ोर मुख्य रूप से रिटेल और MSME क्रेडिट मार्केट सेगमेंट पर रहेगा. ये बीमा, डिजिटल पेमेंट, ब्रोकिंग और एसेट मैनेजमेंट जैसी कई फ़ाइनेंशियल सर्विस के वर्टिकल्स को आगे बढ़ाने की भी योजना बना रही है.
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धनक साप्ताहिक
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