फ़र्स्ट पेज

फ़ाइनेंशियल समिट में हर स्पीकर कुछ बेचने आता है

नाई की सलाह मुफ़्त होती है, लेकिन बाल कटवाने के पैसे लगते हैं

नाई की सलाह मुफ़्त होती है, लेकिन बाल कटवाने के पैसे लगते हैंAditya Roy/AI-Generated Image

back back back
4:14

हाल ही में एक फ़ाइनेंशियल समिट से एक फ़ंड मैनेजर की क्लिप वायरल हुई. लगभग थिएटर जैसे अंदाज़ में, वो बड़े जोश के साथ इस बात की वकालत कर रही थीं कि भारत अभी दुनिया में निवेश की सबसे बेहतरीन जगह है. लाखों व्यूज़ आए. लेकिन कमेंट्स में बस छह शब्दों वाला सबसे तीखा जवाब था: "नाई से कभी मत पूछो कि बाल कटवाने चाहिए या नहीं."

वो एक ऐसा फ़ंड चलाती हैं जो सिर्फ़ भारतीय शेयरों में निवेश करता है. ज़ाहिर है, उनका मानना है कि भारत निवेश के लिए सबसे अच्छी जगह है. उनकी रोज़ी-रोटी इसी पर निर्भर है. यह कोई नैतिक कमज़ोरी नहीं है. बस यही है कि इंसेंटिव कैसे काम करते हैं. लेकिन पुणे में बैठा वो दर्शक, जो फ़ोन पर वो क्लिप देख रहा है, उसके पास यह जानने का कोई तरीक़ा नहीं है कि यह जोशीली दलील असल में, बनावट में, एक “बेचने का तरीक़ा” भी है.

उसी समिट में एक और दिलचस्प पल आया. मार्केट के एक अनुभवी विशेषज्ञ ने सीधे कह दिया कि हाल के दिनों में घरेलू रिटेल निवेशकों के पैसे में जो तेज़ उछाल आया है, उसकी एक बड़ी वजह उन विदेशी संस्थागत निवेशकों को बाहर निकलने का रास्ता देना था जो भारत से पैसा निकालना चाहते थे.

इसे ज़रा अलग तरह से समझें. जब 2022 और 2023 में FII रिकॉर्ड स्तर पर भारतीय शेयर बेच रहे थे, तो कोई न कोई ख़रीद भी रहा था. वो ख़रीदार था भारतीय रिटेल निवेशक, जिसे SIP के ज़रिए चैनल किया गया, जिसे बताया गया कि बाज़ार हमेशा धैर्य का इनाम देता है और उनका पैसा उन प्रोडक्ट्स में लगाया गया जिनका तत्काल काम यह सप्लाई सोखना था. यह टाइमिंग नज़रअंदाज़ करने वाली नहीं है. जिस दौर में FII का पैसा सबसे तेज़ी से बाहर जा रहा था, ठीक उसी दौर में घरेलू SIP कॉन्ट्रिब्यूशन सालाना ₹1.5 लाख करोड़ पार कर गया.

यह भी पढ़ेंः पैनिक को प्रॉफ़िट में बदलने की कला

शेयरों में रिटेल निवेशकों की भागीदारी अच्छी बात है. सही तरीक़े से की जाए तो यह किसी भारतीय परिवार की वेल्थ के लिए सबसे बेहतर चीज़ों में से एक हो सकती है. लेकिन इसमें फ़र्क़ उन निवेशकों के बीच है जो समझकर बाज़ार में आते हैं कि वो क्या ख़रीद रहे हैं और उन निवेशकों के बीच जिन्हें इसलिए अंदर लाया जाता है क्योंकि इंडस्ट्री को संस्थागत ट्रेड के दूसरी तरफ़ किसी की ज़रूरत होती है. भारतीय बचत के ‘फ़ाइनेंशियलाइज़ेशन’ का उत्सव उस इंडस्ट्री ने मनाया है जिसे इससे फ़ायदा होता है. क्या यह बचत करने वालों के लिए भी उतना ही अच्छा रहा, यह सवाल इन समिट में शायद ही कभी उठता है.

बात किसी एक स्पीकर की नहीं है. फ़ंड हाउस आपका AUM चाहता है. ब्रोकर आपका ट्रेडिंग वॉल्यूम चाहता है. एनालिस्ट चाहती है कि आप उसकी कॉल नोटिस करें ताकि वह अगली बार ज़्यादा चार्ज कर सके. वो बेयरिश कॉन्ट्रेरियन जो नाटकीय अंदाज़ में उल्टी राय दे रहा है, उसका क्या? वो अपना पर्सनल ब्रांड बना रहा है. स्टेज पर हर शख्स के वहां होने की एक वजह है. वो वजह शायद ही कभी सिर्फ़ एजुकेशन है.

नए निवेशक के पास यह सब देखने का कोई भरोसेमंद तरीक़ा नहीं है. TV एक्सपर्ट हो, कॉन्फ्रेंस पैनलिस्ट हो, वायरल क्लिप हो या WhatsApp फ़ॉरवर्ड, किसी पर भी यह लेबल नहीं लगा होता कि यह किसके हित में है. तीन सवाल लगभग कभी नहीं पूछे जाते: क्या इस शख्स को यह कहने के लिए पैसे मिलते हैं? अगर मैं इनकी सलाह मानूं तो क्या इनकी कमाई बढ़ेगी? और अगर यह ग़लत निकले तो इन्हें क्या नुक़सान होगा?

तो यहां एक काम का नियम है. जब कोई भरोसे के साथ कोई निवेश की दलील दे, ख़ासकर जोशीली दलील, तो क़दम उठाने से पहले पूछें: यह शख्स कौन है और क्या बेच रहा है? जवाब हमेशा सलाह को नकारेगा नहीं. लेकिन जिस तरह से आप उसे सुनते हैं, उसे ज़रूर बदल देगा.

अगर आप ऐसी सलाह चाहते हैं जो किसी और के सेल्स टारगेट से न बनी हो, तो SEBI-रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइज़र खोजें, जो फ़ीस लेता हो और जो प्रोडक्ट सुझाए उनसे कुछ न कमाता हो. नाई की सलाह मुफ़्त होती है. बाल कटवाना नहीं.

यह भी पढ़ेंः जब फ़्री सर्विस की आपको 'क़ीमत' चुकानी पड़ती है

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

वो घरेलू म्यूचुअल फ़ंड जो विदेशी शेयरों में निवेश करते हैं

पढ़ने का समय 6 मिनटआकार रस्तोगी

Manipal Hospitals IPO: साइज़ में सबसे बड़ी, पर रिटर्न में पीछे

पढ़ने का समय 9 मिनटLekisha Katyal

HDFC Bank vs ICICI Bank: 10 साल में कैसे बदली लीडरशिप?

पढ़ने का समय 4 मिनटअभिनव गोयल

HUL एक बेहतरीन बिज़नेस तो है, लेकिन क्या यह एक बेहतरीन स्टॉक भी है?

पढ़ने का समय 5 मिनटसत्यजीत सेन

वह सवाल जो आपने नहीं पूछा

पढ़ने का समय 4 मिनटधीरेंद्र कुमार

वैल्यू रिसर्च हिंदी पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

रोज़ नहीं, साल में एक बार देखें

अपने पोर्टफ़ोलियो को रोज़ लाल-हरे रंग में देखने के बजाय, साल में सिर्फ़ एक बार ध्यान से देखना काफ़ी है

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी