
टैक्स बचाने वाले निवेशों की दुनिया में, रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए बहुत से विकल्प मौजूद हैं. सबसे लोकप्रिय बैंक FD और पब्लिक प्रॉविडेंट फ़ंड से लेकर सबसे ज़्यादा ग़लत-बिक्री वाले यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIPs) तक, अलग-अलग लॉक-इन पीरियड के, रिटर्न की संभावनाओं वाले और रिस्क वाले कई क़िस्म के तरीक़े हैं जिनके ज़रिए टैक्स बचाने वाले निवेश किए जा सकते हैं. मगर, जब बात काम आने और सुविधा की हो, तो एक ही विकल्प सबसे ऊपर होता है - इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS), इसे टैक्स-सेवर फ़ंड (tax-saver fund) के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि ELSS फ़ंड्स आपको दोहरा फ़ायदा देते हैं - पूंजी भी बनती है और टैक्स भी बचता है, और वो भी तीन साल के सबसे कम लॉक-इन पीरियड के साथ. इससे भी बड़ी बात है कि इनका हाल का प्रदर्शन इनकी साख को और भी मज़बूत करता है. ELSS का शानदार प्रदर्शन अडानी-हिंडनबर्ग प्रकरण की वजह से इस साल की शुरुआत ज़रा सुस्त हुई थी, और विकसित देशों में मंदी की ख़बरों ने, इक्विटी मार्केट पर दबाव बना दिया था. मगर पिछले कुछ महीनों में इन्होंने फिर से तेज़ वापसी की और निवेशकों का मन भी बदला. इसी वजह से ELSS फ़ंड्स में भी जान आ गई. इस साल, ELSS फ़ंड्स, BSE 500 इंडेक्स बेंचमार्क के ऊपर औसतन अच्छा अल्फ़ा (alpha) देने में क़ामयाब रहे हैं. ये सिर्फ़ इसीलिए नहीं हुआ कि कुछ ही फ़ंड्स ने अच्छा प्रदर्शन किया. बल्कि इसलिए क्योंकि इस कैटेगरी के 36 में से 31 फ़ंड्स ने इस साल के पहले छः महीनों में बेंचमार्क से बेहतर नतीजे दिए हैं. एक और बात जो निकल कर सामने आती है वो ये कि ELSS कैटेगरी के फ़ंड उन
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