
यूं तो सैकड़ों म्यूचुअल फ़ंड हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही हैं जो हवा के रुख़ के ख़िलाफ़ जाने का साहस दिखाते हैं. इन चुनिंदा फ़ंड्स में SBI कॉन्ट्रा फ़ंड को सही तरीक़े की कॉन्ट्रेरियन स्ट्रैटजी (निवेश की विपरीत रणनीति) की एक शानदार मिसाल कहा जा सकता है. फ़ंड ने हाल ही में हमारी BUY’ लिस्ट में जगह बनाई है और SBI म्यूचुअल फ़ंड में फ़ंड मैनेजर- इक्विटी, दिनेश बालाचंद्रन के कार्यकाल में शानदार आंकड़े दर्ज किए हैं. यहां हम उनके साथ हुई बातचीत के अंश दे रहे हैं, जिसमें हमने SBI कॉन्ट्रा फ़ंड को मज़बूती देने वाली उनकी निवेश की फ़िलॉसफ़ी की जटिलताओं, उनके स्टॉक के चुनाव के ढांचे, और स्टॉक में निवेश करने तथा उनसे बाहर निकलने के कारणों के बारे में जानने की कोशिश की है. आपने 2018 के मध्य में SBI कॉन्ट्रा फ़ंड की कमान संभाली, जिससे इसके प्रदर्शन में काफ़ी बदलाव आया. आपने ऐसा कैसे कर दिखाया? सीधे तौर पर कहें, तो इसका कुछ हिस्सा उन अवसरों से जुड़ा है जो तीन साल पहले मिले थे. उस समय आपको केवल एक ही बात पर दांव लगाना था कि ये दुनिया ख़त्म नहीं होगी. वो एक डरावना वक़्त था, लेकिन आपको ये मानकर चलना था कि कोई न कोई रास्ता निकलेगा ही. इतिहास ऐसी घटनाओं से भरा पड़ा है, और ऐसे हालात ज़्यादा-से-ज़्यादा एक-दो साल ही रहते हैं. इसलिए, कॉन्ट्रा फ़ंड में हम जो कुछ एक्स्ट्रा अल्फ़ा देखते हैं, उसका श्रेय मेरे द्वारा एक दायरे में रहने के बजाय आइडिया की तलाश में आगे बढ़ने को दिया जा सकता है. एक और पहलू जिसने असल में फ़ंड की मदद की, वो ये था कि कई साइक्लिकल सेक्टर्स में, कोविड से पहले साल, 2019 में ही ट्रेंड पलटने की शुरुआत नज़र आने लगी थी. कई साइक्लिकल सेक्टर्स में क्षमता उपयोग उस स्तर पर पहुंच रही थी, जहां लग रहा था जैसे आपको ज़्यादा-से-ज़्यादा दो साल इंतज़ार करना होगा और फिर आप कैपेक्स साइकल से या आर्थिक गतिविधि के लिहाज़ से एक बहुत अच्छा रिवाइवल देख सकेंगे. उस दौर में लोग कई साइक्लिकल शेयरों में एक दशक के ख़राब प्रदर्शन के बाद हार मानते दिख रहे थे. इसलिए, आकर्षक मूल्यांकन और बेहतर आउटलुक के साथ ये एकदम सही तालमेल था. ऐसे दौर बार-बार नहीं आते, लेकिन जब आते हैं और अगर आप उसका फ़ायदा उठाने में सक्षम होते हैं, तो आपको अगले कई साल के तक इसका फ़ायदा मिलता रहता है. हम खुशक़िस्मत थे कि हमें इनमें से कुछ रुझानों की पहचान करने का मौका मिला और इससे वास्तव में फ़ंड के प्रदर्शन में मदद मिली. ये भी पढ़िए- स्टॉक से पैसा निकाल कर Mutual Funds में लगान
ये लेख पहली बार अक्तूबर 19, 2023 को पब्लिश हुआ.
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