
भारत की एक प्रमुख QSR कंपनी देवयानी इंटरनेशनल (Devyani International) थाईलैंड के QSR ऑपरेटर रेस्टोरेंट डवलपमेंट को ख़रीदने और थाईलैंड के मार्केट में दस्तक देने के लिए तैयार है. ₹1,066 करोड़ का ये अधिग्रहण, देवयानी की कई सब्सिडियरी में से एक द्वारा किया जाएगा, जो ट्रांज़ैक्शन की एक सीरीज़ के माध्यम से इस कंपनी का मेजॉरिटी स्टेक ख़रीदेगी.
देवयानी इंटरनेशनल सौदे की कुल रक़म में ₹341 करोड़ का योगदान करेगी. इसके अलावा, सब्सिडियरी में शेयरहोल्डर टेमासेक ₹328 करोड़ का योगदान देगी और थाईलैंड का एक और लोकल पार्टनर ₹12 करोड़ का निवेश करेगे. बाक़ी रक़म का इंतज़ाम एक स्थानीय बैंक से क़र्ज़ के ज़रिये किया जाएगा.
क्या करती है रेस्टोरेंट डवलपमेंट?
रेस्टोरेंट डवलपमेंट थाईलैंड की एक दिग्गज QSR कंपनी है, जो 274 KFC स्टोर ऑपरेट करती है. फ़ाइनेंशियल ईयर 20 के बाद इसने थाईलैंड में 147 नए स्टोर जोड़े हैं और कैलेंडर ईयर 22 में इसने इसका कुल रेवेन्यू ₹1,165 करोड़ रहा था.
रेस्टोरेंट डेवलपमेंट का हिस्टोरिकल परफ़ॉर्मेंस
| फ़ाइनेंशियल | YTDFY24 | FY23 | FY22 | FY21 | 2Y ग्रोथ (%) |
|---|---|---|---|---|---|
| रेवेन्यू (₹करोड़) | 674 | 1230 | 969 | 917 | 15.8 |
| ग्रॉस प्रॉफ़िट (₹करोड़) | 425 | 784 | 625 | 579 | 16.3 |
| एवरेज डेली सेल (₹करोड़) | 14 | 14 | 12 | 12 | 6.8 |
| 18 दिसंबर 2023 के एक्सचेंज रेट के हिसाब से थाई बाट (THB) को भारतीय रुपये में तब्दील किया गया है | |||||
सौदे से क्या फ़ायदा होगा
KFC थाईलैंड में सबसे ज़्यादा बिकने वाली QSR सीरीज़ है. असल में KFC थाईलैंड की QSR की दुनिया में बेहद मज़बूत स्थिति में है. इसके स्टोर्स की संख्या अपने जैसी कंपनियों की तुलना में चार गुनी हैं. इसके अलावा थाईलैंड में ज़्यादातर मीट का कंजप्शन पोल्ट्री से होता है.
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देवयानी का गोल, एक्विजिशन के ज़रिए दो ट्रेंड्स को भुनाना है. इस एक्विज़िशन से कंपनी को अगले 10 साल में अपने स्टोर्स का नंबर दोगुना करने के लक्ष्य में भी मदद मिलेगी.
इसके अलावा एक्विज़िशन कंपनी रेस्टोरेंट डेवलपमेंट, लिमिटेड सर्विस रेस्टोरेंट (LSR) फील्ड में भी मौजूद है, जो थाईलैंड में एक बड़ा बाज़ार है. ये लाइटनिंग क्विक सर्विस भी देती और कस्टमर और स्टाफ़ इंटरेक्शन को कम-से-कम रखा जाता है.
अब निवेशकों की बात
इस एक्विज़िशन से देवयानी के बिज़नस में नया ग्रोथ इंजन जुड़ेगा. हालांकि, इन्वेस्टर्स को ध्यान रखना चाहिए कि देवयानी के पास इस एक्विज़िशन की फ़ाइनेंसिंग के लिए अपने बहीखातों में लिक्विड कैश काफ़ी नहीं है और उसने कैपिटल जुटाने के लिए क़र्ज़ का रास्ता अपनाया है.
साथ ही QSR स्पेस में काफ़ी ज़्यादा प्रतिस्पर्धा है. इस फ़ील्ड के निवेशकों को ये भी पता होना चाहिए कि QSR कंपनियों का अनालेसिस कैसे करना चाहिए.
एक और अहम बात, ये स्टॉक रेकमेंडेशन नहीं है. कृपया निवेश से पहले अपनी तरफ़ से रिसर्च ज़रूर कर लें.
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