बड़े सवाल

SIP: ₹1 करोड़ की वैल्थ बनाने की सही रणनीति क्या है?

निवेश के चुनाव में रिस्क सहने की क्षमता और निवेश की समय अवधि क्यों बेहद ज़रूरी हैं

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हाल ही में श्री रवि शंकर ने हमसे ये सवाल पूछा: "मैं पांच साल में ₹1 करोड़ जमा करना चाहता हूं. मैं SIP के ज़रिए से ₹1.5 लाख महीना निवेश कर सकता हूं. मुझे कौन सी फ़ंड कैटेगरी चुननी चाहिए?"

₹1.5 लाख महीने की बड़ी SIP के साथ, शंकर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य, पांच साल के अंदर हासिल किया जा सकता है. अब सारी बात यहां आ कर टिक जाती है कि इसके लिए सही निवेश रणनीति क्या हो.

आइए शंकर और ऐसे ही लक्ष्य वाले दूसरे लोगों के लिए सबसे अच्छे विकल्पों का पता लगाते हैं.

₹1 करोड़ का लक्ष्य: सही SIP प्लान कैसे बनाएं?

चूंकि शंकर पांच साल तक हर महीने ₹1.5 लाख निवेश कर सकते हैं, इसलिए कुल निवेश की गई रक़म ₹90 लाख होगी. इस समय सीमा में ₹1 करोड़ जमा करने के लिए, ज़रूरी सालाना रिटर्न 04 फ़ीसदी से थोड़ा ज़्यादा है - ये एक ऐसा लक्ष्य है जो आसानी से पाया जा सकता है.

हालांकि, ये देखते हुए कि उसके पास निवेश के लिए सिर्फ़ पांच साल हैं और लक्ष्य तय है, तो उन्हें मीडियम रिटर्न के साथ पूंजी सुरक्षा (capital preservation) पर ध्यान देना चाहिए, इसीलिए उन्हें नीचे दी गई दो फ़ंड कैटेगरी में से एक को निवेश के लिए चुनना चाहिए.

1. शॉर्ट ड्यूरेशन डेट फ़ंड: सुरक्षित और स्थिर रिटर्न के विकल्प

  • जहां सुरक्षा मायने रखती है वहां निश्चित समयसीमा वाले लक्ष्यों के लिए सबसे सही हैं.
  • ये फ़ंड शॉर्ट-टर्म फ़िक्स्ड इनकम वाले इन्स्ट्रुमेंट्स में निवेश करते हैं और 12 जनवरी 2024 तक पिछले पांच साल में औसतन 6.87 प्रतिशत रिटर्न दिया है.
  • अगर शंकर पिछले पांच साल में हर महीने ₹1.5 लाख निवेश करते, तो उनकी जमा रक़म क़रीब ₹1.07 करोड़ हो जाती.

ये भी पढ़ें: रेगुलर से डायरेक्ट म्यूचुअल फ़ंड प्लान में कैसे स्विच करें

2. इक्विटी सेविंग फ़ंड: उच्च रिटर्न के लिए सही बैलेंस

  • ये फ़ंड अपने पोर्टफ़ोलियो का क़रीब एक तिहाई हिस्सा इक्विटी, डेट (debt) और आर्बिट्राज (arbitrage) रणनीतियों में निवेश करते हैं.
  • वे थोड़ा ज़्यादा रिटर्न की उम्मीद देते हैं, लेकिन डेट फ़ंड की मुक़ाबले ज़्यादा अस्थिरता रखते हैं.
  • पिछले पांच साल में कैटेगरी का औसत रिटर्न 12 जनवरी 2024 तक 11.45 फ़ीसदी रहा है, जो ₹1.5 लाख मासिक SIP को क़रीब ₹1.20 करोड़ में बदल देगा.
  • हालांकि, जोखिम पर ध्यान दें: पिछले पांच साल में इस कैटेगरी के लिए सबसे ख़राब एक महीने का रिटर्न मार्च 2020 में कोविड के दौरान नकारात्मक 16 फ़ीसदी था, जो इक्विटी के जोखिम को उजागर करता है.

संक्षेप में, अगर शंकर को सबसे ज़्यादा सुरक्षा की ज़रूरत है, तो शॉर्ट ड्यूरेशन डेट फ़ंड सबसे अच्छे हैं. लेकिन अगर आप हल्के जोखिम के लिए तैयार हैं और समयसीमा पर थोड़ा लचीलापन रखते हैं, तो संभावित रूप से हाई रिटर्न के लिए इक्विटी सेविंग फ़ंड पर विचार किया जा सकता है.

लंबी अवधि में ₹1 करोड़ कैसे बनाएं? सही फ़ंड और कैटेगरी चुनें

वैल्थ जमा करना तीन बड़े फ़ैक्टर का मेल है:

  • निवेश राशि: मासिक निवेश जितना ज़्यादा होगा, उतनी ही तेज़ी से आप धन इकठ्ठा करेंगे.
  • समय सीमा: आप जितना ज़्यादा वक़्त तक निवेशित रहेंगे, उतना ही ज़्यादा समय कम्पाउंडिंग आपके पक्ष में काम करेगी.
  • रिटर्न: हाई रिटर्न इस काम को गति दे सकता है लेकिन ये अक्सर ऊंचे जोखिम के साथ आता है.

लंबी अवधि या ज़्यादा लचीलापन हो तो इक्विटी में ज़्यादा निवेश कर सकते हैं. ये ऐसी कैटेगरी है जिसने ऐतिहासिक रूप से लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दिया है. चूंकि इक्विटी के लंबी अवधि में ज़्यादा बढ़ने की उम्मीद है, इसलिए लंबी अवधि के मासिक निवेश की रक़म को कम करके भी ₹1 करोड़ का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

फ़ंड में निवेश करना आपके निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता पर भी निर्भर करता है.

  • शॉर्ट टर्म: डेट फ़ंड पूंजी संरक्षण पक्का करते हैं.
  • मीडियम टर्म: एग्रेसिव हाइब्रिड जैसे हाइब्रिड फ़ंड ग्रोथ और रिस्क बैलेंस कर सकते हैं.
  • लॉन्ग टर्म: नेट इक्विटी फ़ंड हाई रिटर्न क्षमता देते हैं, लेकिन इनमें छोटे समय के उतार-चढ़ाव ज़्यादा होते हैं.

आपके निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी, उतना ही आप अपने निवेश को लचील रख सकते हैं. कम्पाउंडिंग की ताक़त आपकी SIP की राशि को कम रखने में मदद करेगी. अपने ख़ास लक्ष्यों के लिए आपको कितने निवेश की ज़रूरत है, इसे कैलकुलेट करने के लिए वैल्यू रिसर्च गोल कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें.

ये भी पढ़ें: FD vs Mutual Fund: आपके लिए क्या बेहतर है?

₹1 करोड़ जल्दी पाने के लिए स्टेप-अप SIP का लाभ उठाएं

स्टेप-अप SIP आपको वक़्त के साथ मासिक निवेश को धीरे-धीरे बढ़ाने में मदद करता है. मिसाल के तौर पर, अपनी आमदनी बढ़ने के साथ अपनी SIP को सालाना 5-10 फ़ीसदी बढ़ाने से आपको अपने ₹1 करोड़ के लक्ष्य को तेज़ी से पाने में मदद मिल सकती है.

मिसाल के तौर पर: इक्विटी सेविंग फ़ंड का 11.45 फ़ीसदी सालाना रिटर्न मानते हुए, ₹1.5 लाख की SIP से शुरुआत करके और हर साल 10 फ़ीसदी बढ़ाते हुए, ₹1 करोड़ का लक्ष्य पांच के बजाय सिर्फ़ चार साल में पाया जा सकता था.

अंत में वैल्थ बनाने के सुझाव: अनुशासन और सही प्लानिंग का महत्व

रातों-रात ₹1 करोड़ बनाने का कोई जादुई फ़ॉर्मूला नहीं है. जल्दी रिटर्न देने वाली स्कीमों या बहुत ज़्यादा रिटर्न का वादा करने वाले निवेशों से सावधान रहें. जोखिम समझे बिना ग़लत प्रोडक्ट्स में निवेश से निराशा हाथ लग सकती है - या इससे भी बदतर, पैसों का नुक़सान हो सकता है.

वैल्थ खड़ी करने में अनुशासन और यथार्थवादी अपेक्षाएं होनी चाहिए. अपने निवेश की समय अवधि और जोखिम सहने की क्षमता से मेल खाने वाली सही एसेट क्लास का चुनाव ज़रूरी है.

आप जानना चाहते हैं कि अलग-अलग कैटेगरी में फ़ंड्स ने अतीत में कैसा प्रदर्शन किया है? फ़ंड्स की तुलना करने के लिए हमारे फ़ंड मॉनिटर पर जाएं और सोचे-समझे फ़ैसले करें.

ये भी पढ़िएः वैल्थ क्रिएट करने का रोड-मैप

ये लेख पहली बार जनवरी 16, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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