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मैं हाल ही में एक निवेशक से मिला - आइए, उन्हें मिस्टर रेगुलर कहें - जो बरसों से म्यूचुअल फ़ंड में अनुशासित तरीक़े से निवेश कर रहे थे. 2010 तक, उन्होंने लगभग ₹1.5 करोड़ की पूंजी बना ली थी, जो उनके अनुशासित नज़रिए और धैर्य का प्रमाण था. आज की तारीख़ में, उनका निवेश काफ़ी बढ़ा है, लेकिन हाल ही में हुई एक चर्चा के दौरान हमें एक चौंकाने वाला सच पता चला: क़रीब-क़रीब सब कुछ सही करने के बावजूद, मिस्टर रेगुलर ने लगभग ₹20 लाख का संभावित मुनाफ़ा गंवा दिया. कारण? उन्होंने अपनी रेगुलर प्लान वाली म्यूचुअल फ़ंड स्कीमों को डायरेक्ट प्लान में बदलने का फ़ायदा नहीं उठाया. 2013 में, म्यूचुअल फ़ंड कंपनियों ने सभी स्कीमों के लिए डायरेक्ट प्लान शुरू किए. ये एक ख़ामोशी से होने वाली क्रांति जैसी रही है. डायरेक्ट प्लान के तहत, निवेशक डिस्ट्रीब्यूटरों को दिया जाने वाला छिपा हुआ कमीशन बचा सकते थे. असल में, इसका मतलब है कि डायरेक्ट प्लान के एक्सपेंस रेशियो (यानि ‘व्यय अनुपात’ जो फ़ंड सालाना फ़ीस के तौर पर लेता है) रेगुलर प्लान की तुलना में लगभग 0.5% से 1% कम होता है. पहली नज़र में, एक प्रतिशत का अंतर मामूली लग सकता है. लेकिन जैसा कि मिस्टर रेगुलर की कहानी दिखाती है, समय के साथ छोटी लागत का अंतर बड़ी राशि में बदल जाता है. इसे इस तरह समझें: ₹1.5 करोड़ के पोर्टफ़ोलियो पर, 0.5% की कम फ़ीस से एक साल में ₹75,000 की बचत होती है. अगर ये 1% के क़रीब है, तो एक साल में लगभग ₹1.5 लाख की बचत होती है - ये पैसा आपके निवेश में रहता है और आपके लिए बढ़ता रहता है. 10 या 12 साल में, ये सालाना बचत और उन पर एक्स्ट्रा ग्रोथ आसानी से लाखों रुपये में बदल सकती है. मिस्टर रेगुलर के मामले में, इस एक्स्ट्रा फ़ायदे की कमी ने उनकी संपत्ति से लगभग ₹20 लाख कम कर दिए — भले ही उन्होंने स्टेप-बाए-स्टेप तरीक़े से स्विच किया होता. जब मैंने मिस्टर रेगुलर से पूछा कि उन्होंने डायरेक्ट प्लान में क्यों नहीं बदला, तो उनके जवाब ईमानदार थे और कई निवेशकों की सोच को दिखाते थे. सबसे पहले उन्होंने जड़ता का ज़िक्र किया - यानी, "सब कुछ ठीक चल रहा था, तो बदलने की क्या ज़रूरत?" उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि स्विचिंग को लेकर थोड़ा शक़ था, उन्हें लगता था कि ये जटिल होगा. हालांकि, सबसे बड़ी बाधा टैक्स का डर था. रेगुलर प्लान से डायरेक्ट प्लान में स्विच करना फ़ंड के अंदर कोई "स्विच" नहीं है; इसमें रे
ये लेख पहली बार मई 06, 2025 को पब्लिश हुआ.
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