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पाकिस्तान के साथ हाल के टकराव के बाद डिफेंस सेक्टर के शेयरों में दमदार रैली देखने को मिल रही है. स्वाभाविक रूप से, डिफेंस फ़ंड्स को भी इसका फ़ायदा मिल रहा है.
7 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के बाद से निफ़्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स TRI ने 22 प्रतिशत की शानदार उछाल दर्ज की है (23 मई, 2025 तक), जबकि ब्रॉडर निफ़्टी 500 TRI केवल 3 प्रतिशत की मामूली बढ़त ही हासिल कर सका. जाहिर है, बाज़ार ने अपना पसंदीदा सेक्टर चुन लिया है.
लेकिन क्या आपको भी इस दौड़ में शामिल होना चाहिए? आइए डिफेंस फ़ंड्स को क़रीब से समझें और देखें कि क्या ये वाकई आपके पोर्टफ़ोलियो में जगह पाने लायक हैं.
डिफेंस फ़ंड्स क्या होते हैं?
डिफेंस फ़ंड्स फ़िलहाल एक नया क्षेत्र है. अभी एक्टिव तरीक़े मैनेज होने वाला फ़ंड एक ही है- HDFC डिफेंस फ़ंड. ये फ़ंड क़रीब दो साल से चल रहा है. बाकी फ़ंड्स काफ़ी नए हैं. पांच पैसिव विकल्प (ETFs और FoFs सहित) निफ़्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स को ट्रैक करते हैं और इनमें से कोई भी एक साल भी पूरा नहीं कर पाया है.
इस मामले में, आइए देखें कि ये फ़ंड्स किन शेयरों में निवेश करते हैं. पैसिव फ़ंड्स के लिए हम डिफेंस इंडेक्स के सबसे बड़े घटकों पर नज़र डालेंगे, क्योंकि ये फ़ंड्स उन्हीं का आइना होते हैं.
डिफेंस फ़ंड्स की टॉप 5 होल्डिंग
| HDFC डिफेंस फ़ंड | निफ़्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स |
|---|---|
| हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (20.3%) | हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (19.8%) |
| भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (19.3%) | भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (18.5%) |
| सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया (14.5%) | सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया (16%) |
| BEML (9.3%) | मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (9.4%) |
| एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स (5.5%) | भारत डायनेमिक्स (7%) |
| डेटा 30 अप्रैल, 2025 का है. | |
एक नज़र में पता चलता है कि HDFC डिफेंस फ़ंड और इंडेक्स में शीर्ष तीन होल्डिंग्स एक जैसी हैं और इनका वेटेज भी लगभग समान है. ये तीनों शेयर मिलकर पोर्टफ़ोलियो का 54 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं. थोड़ा और विस्तार से देखें, तो शीर्ष पांच शेयर HDFC फ़ंड में 69 प्रतिशत और इंडेक्स फ़ंड में 71 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. यानी, दोनों ही पोर्टफ़ोलियो बहुत हद तक कुछ चुनिंदा शेयरों पर निर्भर हैं, जो प्रदर्शन का बड़ा हिस्सा तय करते हैं.
ये भी दिलचस्प है कि HDFC डिफेंस फ़ंड का इंडेक्स के साथ लगभग 62 प्रतिशत ओवरलैप है.
रिटर्न
2024 के अंत में आई गिरावट से पहले ही निफ़्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स ने शानदार प्रदर्शन किया था. जनवरी 2022 में लॉन्च होने से लेकर जुलाई 2024 के पीक तक, इस इंडेक्स ने 109 प्रतिशत का वार्षिक रिटर्न दिया. कुल मिलाकर, ये 519 प्रतिशत की ज़बरदस्त उछाल थी, जो इतनी ज़्यादा है कि बाक़ी इंडेक्स इसके सामने ठहरे हुए नज़र आते हैं. तुलना के लिए, निफ़्टी 500 TRI ने इसी अवधि में 19 प्रतिशत का सम्मानजनक, लेकिन तुलनात्मक रूप से कम वार्षिक रिटर्न दिया.
फिर गिरावट आई और डिफेंस स्टॉक्स भी इससे नहीं बचे. जुलाई 2024 के शिखर से फ़रवरी 2025 के निचले स्तर तक, निफ़्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स 37 प्रतिशत लुढ़क गया, जो निफ़्टी 500 TRI की 10 प्रतिशत गिरावट से कहीं ज्यादा था. लेकिन वापसी भी उतनी ही शानदार रही. फ़रवरी के निचले स्तर से 23 मई, 2025 तक, डिफेंस इंडेक्स ने केवल तीन महीनों में 65 प्रतिशत का तगड़ा रिटर्न दिया, जबकि निफ़्टी 500 TRI ने 10 प्रतिशत की मामूली बढ़त हासिल की.
डिफेंस सेक्टर में उछाल के पीछे क्या है?
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स्वदेशीकरण की पहल:
मेक इन इंडिया के तहत सरकार ने स्वदेशी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार किए हैं. इसका लक्ष्य है आयात पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी डिजाइन, विकास और उत्पादन के जरिए घरेलू क्षमताओं को मज़बूत करना.
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निर्यात में उछाल:
भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट ने नया रिकॉर्ड बनाया है, जो FY24-25 में ₹23,622 करोड़ तक पहुंच गया. ये FY13-14 के मात्र ₹686 करोड़ से 38 प्रतिशत की सालाना ग्रोथ को दर्शाता है.
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मज़बूत ऑर्डर बुक:
स्वदेशीकरण और बढ़ते एक्सपोर्ट ने डिफेंस कंपनियों की ऑर्डर बुक को भारी-भरकम बना दिया है. मिसाल के तौर पर, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), जो एक्टिव और पैसिव दोनों तरह के डिफेंस फ़ंड्स में बड़ा हिस्सा (लगभग 20 प्रतिशत) रखती है, की ऑर्डर बुक पिछले तीन सालों में 32 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ी है.
- भू-राजनीतिक तनाव: पड़ोसी देशों, ख़ासकर हाल में पाकिस्तान के साथ बढ़े तनाव ने ये धारणा मजबूत की है कि भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को और बढ़ा सकता है, जिससे निवेशकों का डिफेंस शेयरों में रुझान बढ़ा है.
क्या आपको इनमें निवेश करना चाहिए?
बेशक, रिटर्न ललचाने वाले हैं और इसमें निवेश करना आकर्षक लगता है. लेकिन उत्साहित होने से पहले कुछ सावधानियों पर ग़ौर करना ज़रूरी है.
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ज़्यादा कॉन्संट्रेशन का जोखिम:
जैसा कि हमने पहले चर्चा की, एक्टिव और पैसिव दोनों तरह के डिफेंस फ़ंड्स कुछ चुनिंदा शेयरों पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं. आपके पोर्टफ़ोलियो का क़रीब 70 प्रतिशत रिटर्न केवल पांच शेयरों पर टिका होगा.
- वैल्यूएशन का रिस्क: डिफेंस शेयरों में तेज़ उछाल ने उनके वैल्यूएशन को महंगा बना दिया है, जैसा कि P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) और P/B (प्राइस-टू-बुक) जैसे वैल्यूएशन के प्रमुख मापदंडों में दिखता है. आमतौर पर, ऊंचा P/E और P/B रेशियो महंगे शेयरों का संकेत देता है, जबकि कम आंकड़े उचित मूल्य के शेयरों की ओर इशारा करते हैं.
नीचे दी गई टेबल डिफेंस फ़ंड के लिए इन रेशियो की तुलना निफ़्टी 500 जैसे डाइवर्सिफ़ाइड बेंचमार्क से करती है. हमने वैल्यू रिसर्च वैल्यूएशन स्कोर (10 में से) भी शामिल किया है, जो ये बताता है कि पोर्टफ़ोलियो कितना महंगा है. कम स्कोर ऊंचे वैल्यूएशन का संकेत देता है.
डिफेंस फ़ंड्स: ख़ासी ऊंची है वैल्यूएशन
| मेट्रिक | निफ़्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स | HDFC डिफेंस फ़ंड | निफ़्टी 500 |
|---|---|---|---|
| P/E | 52.3 | 48.5 | 24 |
| P/B | 12.5 | 7.9 | 3.8 |
| वैल्यूएशन स्कोर | 2 | 2.4 | 4.5 |
| डेटा 30 अप्रैल, 2025 का है. | |||
ये स्पष्ट है कि डिफेंस इंडेक्स और फ़ंड निफ़्टी 500 की तुलना में काफ़ी ज़्यादा वैल्यूएशन रेशियो और कम स्कोर दिखाते हैं, जो दर्शाता है कि उनके संबंधित स्टॉक ओवरवैल्यूड हैं. जब स्टॉक की क़ीमत इतनी ज़्यादा होती है, तो अनुमानित ग्रोथ का ज़्यादातर हिस्सा पहले से ही शामिल होता है, जो भविष्य के फ़ायदे की संभावना को सीमित कर सकता है.
आपको क्या करना चाहिए?
अगर आप वैल्यू रिसर्च के नियमित पाठक हैं, तो शायद आप जानते हैं कि हम आमतौर पर सेक्टोरल या थीमैटिक फ़ंड्स की वकालत नहीं करते और इसके पीछे ठोस कारण हैं. इनके ऊंचे कन्सट्रेशन के जोखिम को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है और डिफेंस फ़ंड्स इसका जीता-जागता उदाहरण हैं.
इसके अलावा, डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड्स की तुलना में ये फ़ंड्स कहीं ज़्यादा अस्थिर होते हैं. हाल की गिरावट को ही लीजिए: डिफेंस फ़ंड्स कुछ ही हफ्तों में 37 प्रतिशत लुढ़क गए, जबकि निफ़्टी 500 TRI में केवल 10 प्रतिशत की गिरावट आई. यहां तक कि कोविड क्राइसिस के दौरान के बैक-टेस्टेड डेटा भी दिखाते हैं कि निफ़्टी 500 TRI अपने पीक से 38 प्रतिशत गिरा था, लेकिन निफ़्टी इंडिया डिफेंस TRI 43 प्रतिशत तक लुढ़क गया था. बेशक, जब थीम सुर्खियों में होती है, तो ये फ़ंड्स शानदार रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन रैली खत्म होने पर इनकी गिरावट भी उतनी ही तेज़ हो सकती है.
यही वजह है कि हम फ़्लेक्सी-कैप या मल्टी-कैप जैसे डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड्स को तरजीह देते हैं. ये फ़ंड्स अपने निवेश को कई क्षेत्रों (डिफेंस सहित) में फैलाते हैं, जिससे जोखिम कम होता है और रिटर्न का सफर तुलनात्मक रूप से स्थिर रहता है. नीचे दी गई टेबल दिखाती है कि कुछ डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड्स में निफ़्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स के शीर्ष तीन शेयरों - हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर इंडस्ट्रीज़- की कितनी हिस्सेदारी है. ब्रेकेट में दिए गए आंकड़े बताते हैं कि कितने फ़ंड (उस कैटेगरी के कुल फ़ंड्स में से) इन शेयरों को रखते हैं.
दिग्गज डिफेंस कंपनियों में डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड्स का निवेश (%)
| कंपनी | फ़्लेक्सी-कैप | लार्ज एंड मिड-कैप | मल्टी-कैप | वैल्यू ओरिएंटेड |
|---|---|---|---|---|
| हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स | 1.95 - (17/79) | 1.56 - (10/31) | 0.57 - (2/31) | 1.6 - (3/24) |
| भारत इलेक्ट्रॉनिक्स | 2.07 - (28/79) | 1.86 - (17/31) | 1.02 - (12/31) | 1.69 - (11/24) |
| सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया | 2.14 - (12/79) | 1.03 - (9/31) | 1.7 - (8/31) | 1 - (1/24) |
| डेटा 30 अप्रैल, 2025 तक का है. ब्रेकेट में दिए गए आंकड़े प्रत्येक स्टॉक को होल्ड करने वाले कैटेगरी के फ़ंडों की संख्या दर्शाते हैं. | ||||
इसलिए, डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड्स डिफेंस शेयरों में बैलेंस्ड निवेश देते हैं और बाक़ी निवेश को अलग-अलग सेक्टर्स और मार्केट कैप में फैलाते हैं, जिससे आपको एक ही जगह निवेश के जोखिम से बचते हुए बैलेंस मिलता है.
और अगर आप फिर भी डिफेंस फ़ंड्स की सवारी करना चाहते हैं, तो अपने पोर्टफ़ोलियो में इनकी हिस्सेदारी को 5-10 प्रतिशत तक सीमित रखने पर विचार करें.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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