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राजीव ठक्कर कोई आम निवेशक नहीं हैं. PPFAS म्यूचुअल फ़ंड के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर के रूप में, उन्होंने स्पष्टता, दृढ़ विश्वास और सबसे बढ़कर बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित सोच के लिए अपनी पहचान बनाई है.
अगर उनके इंटरव्यू देखेंगे या उनके लेटर पढ़ेंगे, तो आप पाएंगे कि बाज़ार के शोर-शराबे में उनकी सोच कितनी नई और तर्कसंगत है. वो ट्रेंड्स के पीछे नहीं भागते, चर्चित सेक्टरों में कम निवेश करते हैं और ग्लोबल, वैल्यू-ओरिएंटेड स्ट्रैटजी पर टिके रहते हैं.
अगर उनकी निवेश रणनीति आपको बहुत 'अंकल-टाइप' लगती है, तो सुनिए: उनकी लीडरशिप में पराग पारिख फ़्लेक्सी कैप फ़ंड अपनी कैटेगरी में सबसे बड़ा बन गया है. इस फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड का प्रदर्शन उनकी सोच को सही साबित करता है: पिछले पांच साल में फ़ंड ने 27.3 प्रतिशत का सालाना रिटर्न दिया है, जो बेंचमार्क निफ़्टी 500 के 22.42 प्रतिशत से कहीं ज़्यादा है.
चाहे वो यूनिटहोल्डर्स को लेटर लिख रहे हों - अब तक आप समझ गए होंगे कि वो वॉरेन बफे के बड़े प्रशंसक हैं - या अपने पैसे का निवेश कर रहे हों, ठक्कर की सफलता उनके समय की कसौटी पर खरे सिद्धांतों में है:
- जटिलता की तुलना में सादगी
- भावनाओं की जगह अनुशासन
- बाज़ार में समय बिताना, न कि बाज़ार के बारे में अनुमान (टाइमिंग) लगाना.
तो जब हमें लाइवमिंट के जरिए पता चला कि वो कहां निवेश कर रहे हैं, तो इस पर ध्यान देना तो बनता है.
ठक्कर: बीते 18-24 महीनों में मेरा ज़्यादातर निवेश हाइब्रिड और आर्बिट्राज़ फ़ंड्स में रहा है
ठक्कर का डेट एलोकेशन काफ़ी बढ़ गया है, जो 2020 के 4-5 प्रतिशत से बढ़कर अब 12-13 प्रतिशत हो गया है.
क्यों? ठक्कर कहते हैं, “मैं 50 की उम्र में हूं, इसलिए मैंने हाइब्रिड (एक डायनामिक एसेट एलोकेशन फ़ंड) और आर्बिट्राज़ प्रोडक्ट्स में ज्यादा निवेश करके रीबैलेंसिंग शुरू की है.
सीख? राजीव ठक्कर का हाइब्रिड और आर्बिट्राज फ़ंड्स की ओर शिफ्ट करना रिटर्न के पीछे भागना नहीं है. ये जीवन की बदलती प्राथमिकताओं के साथ जोखिम का प्रबंधन करने की बात है.
जैसे-जैसे आप 50 के करीब या रिटायरमेंट के नजदीक पहुंचते हैं, इक्विटी से हटकर रीबैलेंस करना समझदारी है. क्यों? क्योंकि इक्विटी लंबे समय में तो शानदार होती है, लेकिन कम समय में अस्थिर हो सकती है. रिटायरमेंट से ठीक पहले बाज़ार में एक बुरा साल आपके दशकों के मुनाफ़े को बर्बाद कर सकता है.
असल में, हाइब्रिड फ़ंड्स में डेट होता है, वे झटकों को बेहतर तरीक़े से सहन करते हैं. ये तरीक़ा आपकी वैल्थ को सुरक्षित रखता है और उसे समझदारी से बढ़ने भी देता है.
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ठक्कर: स्मॉल और मिड-कैप में निवेश सिंगल डिजिट (4 प्रतिशत) में है. लार्ज-कैप में 60 प्रतिशत एक्सपोज़र
क्यों? ठक्कर कहते हैं, “स्मॉल और मिड-कैप सेगमेंट में वैल्यूएशन आमतौर पर लार्ज-कैप कंपनियों की तुलना में ज़्यादा है.” इसका मतलब है कि ज़्यादा जोखिम के साथ भविष्य में रिटर्न संभावित रूप से कम हो सकता है.
सीख? रिटायरमेंट के क़रीब, आपका पोर्टफ़ोलियो कम जोखिम वाला और ज़्यादा स्थिर होना चाहिए. स्मॉल और मिड-कैप फ़ंड्स में ज़्यादा निवेश आपकी रातों की नींद उड़ा सकता है, क्योंकि ये ज़्यादा अस्थिर और बाज़ार के उतार-चढ़ाव, खासकर गिरावट के दौरान, ज़्यादा संवेदनशील होते हैं.
इसलिए, लार्ज-कैप और डेट के साथ सुरक्षित, टिकाऊ विकल्पों की ओर बढ़ें, ताकि आपके रिटायरमेंट के साल शांतिपूर्ण हों.
ठक्कर: इंटरनेशनल इक्विटी में 10 प्रतिशत निवेश.
क्यों? वैश्विक निवेश का मतलब अगली ऐपल या टेस्ला खोजना नहीं है; ये एक मज़बूत पोर्टफ़ोलियो बनाने की बात है. जब आपका सारा निवेश एक इकोनॉमी, एक करेंसी या एक पॉलिसी रिज़ीम से बंधा हो, तो जोखिम बढ़ जाता है.
इसके अलावा, भारत में सेमीकंडक्टर, AI इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी अहम ग्लोबल थीम्स में लिस्टेड कंपनियां नहीं हैं. लेकिन अमेरिका के S&P 500 जैसे ग्लोबल इंडेक्स आपको एनवीडिया, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल (एल्फाबेट) जैसी इनोवेशन आधारित कंपनियों में निवेश का मौक़ा देते हैं.
और एक मजेदार बात: रुपये की वैल्यू दशकों से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले औसतन 2.7 प्रतिशत सालाना कम हुई है. इसका मतलब है कि आपको न सिर्फ़ इक्विटी रिटर्न, बल्कि करेंसी के फ़ायदे भी मिलते हैं.
सीख? वैल्यू रिसर्च में हम हमेशा ग्लोबल निवेश, ख़ासकर अमेरिकी इक्विटी में निवेश की सलाह देते हैं. शायद आप अपने पोर्टफ़ोलियो का 10 प्रतिशत वहां इन विकल्पों के जरिए निवेश कर सकते हैं.
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ठक्कर: मैं अपने टर्म प्लान (लाइफ़ इंश्योरेंस) के आखिरी तीन साल में हूं
क्यों? आपको जीवन बीमा सिर्फ़ तब तक चाहिए, जब तक कोई आपकी आमदनी पर निर्भर हो.
तो, अगर आप आज 35 साल के हैं और 60 या 65 की उम्र में रिटायर होने की योजना बना रहे हैं, तो अगले 25 से 30 साल तक का टर्म प्लान ठीक रहेगा.
तब तक आपके बच्चे शायद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाएंगे, आपका होम लोन खत्म हो जाएगा और आपका जीवनसाथी आपके रिटायरमेंट फ़ंड से सुरक्षित रहेगा.
संक्षेप में, लाइफ़ इंश्योरेंस को जारी रखने की वजह खत्म हो जाएगी.
सीख? पहली सीख ये है कि लाइफ़ इंश्योरेंस ख़रीदने के लिए टर्म प्लान चुनें. टर्म इंश्योरेंस सबसे प्योर, सस्ता और सबसे अच्छा लाइफ़ इंश्योरेंस है. अपने लाइफ़ कवरेज के लिए इन्हीं को चुनें.
दूसरी सीख ये है कि अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो अपने टर्म प्लान को अपने अनुमानित रिटायरमेंट, यानी आमतौर पर 60 या 65 साल की उम्र के साथ जोड़ें. अगर आप सेल्फ-इम्प्लॉयड हैं या देर से वित्तीय जिम्मेदारियां (जैसे माता-पिता या छोटा बच्चा) हैं, तो आप इसे 70 तक बढ़ा सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब वाकई जरूरी हो.
आखिरी बात
ठक्कर का निजी पोर्टफ़ोलियो हमें अच्छे सबक़ देता है:
- रिटायरमेंट के क़रीब इक्विटी से हाइब्रिड फ़ंड्स की ओर रीबैलेंस करें
- मज़बूती और डाइवर्सिफ़िकेशन के लिए वैश्विक निवेश करें
- इंश्योरेंस को सरल और केवल ज़रूरत के समय तक रखें
ऐसी दुनिया में जहां लोग ज़्यादा रिटर्न के पीछे भागते हैं, ठक्कर दिखाते हैं कि मानसिक शांति शायद सबसे बेहतरीन निवेश है. और, ये उनके लिए बहुत अच्छा काम कर रहा है, क्योंकि उनका निजी पोर्टफ़ोलियो पिछले पांच सालों में सालाना 29 प्रतिशत बढ़ा है.
इसी तरह, अगर आप एक मज़बूत, लंबी अवधि का पोर्टफ़ोलियो बनाना चाहते हैं, तो हम सुझाव देते हैं कि आप वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र पर जाएं. वहां आपको न सिर्फ़ रेकमंडेड फ़ंड्स की हमारी लिस्ट मिलेगी, बल्कि आप ये भी जान सकते हैं कि आपकी ज़रूरतों के हिसाब से कौन से फ़ंड आपके लिए सबसे अच्छे हैं.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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