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10 शानदार शेयर जो पैट डोर्सी के प्रॉफ़िटेबिलिटी टेस्ट पर ख़रे उतरते हैं

ये स्टॉक्स डोर्सी के लगातार मज़बूत ROE हासिल करने और कैश फ़्लो जैसे प्रॉफ़िटेबिलिटी के मीट्रिक्स के आधार पर चुने गए हैं

ये स्टॉक्स डोर्सी के लगातार मज़बूत ROE हासिल करने और कैश फ़्लो जैसे प्रॉफ़िटेबिलिटी के मीट्रिक्स के आधार पर चुने गए हैंAI-generated image

कामयाब निवेशक पैट डोर्सी का मानना था कि प्रॉफ़िटेबल कंपनियां वो होती हैं जो न केवल ऊंचे रिटर्न दें, बल्कि समय के साथ उनकी रिटर्न देने की क्षमता बनी रहती है. उनके अनुसार, ऐसी बेहतरीन कंपनियों को पहचानने के लिए दो मीट्रिक्स हैं - लगातार ऊंचा रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और हर साल मज़बूत फ़्री कैश फ़्लो.

इस फ़्रेमवर्क के आधार पर, हमने ऐसी कंपनियों की जांच की जिन्होंने पिछले 10 सालों में हर साल 15 प्रतिशत से ज़्यादा ROE और 5 प्रतिशत से ज़्यादा फ़्री कैश फ्लो-टू-रेवेन्यू दिया हो. ये लगातार मुनाफ़ा कमाने और परिचालन संबंधी अनुशासन के संकेत हैं. इस जांच से हमें 27 नाम मिले. इनमें से, हमने मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर टॉप 10 कंपनियों को अपनी टेबल शामिल किया है.

कंपनी मीडियन ROE (%) मीडियन FCF / रेवेन्यू (%)
TCS 39.3 18
इंफ़ोसिस 25.8 15
हिंदुस्तान यूनिलीवर 71.4 14
ITC 25.9 21
HCL टेक्नोलॉजीज 23.8 14
नेस्ले इंडिया 58.0 15
बजाज ऑटो 22.9 12
हिंदुस्तान जिंक 24.5 33
LTI माइंडट्री 34.0 13
मैरिको 37.6 12
फ़ाइनेंशियल्स FY15-24 के हैं
FCF यानी फ़्री कैश फ़्लो
कंपनी स्टॉक रेटिंग क्वालिटी स्कोर ग्रोथ स्कोर वैल्यूएशन स्कोर मोमेंटम स्कोर
TCS 4 10 6 5 1
इंफ़ोसिस 4 10 7 5 3
हिंदुस्तान यूनिलीवर 4 10 7 4 4
ITC 3 10 6 4 2
HCL टेक्नोलॉजीज 5 10 7 5 6
नेस्ले इंडिया 3 10 2 3 6
बजाज ऑटो 3 10 7 3 1
हिंदुस्तान जिंक 3 9 6 4 2
LTI माइंडट्री 4 10 6 5 2
मैरिको 5 10 6 3 9
डेटा 20 मई 2025 का है

यहां हम हिंदुस्तान जिंक और मैरिको पर क़रीब से नज़र डाल रहे हैं. ये दोनों ऐसी कंपनियां जिन्होंने अपने अनूठे तरीक़ों से प्रॉफ़िटेबिलिटी के मीट्रिक्स पर शानदार प्रदर्शन किया है

हिंदुस्तान जिंक

1966 में एक पब्लिक सेक्टर की कंपनी के रूप में स्थापित और अब वेदांता द्वारा संचालित हिंदुस्तान जिंक दुनिया की सबसे बड़ी जिंक उत्पादक कंपनी है और शायद सबसे प्रॉफ़िटेबल भी है. पिछले एक दशक से लगातार 20 प्रतिशत से ज़्यादा ROE और 10 प्रतिशत से ज़्यादा फ़्री कैश फ़्लो-टू-रेवेन्यू के साथ, ये कंपनी कमोडिटी बिज़नस में अपनी पूंजी दक्षता के लिहाज़ से अलग नज़र आती है.

इसकी प्रोडक्शन कॉस्ट औसत प्राप्ति से 62 प्रतिशत कम है, जिससे इसे भारी मार्जिन बफ़र मिलता है और 25 प्रतिशत से ज़्यादा नेट प्रॉफ़िट मार्जिन से ROE को बूस्ट मिलता है. भारत की सबसे बड़ी जिंक माइनर के रूप में, घरेलू बाज़ार में हिंदुस्तान जिंक की 77 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सेदारी है. कुल मिलाकर, घरेलू बाज़ार में कंपनी का एकाधिकार है. राजस्थान में इसकी प्रमुख रैंपुरा अगुचा खदान दुनिया की सबसे बड़ी जिंक खदान है, जो लंबी अवधि तक संसाधनों के बने रहने और कमाई की स्थिरता पुष्टि करती है.

खनन के अलावा, हिंदुस्तान जिंक के पास पूरी वैल्यू चेन है, जिनमें जिंक खनन और गलन (smelting) से लेकर चांदी जैसे अन्य धातुओं को निकालने और रिन्युएबल एनर्जी सहित इन-हाउस बिजली उत्पादन शामिल हैं. इस एकीकरण से परिचालन लागत को कम और मार्जिन को स्थिर रखने में मदद मिलती है. कंपनी ने हाल में चार सालों में अपनी सबसे कम उत्पादन लागत $1,052 प्रति टन हासिल की है. मांग भी मज़बूत रहने की उम्मीद है. जिंक का मुख्य रूप से स्टील को गैल्वनाइज करने में इस्तेमाल होता है, जो बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास से गहराई से जुड़ा है. भारत की ग्रोथ जारी रहने के साथ, घरेलू मांग मज़बूत बनी रहने की उम्मीद है.

हालांकि, जोखिम बने रहते हैं. एकल कमोडिटी बिज़नस होने के नाते, कंपनी जिंक के वैश्विक प्राइस साइकल्स के प्रति संवेदनशील है. साथ ही, रिइन्वेस्टमेंट के सीमित अवसरों के साथ, इसकी आक्रामक डिविडेंड पॉलिसी कैपिटल एलोकेशन और लंबे समय की ग्रोथ की दिशा को लेकर चिंता पैदा करती है. इन चिंताओं के कारण, शेयर 18 गुने के मामूली P/E पर ट्रेड करता है. फिर भी, अपने आकार और स्ट्रक्चर कॉस्ट के मामले में बढ़त के साथ, हिंदुस्तान जिंक एक दुर्लभ कमोडिटी बिज़नस है जो आसानी से पैट डोर्सी के प्रॉफ़िटेबिलिटी के फ़िल्टर में फिट बैठती है.

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मैरिको

मैरिको भारत के FMCG सेक्टर में न केवल अपने पैराशूट, सफोला और बियर्डो जैसे मज़बूत ब्रांड्स के लिए, बल्कि अपने अनुशासित एग्जीक्यूशन और असाधारण पूंजी दक्षता के लिए भी अलग नज़र आती है. कंपनी ने पिछले एक दशक से लगातार 30 प्रतिशत से अधिक रिटर्न ऑन इक्विटी दिया है और 5 प्रतिशत से ज़्यादा फ़्री कैश फ्लो-टू-रेवेन्यू रेशियो बनाए रखा है.

ज़्यादातर मैन्युफैक्चरिंग को आउटसोर्स करने, कम वर्किंग कैपिटल और सीमित फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ, मैरिको ने एक ऐसा बिज़नस बनाया है जो भारी पूंजी को लगाए बिना प्रॉफ़िट कमाते हुए आगे बढ़ती है. आक्रामक तौर पर डाइवर्सिफ़िकेशन का पीछा करने के बजाय, मैरिको ने अपनी पैठ गहरी करने (भारत में नारियल तेल में 63 प्रतिशत बाज़ार हिस्सेदारी) और मुख्य कैटेगरीज में मार्जिन बचाने पर ध्यान केंद्रित किया है. इससे मज़बूत परिचालन लाभ और अच्छे मार्जिन हासिल किए हैं.

अहम बात ये है कि मैरिको ने अपने पोर्टफ़ोलियो को प्रीमियम बनाकर नेट प्रॉफ़िट मार्जिन को FY15 के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर FY24 में 15 प्रतिशत तक सुधारा है. पैराशूट और सफोला जैसे स्टेपल्स के अलावा, ये पुरुष ग्रूमिंग, हैल्थ फूड्स और डिजिटल-फर्स्ट पर्सनल केयर ब्रांड जैसे ऊंचे मार्जिन वाले क्षेत्रों में विस्तार कर रही है. मिसाल के तौर पर, उसका फूड पोर्टफ़ोलियो FY20 के बाद से पांच गुना बढ़ा है और अब ये कुल रेवेन्यू में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान देता है. प्रबंधन को उम्मीद है कि ये सेगमेंट FY27 तक 25 प्रतिशत से ज़्यादा की सालाना ग्रोथ दर्ज करेगा, जिससे कुल मार्जिन प्रोफ़ाइल बेहतर होगा.

हालांकि, कंपनी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और क़ीमतों के लिहाज़ से संवेदनशील कैटेगरीज़ में काम करती है, जहां ग्रामीण मांग और कच्चे माल की लागत जल्दी से समीकरण को बदल सकती है. इसके साथ ही, इसका वर्तमान P/E 57 गुना है, जो इसके पांच साल के औसत से 8 प्रतिशत प्रीमियम पर है, जिसके लिए सावधानी बरतनी चाहिए.

फिर भी, मुनाफ़े और पूंजी अनुशासन पर कंपनी का एक दशक का शानदार प्रदर्शन इसे पैट डोर्सी स्टाइल की क्वालिटी स्क्रीन में मज़बूती से स्थान दिलाता है.

आखिरी बात

ये स्क्रीन उन कंपनियों को सामने लाती है जिन्होंने एक दशक से लगातार मज़बूत शेयरहोल्डर वैल्यू और दमदार कैश फ़्लो बनाए रखा है, जो बेहतर बिज़नस क्वालिटी और पूंजी अनुशासन के संकेत हैं. हालांकि, ये याद रखना अहम है कि ये स्क्रीन एक शुरुआती बिंदु है, न कि निवेश की रिकमंडेशन. निवेशकों को कोई भी फैसला करने से पहले हर कंपनी की ग्रोथ की वजहों, जोखिमों और वैल्यूएशन के बारे में गहराई से जांच करनी चाहिए. क्वालिटी और भरोसे के साथ गहराई के साथ रिसर्च किए गए स्टॉक्स आइडियाज तक पहुंचने के लिए, वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र पर सावधानीपूर्वक जांचे गए स्टॉक रिकमंडेशन पर दांव लगाएं.

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