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11 शेयर जो वॉरेन बफ़ेट की कैपिटल इफ़िशिएंसी टेस्ट पर खरे उतरते हैं

ये ऐसी कंपनियां हैं जो बफ़ेट के लंबे समय में कैपिटल-एफ़िशिएंट ग्रोथ हासिल करने में सक्षम हैं

ये ऐसी कंपनियां हैं जो बफ़ेट के लंबे समय में कैपिटल-एफ़िशिएंट ग्रोथ हासिल करने में सक्षम हैंAI-generated image

वॉरेन बफ़ेट लंबे समय से उन बिज़नसेज की ताकत का समर्थन करते रहे हैं जो ऊंचे और लगातार इक्विटी पर रिटर्न (ROE) हासिल करते हैं, जो पूंजी से संबंधित मज़बूत अनुशासन का प्रदर्शन करते हैं. बफ़ेट के लिए, गैर ज़रूरी क़र्ज़ के बिना पूंजी का कुशलतापूर्वक इस्तेमाल करने की कंपनी की क्षमता इसकी लंबे समय की संभावनाओं का एक प्रमुख संकेतक है. इसलिए, हमने ऐसी कंपनियों को खोजने की कोशिश की जो इस मानदंड को पूरा करती हों.

हमने तीन फ़िल्टर का इस्तेमाल किया:

  • 10 साल का औसत ROE 20 फ़ीसदी से ज़्यादा
  • पिछले एक दशक में हर साल कम से कम 15 फ़ीसदी ROE रहा हो
  • FY19-24 के दौरान प्रति शेयर सालाना कमाई (EPS) में 20 फ़ीसदी से ज़्यादा की ग्रोथ रही हो

लगातार रिटर्न और कमाई का ये संयोजन सुनिश्चित करता है कि हम शॉर्ट टर्म में प्रदर्शन करने वालों को हटा दें और लंबे समय की संभावनाओं वाली ऐसी कंपनियों को खोजें जो साल-दर-साल आंतरिक वैल्यू का निर्माण करती हों. इस लिस्ट में 15 शेयरों ने जगह बनाई. हमने टेबल में उन 11 शेयरों को लिस्ट किया है जिन्हें हमारी स्टॉक रेटिंग में चार/पांच-स्टार रेटिंग मिली है.

कंपनी 10 साल का औसत ROE 5-साल की डायल्यूटेड EPS ग्रोथ (% सालाना) स्टॉक रेटिंग
ICICI सिक्योरिटीज़ 65.1 27.9% 5
फाइन ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज़ 30.2 24.8% 5
SBI कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज़ 26.5 21.8% 5
एबट इंडिया 27.5 21.7% 5
शेयर इंडिया सिक्योरिटीज़ 32.6 69.4% 4
मैनकाइंड फार्मा 24.9 27.0% 4
सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया 24.6 26.2% 4
IIFL कैपिटल सर्विसेज 30.8 25.0% 4
कोवई मेडिकल सेंटर एंड हॉस्पिटल 22.9 24.5% 4
कंप्यूटर एज मैनेजमेंट सर्विसेज 36.7 21.0% 4
कैप्लिन पॉइंट लेबोरेटरीज 36.7 20.9% 4

नीचे हमारी लिस्ट में शामिल दो बेहतरीन कंपनियों के बारे में संक्षिप्त एनालिसिस दिया गया है, जो हैं- कोवई मेडिकल सेंटर एंड हॉस्पिटल और मैनकाइंड फार्मा .

कोवई मेडिकल सेंटर एंड हॉस्पिटल

कोयंबटूर में स्थित कोवई मेडिकल सेंटर, दक्षिण भारत की अग्रणी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल चेन्स में से एक है. वर्षों से, इसने ऑन्कोलॉजी और कार्डियोलॉजी जैसी हाई-वैल्यू (महंगी) स्पेशिलिटीज़ में रणनीतिक रूप से विस्तार किया है, जिनकी न केवल मांग ज़्यादा है बल्कि ऊंची क़ीमतें वसूलने की क्षमता भी है. ऊंचे मार्जिन वाली सेवाओं पर जोर से लगातार प्रॉफ़िटेबिलिटी बनी रह सकती है.

पिछले एक दशक में कोवई के 22.9 फ़ीसदी ROE से इसके कैपिटल एलोकेशन और परिचालन दक्षता में अनुशासित नज़रिये का पता चलता है. बाहरी डॉक्टरों पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहने वाले कई अन्य अस्पतालों के विपरीत, कोवई अपने मेडिकल कॉलेज से भर्ती किए गए विशेषज्ञों की एक मुख्य टीम के साथ एक सुव्यवस्थित, ज़्यादा कुशल मॉडल अपनाता है. इससे महंगे बाहरी कंसल्टैंट्स पर निर्भरता कम होती है, जिससे लगातार मार्जिन को समर्थन मिलता रहता है.

इसके मेडिकल कॉलेज ने FY24 के शुरुआती नौ महीनों में ₹63 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया, जो कुल रेवेन्यू का लगभग 7 से 8 फ़ीसदी है. शिक्षा क्षेत्र को भी ऊंचे मार्जिन और कम साइक्लिकलिटी से फ़ायदा होता है, जिससे कमाई की क्वालिटी को और समर्थन मिलता है. न्यूनतम क़र्ज़ के साथ साफ़-सुथरी बैलेंस शीट कंपनी की एक और ख़ासियत है. FY24 में ₹61 करोड़ का पूंजीगत ख़र्च पूरी तरह से आंतरिक स्रोतों से वित्त पोषित किया गया था.

लेकिन, इन ताकतों के बावजूद, कोवई का रीजनल फोकस इसकी ग्रोथ की क्षमता को सीमित करता है. कंपनी मुख्य रूप से कोयंबटूर में केंद्रित है और भले ही, इसकी स्थानीय बाज़ार हिस्सेदारी मजबूत है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार में कमी एक प्रमुख चिंता बनी हुई है. स्थानीय रेगुलेटर से जुड़े बदलाव या बाज़ार में तमाम कंपनियों की भीड़ जैसे क्षेत्रीय जोखिम इसकी लंबे समय की ग्रोथ की संभावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं. इसे ध्यान में रखते हुए, कंपनी का मौजूदा 29 गुने का P/E सावधानी बरतने की मांग करता है, जो इसके पांच साल के 19 गुने के औसत से काफ़ी ज़्यादा है.

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मैनकाइंड फार्मा

मैनकाइंड फार्मा घरेलू बाज़ार में सबसे कुशलतापूर्वक संचालित कंपनियों में से एक है. अपने कई प्रतिस्पर्धियों के विपरीत, मैनकाइंड ने मुख्य रूप से भारत के कम भीड़ वाले ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाज़ारों पर ध्यान केंद्रित किया है, जहां इसने ब्रांडेड जेनेरिक्स और कंज्यूमर हैल्थकेयर में अच्छी पैठ बनाई है.

मैनकाइंड की रणनीति इसके डिस्ट्रीब्यूशन आधारित मॉडल में निहित है, जिसे डॉक्टरों की बड़ी भागीदारी और मास मार्केट का समर्थन हासिल है. इस नज़रिये ने कंपनी को लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी किए बिना तेज़ी से विस्तार करने की अनुमति दी है. बढ़ते वॉल्यूम से परिचालन संंबंधी बढ़त और अनुशासित कॉस्ट कंट्रोल से अच्छा प्रॉफ़िट संभव हुआ है, जिसमें FY19-24 के दौरान इसकी प्रति शेयर कमाई 27 फ़ीसदी की दर से बढ़ी है.

कंपनी कार्डियक और डायबिटीज जैसे पुरानी बीमारियों पर भी ध्यान देती है, जो लंबे समय तक मांग वाले क्षेत्र हैं. इस बीच, इसका कंज्यूमर हैल्थकेयर बिज़नस, जिसमें मैनफोर्स, प्रेगा न्यूज और गैस-ओ-फास्ट जैसे प्रसिद्ध ब्रांड शामिल हैं, डाइवर्सिफ़िकेशन और प्राइसिंग की क्षमता जोड़ता है. इससे इसके मार्जिन प्रोफ़ाइल को और मज़बूती मिलती है.

IPO के बाद, मैनकाइंड ने अपने क़र्ज़ को काफी हद तक कम कर लिया है, जिससे इसकी बैलेंस शीट मजबूत हुई और भविष्य ग्रोथ की राह तैयार हुई है. भले ही, इसका ध्यान मुख्य रूप से घरेलू बाज़ार पर रहा है, लेकिन ये अब एक्सपोर्ट के लिए ख़ास तौर पर ऊंचे मार्जिन वाले चुनिंदा मौक़ों की तलाश कर रही है, जिससे कंपनी ग्रोथ के अगले चरण में प्रवेश कर सकती है.

हालांकि, मैनकाइंड को जोखिमों का सामना करना पड़ता है. भारतीय बाज़ार पर इसकी अत्यधिक निर्भरता इसे संभावित रूप से प्राइस कंट्रोल और मेडिकल मार्केटिंग नॉर्म्स जैसे घरेलू रेगुलेटर से जुड़े बदलावों के प्रति संवेदनशील बनाती है. इसके अलावा, इसका कम R&D ख़र्च वैश्विक बाज़ारों को लक्षित करने के लिए एक ख़ास पाइपलाइन बनाने की इसकी क्षमता को सीमित कर सकता है. इन जोखिमों को देखते हुए, कंपनी का 51 गुने का मौजूदा वैल्यूएशन बेहद ज़्यादा लगता है.

ये भी जान लीजिए

ऊपर बताए गए फ़िल्टर आपको ऐसी कंपनियों को पहचानने में मदद कर सकते हैं जो लगातार ऊंचा ROE प्रदान करती हैं और अनुशासित कैपिटल एलोकेशन का प्रदर्शन करती हैं, जो बफ़ेट की निवेश फ़िलॉसफ़ी की ख़ास क्वालिटी है. ये बिज़नस विभिन्न मार्केट साइकल्स में टिकाऊ प्रदर्शन करने की अपनी क्षमता के लिहाज़ से अहम हैं, जो उन्हें और ध्यान देने लायक बनाता है. हालांकि, ये हमारी रिकमंडेशन नहीं हैं. ये याद रखना अहम है कि स्टॉक स्क्रीन या फ़िल्टर केवल एक शुरुआती बिंदु हैं, अंतिम फैसला नहीं. किसी भी निवेश को करने से पहले प्रत्येक कंपनी के बिज़न मॉडल, वित्तीय सेहत और ग्रोथ की संभावनाओं की गहरी समझ ज़रूरी है.

हमारी सावधानी के साथ रिसर्च की गई स्टॉक रिकमंडेशन के लिए, आप वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र पर ग़ौर कर सकते हैं.

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