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पराग पारिख फ़ाइनेंशियल एडवाइज़री सर्विसेज (जिसे आमतौर पर PPFAS कहा जाता है) ने चुपके से एक कम चर्चित स्मॉल-कैप स्टॉक में हिस्सेदारी बढ़ाई है. ये कंपनी भारत के सबसे बड़े एग्जिबिशन स्थलों में से एक की मालिक है और मुंबई के तेज़ी से बढ़ते रियल एस्टेट क्षेत्र से स्थिर किराये के तौर पर कमाई करती है. ये कंपनी पूरी तरह क़र्ज़ मुक्त है (जो दुर्लभ है) और लगातार कैश फ़्लो जेनरेट करती है. तो, ये कौन सा स्मॉल-कैप स्टॉक है, जिस पर PPFAS दांव लगा रहा है और क्या कोई दूसरा फ़ंड हाउस भी वही देख रहा है जो PPFAS को नज़र आ रहा है?
जब पराग पारिख म्यूचुअल फ़ंड कोई कदम उठाता है, तो अनुभवी निवेशक गौर करते हैं-इसलिए नहीं, क्योंकि ये चमक-दमक वाला है, बल्कि इसलिए कि ये शायद ही कभी भीड़ के पीछे भागता है. पिछले दो महीनों, मई और जून में, इस प्रतिष्ठित फ़ंड हाउस ने चुपके से नेस्को में हिस्सेदारी बढ़ाई है, जो एक कम चर्चित स्मॉल-कैप कंपनी है और रियल एस्टेट, एग्जिबिशंस और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करती है.
दर्जनों संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने वाले अन्य चर्चित स्टॉक्स के उलट, नेस्को अब तक ज़्यादातर की नज़रों से दूर रहा है. लेकिन हाल के पोर्टफ़ोलियो डिस्क्लोजर्स के अनुसार, ये अब न केवल एक, बल्कि पराग पारिख की 3 स्कीम्स में शामिल है. इसमें डायनामिक एसेट एलोकेशन फ़ंड भी शामिल है, जहां इसकी हिस्सेदारी 1.18 प्रतिशत है- जो ₹26.5 करोड़ के निवेश के बराबर है. साथ ही फ़्लेक्सी-कैप और टैक्स-सेविंग फ़ंड में भी इसकी छोटी हिस्सेदारी है.
नेस्को में पराग पारिख के 3 फ़ंड्स का एक्सपोजर है
| फ़ंड | नेट एसेट का % | निवेश की गई रक़म (करोड़ ₹) |
|---|---|---|
| पराग पारिख डायनामिक एलोकेशन | 1.18 | 26.5 |
| पराग पारिख फ़्लेक्सी कैप | 0.02 | 17.67 |
| पराग पारिख ELSS टैक्स सेवर | 0.03 | 1.75 |
दिलचस्प बात ये है कि बहुत कम फ़ंड हाउस ने अपने पोर्टफ़ोलियो में नेस्को को शामिल किया है. कुछ एक्टिव फ़ंड्स में UTI स्मॉल कैप फ़ंड (₹60 करोड़ का निवेश; 1.23 प्रतिशत हिस्सेदारी), ICICI प्रूडेंशियल स्मॉलकैप फ़ंड (0.41 प्रतिशत) और व्हाइटओक कैपिटल मल्टी कैप फ़ंड (₹3.53 करोड़ का मामूली निवेश) शामिल हैं. ये एक छोटा समूह है-जो पराग पारिख की स्थिति को और भी दिलचस्प बनाता है.
तो, नेस्को करती क्या है?
1930 के दशक में स्थापित नेस्को भले ही एक जाना-माना नाम न हो, लेकिन ये कई तरह के बिज़नस चलाती है.
मुंबई बेस्ड ये कंपनी रियल एस्टेट, एग्जिबिशन, इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में ऑपरेट करती है. इसे बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर (BEC) के लिए जाना जाता है, जो भारत के सबसे बड़े एग्जिबिशन स्थलों में से एक है और मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में स्थित है. BEC व्यापार मेलों, सम्मेलनों और बड़े आयोजनों की मेजबानी करता है, जिससे नेस्को को पर्याप्त आय मिलती है.
कंपनी अपने IT पार्क डिवीजन के तहत कमर्शियल ऑफिस स्पेस भी किराए पर देती है, जिसमें कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां किरायेदार हैं. ये रियल एस्टेट इकाई लगातार किराये की इनकम और तुलनात्मक रूप से कम पूंजीगत ख़र्च से लाभ उठाती है.
रियल एस्टेट के अलावा, नेस्को का इंडस्ट्रियल कैपिटल गुड्स और हॉस्पिटैलिटी स्पेस में भी पुराना बिज़नस है.
कम चर्चा के बावजूद, कंपनी लंबे समय से कर्ज-मुक्त स्थिति में है और कैश फ़्लो भी मज़बूत बना हुआ है.
ऐसे फ़ंड हाउस के लिए जो अपनी सब्र वाली और लंबी अवधि की निवेश स्टाइल के लिए जाना जाता है, नेस्को सही विकल्प लगता है. टिकाऊ कैश फ़्लो, कम वैल्यूएशन वाली एसेट्स और सीमित इंस्टीट्यूशनल ओनरशिप कंपनी की अहम ख़ासियतें हैं.
बेशक, ये खरीदने की रेकमंडेशन नहीं है. लेकिन इससे हर सोच-समझकर निवेश करने वाले निवेशक के लिए एक सवाल उठता है. असल में, जब पराग पारिख चुपके से कुछ ख़रीदती है, तो क्या आपको इस पर और ध्यान देना चाहिए?
क्या नेस्को हमारे रेकमंडेड स्टॉक्स में से एक है?
बात सिर्फ़ ये नहीं कि कौन ख़रीद रहा है-बल्कि ये है कि क्या आपको भी ख़रीदना चाहिए. वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र में, हम 50 से ज़्यादा मज़बूत भरोसे वाली स्टॉक रेकमंडेशन को ट्रैक करते हैं, जो गहरी रिसर्च और लंबी अवधि की सोच पर आधारित हैं.
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