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50% स्मॉल-कैप फ़ंड्स ने बीते 12 महीनों में निवेशकों का पैसा डुबाया?

चलिए, अब असल तस्वीर पर ग़ौर करते हैं

चलिए, अब असल तस्वीर पर ग़ौर करते हैंAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः स्मॉल-कैप म्यूचुअल फ़ंड्स लंबे समय में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं, पर बीते एक साल में आधे फ़ंड्स ने नुक़सान दिया है. कुछ टॉप रेटेड और पॉपुलर स्कीम भी इस दौरान नुक़सान में चली गईं. ये जानना ज़रूरी है कि कहीं इनमें निवेश तो नहीं किया गया है...

बीते कुछ सालों में स्मॉल-कैप म्यूचुअल फ़ंड्स रिटेल निवेशकों के पसंदीदा बन गए हैं. इनकी लॉन्ग-टर्म परफ़ॉर्मेंस काग़ज़ पर काफ़ी असरदार दिखाई देती है और इसका कारण भी वाजिब है. आज के पांच सबसे पॉपुलर स्मॉल-कैप फ़ंड्स मिलकर क़रीब ₹200 करोड़ की एसेट का मैनेजमेंट कर रहे हैं. पिछली कमाई और निवेशकों के जोश ने इन फ़ंड्स को रफ़्तार दी है.

लेकिन अब जो हक़ीक़त सामने है, वो सोचने पर मजबूर करती है: एक्टिव स्मॉल-कैप फ़ंड्स में से आधे ने पिछले 12 महीनों (5 अगस्त 2025 तक) में नेगेटिव रिटर्न दिए हैं.

लंबे समय का सपना

पिछले 10 सालों में स्मॉल-कैप फ़ंड्स ने निवेशकों की वैल्थ बढ़ाई है. इस कैटेगरी ने पांच सालों में औसतन 30.96% सालाना रिटर्न दिया है और दस सालों में 16.18% सालाना रिटर्न दिया है.

SIP के ज़रिए किया गया निवेश और भी ज़्यादा फ़ायदे का साब़ित हुआ है. 10 साल का SIP ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाले 12 स्मॉल-कैप फ़ंड्स में एक एवरेज फ़ंड ने भी 20% सालाना SIP रिटर्न दिया है. यानी,अगर किसी ने पिछले 10 सालों में ₹10,000 की मंथली SIP की होती, तो आज वो क़रीब ₹34 लाख बन गए होते. ऐसे आंकड़े अपने आप निवेशकों को इन फ़ंड्स की ओर खींचती हैं.

लेकिन जहां लॉन्ग-टर्म आंकड़े एक उम्मीद दिखाते हैं, वहीं शॉर्ट-टर्म रिटर्न बिल्कुल उलटी तस्वीर पेश करते हैं.

हाल की सच्चाई

पिछले एक साल में ही 28 एक्टिव स्मॉल-कैप फ़ंड्स में से 14 फ़ंड्स घाटे में रहे हैं. यानी, इनमें से आधे फ़ंड्स ने निवेशकों को नुक़सान पहुंचाया है.

यहां तक कि कुछ भरोसेमंद और हाई-रेटेड फ़ंड्स भी फिसल गए.

  • Franklin India Smaller Companies Fund जिसे वैल्यू रिसर्च ने 4 स्टार रेटिंग दी है वो 6% से ज़्यादा गिर चुका है.
  • HSBC Small Cap Fund जैसा 3 स्टार रेटिंग वाला फ़ंड भी 4% से ज़्यादा गिर चुका है.
  • कैटेगरी का सबसे बड़ा नाम 5 स्टार रेटिंग वाला फ़ंड Nippon India Small Cap Fund भी बीते 12 महीनों में 4% से ज़्यादा नीचे आ चुका है.
  • AUM के हिसाब से तीसरे और चौथे नंबर के फ़ंड SBI Small Cap और Quant Small Cap भी 5% से ज़्यादा गिरे हैं.

कुछ ही फ़ंड्स ने पॉज़िटिव रिटर्न दिए हैं. Motilal Oswal Small Cap Fund 10% से ज़्यादा रिटर्न के साथ सबसे आगे है. उसके बाद PGIM और Invesco India आते हैं, जिन्होंने क्रमशः 6.9% और 6.8% के रिटर्न दिया है. लेकिन कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म प्रदर्शन फीका ही रहा है. 

ऐसा क्यों होता है?

स्मॉल-कैप फ़ंड्स किसी रोलरकोस्टर से कम नहीं हैं. कई महीनों तक ये बिल्कुल भी मूव नहीं करते फिर अचानक कुछ महीनों में ज़बरदस्त छलांग लगाते हैं.

यहां तक कि टॉप परफ़ॉर्मर फ़ंड्स ने भी 1 से 3 साल तक ऐसे दौर से गुज़रे हैं जहां निवेशकों को कुछ भी रिटर्न नहीं मिला और कभी-कभी तो नेगेटिव भी रहा. जैसे Nippon India Small Cap जो पिछले 10 सालों में सबसे बड़ा वेल्थ क्रिएटर रहा है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब लगातार तीन सालों तक इसका रिटर्न ज़ीरो रहा. DSP और Franklin India जैसे टॉप फ़ंड्स ने भी ऐसी ही स्लो ग्रोथ झेली है.

और यहीं पर ज़्यादातर निवेशक ग़लती कर बैठते हैं.

तेज़ रिटर्न की उम्मीद

बहुत से निवेशक ये सोचते हैं कि स्मॉल-कैप फ़ंड्स से सालाना रेगुलर रिटर्न मिलेगा, असल में वो ये नहीं समझते कि स्मॉल-कैप फ़ंड्स के रिटर्न कभी भी एक जैसे नहीं होते. ये किसी फ़िक्स EMI की तरह हर साल नहीं आते. इनके रिटर्न में भारी उतार-चढ़ाव होता है. कुछ बेहतरीन साल बाक़ी सभी औसत या कमज़ोर दौर की भरपाई कर देते हैं.

अगर आपने सिर्फ़ एक साल के नज़रिए से निवेश किया है, तो नाराज़गी लाज़मी है. इससे भी बुरा ये है कि ज़्यादातर लोग ऐसे समय में घबराकर निवेश निकाल लेते हैं, यही सबसे बड़ी भूल होती है जिससे उन्हें बड़ा नुक़सान झेलना पड़ता है. 

तो अब क्या करें?

वैल्यू रिसर्च हमेशा यही मानता है कि स्मॉल-कैप फ़ंड्स में धैर्य ज़रूरी है. ये शॉर्ट-टर्म गेम नहीं है. अगर निवेश करना है, तो कम से कम 7 से 10 साल का नज़रिया रखें और SIP के ज़रिए निवेश करें ताक़ि, उतार-चढ़ाव से बचा जा सके.

तो कौन से स्मॉल-कैप फ़ंड्स में निवेश किया जाए?

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