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क्या आपको 'टॉप-परफ़ॉर्मिंग' म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करना चाहिए?

ऐसे फ़ंड में क्यों निवेश नहीं करना चाहिए, इसकी 5 वजह जानिए

टॉप-परफ़ॉर्मिंग म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करना ज़रूरी नहीं हैAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः ये सोचना कितना आकर्षक लगता है कि सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला फ़ंड आपके पास होना चाहिए. लेकिन निवेश में, सबसे चमक़दार ट्रॉफ़ी के पीछे सबसे नुकीले कांटे छिपे हो सकते हैं. “सुरक्षित” फ़ंड्स के जोखिम से लेकर टॉप फ़ंड्स के पीछे भागने की ग़लती तक - यहां हमने पांच वजहें बताई हैं कि क्यों हाल के बेस्ट फ़ंड को चुनना आपके लिए नुक़सानदेह क्यों हो सकता है और इसकी जगह क्या करना चाहिए. 

ज़्यादातर निवेशक म्यूचुअल फ़ंड चुनते वक्त सबसे पहले "बेस्ट परफ़ॉर्मर" खोजते हैं. ये सुनने में सही लगता है. अगर कोई फ़ंड हाल में सबसे आगे रहा है, तो क्या वही आपके लिए सही है?

असल में टॉप फ़ंड्स के पीछे भागना लंबे समय में खुद को निराश करने का आसान तरीक़ा है.

तो, यहां हमने बताया है कि हाल के रिटर्न के आधार पर “बेस्ट” म्यूचुअल फ़ंड चुनना हमेशा सबसे समझदारी भरा क़दम क्यों नहीं हो सकता है.

1. बेस्ट फ़ंड, आपके लिए सही हो ये ज़रूरी नहीं

प्रदर्शन के आंकड़े आपको बताते हैं कि फ़ंड ने क्या किया, लेकिन ये नहीं कि उस मुक़ाम तक कैसे पहुंचा और फ़ंड ने किस तरीके़ से रिटर्न कमाया है. अगर आप ये बातें जान लेंगे आपके निवेश के अनुभव में बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है.

उदाहरण के तौर पर, लार्ज-कैप फ़ंड्स को ही लीजिए. नियमों के अनुसार, ये अपने पैसों का 20% तक जोखिम भरे मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट में निवेश कर सकते हैं.  हालांकि, औसतन लार्ज-कैप फ़ंड्स सिर्फ़ 2-3% ही स्मॉल-कैप में निवेश करते हैं, लेकिन कुछ मैनेजर ज़्यादा मुनाफ़े के लिए इस लिमिट को बढ़ा देते हैं.

इन उदाहरणों पर ग़ौर करें: जून 2025 तक, Motilal Oswal की लार्ज-कैप स्कीम के निवेशकों का 9.53% पैसा स्मॉल-कैप में लगा था. LIC के निवेशकों का 6.47% और Bank of India के निवेशकों का 6.04% स्मॉल-कैप में लगा, जो इस कैटेगरी एवरेज से काफ़ी ज़्यादा है.

ये तरीक़ा तब फ़ायदा देता है जब स्मॉल-कैप कंपनियां ऊपर जा रही हों और वाक़ई कुछ फ़ंड्स ने इस वजह से हाल की रैंकिंग में अच्छा किया है.

लेकिन अगर आपने लार्ज-कैप फ़ंड को कम-जोखिम वाले पोर्टफ़ोलियो के लिए लिया था, तो आपको झटका लग सकता है. असल में, स्मॉल/मिड-कैप वाले फ़ंड में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है और ये आपको घबराकर ग़लत समय पर बेचने पर मजबूर कर सकता है, जिससे नुक़सान पक्का हो जाएगा.

इसलिए समझ लें - ज़्यादा रिटर्न के साथ ज़्यादा उतार-चढ़ाव भी आता है. अगर ये आपके सहजता के स्तर से बाहर है, तो किसी और के लिए “बेस्ट” फ़ंड आपके लिए ग़लत साब़ित हो सकता है.

2. पिछला प्रदर्शन भविष्य के नतीजों की गारंटी नहीं देता

हर म्यूचुअल फ़ंड के विज्ञापन में लिखा डिस्क्लेमर यूं ही नहीं होता. एक समय अच्छा प्रदर्शन करने वाले फ़ंड अक्सर आने वाले समय में पीछे रह जाते हैं.

फ़ंड्स मार्केट के कुछ ख़ास हालात में अच्छा कर सकते हैं - जैसे सेक्टोरल और थीमैटिक फ़ंड्स सही माहौल में बढ़ते दिखते हैं. लेकिन वो माहौल हमेशा नहीं रहता. तेज़ी के दौर के बाद निवेश करना कई बार पीक पर ख़रीदने और फिर गिरावट में फंसने जैसा होता है.

3. निरंतरता शॉर्ट-टर्म उछाल से बेहतर है

ऐसा फ़ंड जो हर साल अपनी कैटेगरी के टॉप 25% में रहे, वो उससे बेहतर है जो एक साल टॉप पर हो और अगले ही साल सबसे निचले पायदान पर चला जाए.

लंबे समय के निवेश में टिकाऊ मुनाफ़ा जीतता है, चमकदार एक साल के रिटर्न नहीं.

4. बार-बार फ़ंड बदलना महंगा पड़ता है

हर बार जब आप किसी नए लीडर की तलाश में फ़ंड बदलते हैं, तो आपको ये जोखिम उठाने पड़ते हैं:

  • एग्ज़िट लोड (अगर लागू हो)
  • शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (अगर इक्विटी फ़ंड 12 महीने से कम रखा हो)
  • बदलने के दौरान मार्केट से बाहर रहने से कंपाउंडिंग का नुक़सान

बार-बार बदलने से पोर्टफ़ोलियो में बेवजह की जटिलता भी बढ़ती है.

5. डाइवर्सिफ़िकेशन ज़्यादा मायने रखता है

एक अकेला “बेस्ट फ़ंड” आपको हर मार्केट दौर से नहीं बचा सकता. एक संतुलित मिश्रण-स्थिरता के लिए लार्ज-कैप, ग्रोथ के लिए मिड/स्मॉल-कैप और डेट से सहारा देने वाला मिक्स- आपको स्थिति में फंसने के जोखिम को कम करता है.

एक बेहतर विकल्प

हाल के विनर्स का पीछा करने के बजाय:

  • ऐसे फ़ंड चुनें जो कई अवधियों में लगातार, औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हों
  • फ़ंड का रिस्क लेवल अपनी रिस्क उटाने की क्षमता से मिलाएं
  • मार्केट के अलग-अलग हालात का सामना करने वाला डाइवर्सिफ़ाइड पोर्टफ़ोलियो बनाएं
  • प्लान पर टिके रहें और अनुमान न लगाएं- जो सबसे बड़ा वैल्थ-बिल्डिंग फै़क्टर है. उसे अपना काम करने दें

वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र में हम यही करते हैं. यहां आपको सिर्फ़ फ़ंड की लिस्ट ही नहीं मिलती, बल्कि ये मिलता है:

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ये भी पढ़िए: दूसरा फ़ंड जो हर लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर के पास होना ही चाहिए!

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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