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दूसरा फ़ंड जो हर लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर के पास होना ही चाहिए!

चलिए, पता करते हैं

चलिए, पता करते हैंAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः आपने फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स के बारे में ज़रूर सुना होगा. लेकिन एक और फ़ंड कैटेगरी है जो निवेशकों के बीच तेज़ी से पॉपुलर हो रही है, और इसकी वजह भी वाजिब है. ये नया, बोल्ड और चौंकाने वाले तरीक़े से स्ट्रक्चर्ड भी है. अगर आप लॉन्ग-टर्म पोर्टफ़ोलियो बना रहे हैं, तो ये आपका दूसरा ज़रूरी आधार हो सकता है. तो आइए जानते हैं इस फ़ंड कैटेगरी का नाम.

पिछले महीने मेरे ऑफिस के साथ प्रणीत ने बताया कि फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स को आपके पोर्टफ़ोलियो में जगह क्यों मिलनी चाहिए. उन्होंने इस फ़ंड को "अनुकूल" बताया और ये बात बिल्कुल सही भी है. इन फ़ंड्स को लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स के बीच शिफ़्ट करने की पूरी आज़ादी होती है. इसलिए, ये उन निवेशकों के लिए सही है जो प्रोफे़शनल फ़ंड मैनेजर्स को ये तय करने देना चाहते हैं कि मार्केट की हवा के हिसाब से कहां निवेश करना है.

लेकिन आज हम जिन फ़ंड्स की बात करने जा रहे हैं, वो भी अपने तरीक़े से लचीले हैं. हालांकि, उनके नियम अलग हैं -. ये हैं मल्टी-कैप फ़ंड्स.

कभी मल्टी-कैप फ़ंड्स लगभग गुमनामी के कगार पर थे

चलिए 2020 में वापस चलते हैं. उस साल SEBI ने मल्टी-कैप फ़ंड्स के लिए एक नया नियम लागू किया: अब इन फ़ंड्स को कम से कम 25% निवेश लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में करना ज़रूरी होगा. उस वक़्त बहुतों को लगा कि इससे ये कैटेगरी ख़त्म हो जाएगी. आख़िर क्यों कोई मल्टी-कैप फ़ंड में निवेश करे जब फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड कहीं भी जा सकते हैं?

लेकिन ख़त्म होने के बजाय, एक्टिवली-मैनेज्ड मल्टी-कैप फ़ंड्स ने अपनी एक अलग पहचान बना ली है. 30 जून 2025 तक इनका कुल AUM ₹2.04 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. नए खिलाड़ी के लिए ये कमाल की ग्रोथ है.

मल्टी-कैप और फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स में क्या फ़र्क़ है?

फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स और मल्टी-कैप फ़ंड्स एक ही यूनिवर्स- लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स- में निवेश करते हैं. लेकिन इनका तरीक़ा एक-दूसरे से काफ़ी अलग है.

  • फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स में एलोकेशन को लेकर कोई दबाव नहीं होता है. ये कहीं भी निवेश कर सकते हैं.
  • मल्टी-कैप फ़ंड्स को SEBI की रूलबुक को फ़ॉलो करना होता है. इन्हें कम से कम 25% लार्ज, 25% मिड और 25% स्मॉल-कैप में निवेश करना ही होता है. बाक़ी के 25% को फ़ंड मैनेजर अपनी स्ट्रैटेजी के हिसाब से निवेश कर सकता है.

भले ही ये दिखने में सख्त स्ट्रक्चर है, लेकिन, असल में निवेशकों के लिए फ़ायदेमंद साब़ित होता है. आइए जानते हैं क्यों.

मल्टी-कैप फ़ंड्स को क्यों ग़ौर करना चाहिए?

1. हाल में रहा बेहतर प्रदर्शन

बीते तीन सालों में, मल्टी-कैप फ़ंड्स ने 19.63% का सालाना रिटर्न दिया है. वहीं, फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स का रिटर्न 16.33% रहा है.

इसकी वजह शायद ये है कि फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स ज़्यादातर लार्ज-कैप स्टॉक्स में निवेश करते हैं (क़रीब 65-70%) जबकि मल्टी-कैप फ़ंड्स को मिड और स्मॉल-कैप में कम से कम आधा पैसा लगाना ही होता है और पिछले तीन सालों में इन दोनों सेगमेंट ने मज़बूत तेज़ी दिखाई है. नतीजा - मल्टी-कैप फ़ंड्स ने ज़्यादा अच्छा रिटर्न दिया.

2. मिड और स्मॉल-कैप में व्यवस्थित एक्सपोज़र

अगर आप सीधे मिड-कैप या स्मॉल-कैप फ़ंड्स में पैसा लगाते हैं, तो वो थोड़ा रिस्की हो सकता है. लेकिन मल्टी-कैप फ़ंड्स एक बैलेंस्ड एक्सपोज़र देता है. इसमें आपको लार्ज-कैप की स्थिरता के साथ, मिड और स्मॉल-कैप का फ़ायदा भी मिलता है.

और एक छुपा हुआ फ़ायदा: इन-बिल्ट रीबैलेंसिंग. असल में, फ़ंड को 25/25/25 का एलोकेशन बनाए रखना होता है, इसलिए ये खुद-ब-खुद बेहतर प्रदर्शन करने वालों को कम कर देगा और कम प्रदर्शन करने वालों का हिस्सा बढ़ा देगा. इससे टैक्स-एफ़िशिएंट प्रॉफ़िट बुकिंग होती है और एलोकेशन सहज बना रहता है.

3. बेहतर लिक्विडिटी मैनेजमेंट

मिड और स्मॉल-कैप फ़ंड्स में लिक्विडिटी की समस्या हो सकती है, ख़ासकर जब वो बहुत बड़े हो जाते हैं. वहीं, मल्टी-कैप फ़ंड्स के लिए, इन सेगमेंट में उनके सीमित 25% निवेश की वजह से ये समस्या कम होती है. इससे फ़ंड मैनेजरों को उतार-चढ़ाव भरे बाज़ार में भी काम करने की आज़ादी मिलती है.

मल्टी-कैप फ़ंड में किसे निवेश करना चाहिए?

  • अगर आपका निवेश लंबे समय का है और निवेश का समय कम से कम 5 से 7 साल का है.
  • अगर आप उतार-चढ़ाव से नहीं घबराते हैं, तो इनका एवरेज स्टैंडर्ड डेविएशन 13.84 है, जो फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स (13.39) से थोड़ा ज़्यादा है. यानी, रिटर्न में उतार-चढ़ाव थोड़ा ज़्यादा हो सकता है.
  • अगर आप अलग-अलग फ़ंड्स चुनने का झंझट से बचना चाहते हैं और डायवर्सिफ़ाइड एक्सपोज़र चाहते हैं.

कुल मिलाकर, ये फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड के बाद आपका दूसरा कोर फ़ंड बन सकता है.

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