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स्मॉल-कैप फ़ंड्स ने 10 साल में दिए 5 गुना रिटर्न. क्या ये अब सामान्य बात है?

आइए पता लगाते हैं

स्मॉल-कैप फ़ंड्स ने पिछले 10 साल में 5 गुना रिटर्न दिए हैं. क्या ये नया नॉर्मल है?Aman Singhal/AI-Generated Image

सारांश: पिछले दशक में स्मॉल-कैप फ़ंड्स के 5 गुना रिटर्न के बाद, हर कोई उनकी तरफ़ आकर्षित हो रहा है. लेकिन हमारी गहरी पड़ताल दिखाती है कि इतने ऊंचे रिटर्न ‘नॉर्मल’ से बहुत दूर हैं. औसत पर टिकने के बजाय, हमने पिछले रिटर्न को अलग-अलग हिस्सों में तोड़ा है, ताकि ये देखा जा सके कि कितनी बार वो असल में 0–5%, 10–15% या 20% से ऊपर के स्तरों में गिरे. इसका नतीजा क्या रहा? ये एक ऐसा रियलिटी चेक है जो चौंका सकता है और स्मॉल-कैप निवेश को लेकर आपकी सोच को बदल सकता है.

अगर 10 साल पहले किसी औसत स्मॉल-कैप फ़ंड में ₹10 लाख लगाए होते, तो आज वो लगभग ₹50 लाख बन जाते. ये 5 गुनी छलांग है. 4 सितंबर 2025 तक, एक मिड-लेवल स्मॉल-कैप फ़ंड ने भी बीते दशक में 17.3% सालाना का रिटर्न दिया है.

तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं कि स्मॉल कैप रिटेल निवेशकों के नए फ़ेवरेट बन गए हैं. हाल में मैंने एक पॉपुलर इंफ़्लुएंसर को देखा, जो 28 साल के एक युवा को फ़ाइनेंशियल प्लानिंग पर सलाह दे रहा था. SIP कैलकुलेटर खोला गया, जादुई नंबर डाला गया - 18% सालाना. और कुछ ही सेकंड में, ₹3,500 की SIP 30 साल में कई करोड़ में बदल गई. निवेशक की आंखें अविश्वास में चौड़ी हो गईं.

मानना पड़ेगा कि इंफ़्लुएंसर “ग़लत” नहीं था. पिछला डेटा 18% रिटर्न की संभावना को सपोर्ट करता है. लेकिन सवाल ये है: ऐसा कितनी बार हुआ है? और ज़्यादा अहम सवाल - क्या आगे भी इसकी उम्मीद रखनी चाहिए?

क्यों प्वाइंट-टू-प्वाइंट रिटर्न धोखा दे सकते हैं

अक्सर लोग म्यूचुअल फ़ंड का परफ़ॉर्मेंस ऐसे बताते हैं: “X फ़ंड ने Z साल में Y% दिया.” इसे प्वाइंट-टू-प्वाइंट रिटर्न कहते हैं. ये आसान है, लेकिन अधूरा और गुमराह करने वाला.

मान लीजिए दो दोस्त एक ही स्मॉल-कैप फ़ंड में निवेश करते हैं. पहला जनवरी 2014 में शुरू करता है, दूसरा जनवरी 2015 में. 10 साल बाद, उनके रिटर्न बिल्कुल अलग हो सकते हैं, ये इस पर निर्भर करता है कि उन्होंने कब शुरुआत की. प्वाइंट-टू-प्वाइंट रिटर्न इस बदलाव को छिपा देता है.

यहीं पर रोलिंग रिटर्न काम आते हैं.

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रोलिंग रिटर्न समझिए

रोलिंग रिटर्न को ऐसे समझिए जैसे हर एंट्री पॉइंट को चेक करना. किसी एक तारीख़ से निवेश शुरू कर और एक तारीख़ पर ख़त्म करने के बजाय, रोलिंग रिटर्न पूछता है:

  • “अगर फ़रवरी 2014 में निवेश किया और फ़रवरी 2024 में निकाला तो क्या होता?”
  • “अगर मार्च 2014 में शुरू किया और मार्च 2024 में निकाला तो?”
  • …और ये हर एक दिन के लिए गिनता है.

मतलब, निवेश की विंडो को समय के साथ आगे बढ़ाते हैं और हर नतीजे को मापा जाता है.

हर रोज़ की ज़िंदगी का एक उदाहरण लीजिए: मान लीजिए आप जानना चाहते हैं कि एक मशहूर रेस्तरां कितना भीड़भाड़ वाला है. अगर आप सिर्फ़ रविवार की रात देखते हैं, तो लगेगा कि वो हमेशा फुल है. लेकिन अगर हफ़्ते भर में अलग-अलग टाइम पर जाते हैं, तो सही तस्वीर मिलेगी. रोलिंग रिटर्न निवेश के लिए यही काम करता है - पूरी रेंज दिखाता है, सिर्फ़ सबसे अच्छे (या सबसे बुरे) स्नैपशॉट पर नहीं रुकता.

स्मॉल कैप के बारे में आंकड़े क्या कहते हैं

इसलिए, मैंने पिछले दशक के लिए Nifty Smallcap 250 TRI (ज़्यादातर स्मॉल-कैप फ़ंड्स का बेंचमार्क) के 10 साल के डेली रोलिंग रिटर्न का डेटा चेक किया.

ये नतीजे सामने आए:

  • किसी भी 10 साल के पीरियड में कभी निगेटिव रिटर्न नहीं दिए.
  • सबसे आम नतीजा (39.5% समय): 10–15% सालाना रिटर्न.
  • ठीक 18% या उससे ऊपर: सिर्फ़ 12% समय (लगभग हर 8 में से 1 बार).
  • 0–10% नतीजे: लगभग 20% समय.

तो हां, 18% रिटर्न मिले थे. लेकिन ज़्यादातर बार इंडेक्स ने 10–15% रिटर्न दिया. दरअसल, 18% रिटर्न पाने की संभावना से ज़्यादा चांस था कि सिर्फ़ सिंगल-डिजिट रिटर्न मिले.

क्यों बहुत ऊंची उम्मीदें खतरनाक हैं

यहीं पर निवेशक की साइकोलॉजी दिलचस्प हो जाती है. अगर कोई 18–20% की उम्मीद लेकर आता है और 10 साल बाद सिर्फ़ 9% (जो असल में लगभग 20% समय हुआ) मिलता है, तो निराशा तय है.

और सच कहें, तो ज़्यादातर निवेशक इतने लंबे समय तक टिके ही नहीं रहते अगर रिटर्न लंबे समय तक इतने कम हों. जब हमने विंडो को 5 साल का किया, तो तस्वीर और भी उथल-पुथल वाली निकली:

  • 30% संभावना निगेटिव या सिंगल-डिजिट रिटर्न का.
  • 40% संभावना 18% या उससे ज़्यादा का.

दरअसल, पिछले दशक में किसी भी 5 साल के पीरियड में स्मॉल-कैप फ़ंड से 18% सालाना रिटर्न मिलने की संभावना सिर्फ़ 4 में से 1 रही. ऐसे में, अगर निवेशक इतनी ऊंची उम्मीद के साथ आते हैं, तो निराश होना लगभग तय है. कई लोग हताश होकर निकल जाते हैं, मार्केट को जुआ कह देते हैं और क़सम खा लेते हैं कि दोबारा नहीं लौटेंगे.

तो सही उम्मीद क्या होनी चाहिए?

पिछले 10 साल शानदार रहे, लेकिन ये मान लेना कि स्मॉल-कैप फ़ंड हमेशा 18% की दर से पैसे बढ़ाएंगे, ग़लत होगा.

ज़्यादा सही उम्मीद 12–15% सालाना रिटर्न की है.

ये शायद सुनने में कम लगे, लेकिन प्रैक्टिकली देखिए:

  • लम्पसम (एकमुश्त) उदाहरण: ₹10 लाख 20 साल तक 12% पर बढ़कर ₹96.5 लाख बनते हैं.
  • SIP उदाहरण: ₹10,000 की मासिक SIP 20 साल तक 12% पर ₹92 लाख बनाती है.
  • अगर 30 साल तक बढ़ाएं, तो आराम से ₹3 करोड़ पार कर जाते हैं.

कंपाउंडिंग को अमीर बनाने के लिए आसमान छूते रिटर्न की ज़रूरत नहीं. ज़रूरत है तो सही उम्मीद और धैर्य के साथ टिके रहने की.

निष्कर्ष

स्मॉल-कैप फ़ंड्स ने पिछले दशक में शानदार 5 गुना रिटर्न दिए हैं. लेकिन इसे देखकर ये मान लेना कि 18% हर साल नया नॉर्मल है, ग़लत होगा. रोलिंग रिटर्न दिखाते हैं कि ऐसा बहुत कम हुआ, और ज़्यादातर रिटर्न 10–15% के बीच ही रहे हैं.

इसलिए, 12–15% की उम्मीद के साथ निवेश कीजिए. इससे जब मार्केट आपकी परीक्षा लेगा, तो आप भागेंगे नहीं और बाक़ी से ज़्यादा अमीर होकर बाहर आएंगे. निवेश में, उबाऊ उम्मीदें अक्सर रोमांचक नतीजों की ओर ले जाती हैं.

कौन से स्मॉल-कैप फ़ंड्स में निवेश करना सही होगा?

यहीं पर वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र मदद करता है. ऊंची और अवास्तविक उम्मीदों के बजाय, हमारी रिसर्च ऐसे स्मॉल-कैप फ़ंड्स पहचानने में मदद करती है, जिनमें ग्रोथ की संभावना और निरंतरता का संतुलन है. चाहे मार्केट में बुल रन हो या गिरावट आए, चुनी हुई रेकमंडेशन, रेगुलर अपडेट और साफ़ गाइडेंस के साथ, फ़ंड एडवाइज़र ये पक्का करता है कि आपके निवेश ट्रैक पर बने रहें.

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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