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सारांशः वैल्यू फ़ंड्स म्यूचुअल फ़ंड की दुनिया में भूले-बिसरे रह जाते हैं. इन्होंने पिछले एक साल में इक्विटी फ़ंड्स में सबसे ख़राब प्रदर्शन किया है, जिसमें केवल तीन स्कीम्स को छोड़कर बाकी सभी नुक़सान में रहीं. कोई हैरत की बात नहीं कि निवेशक इनसे किनारा कर रहे हैं. लेकिन इतिहास बताता है कि जब बाज़ार का वैल्यूएशन थोड़ा ठंडा पड़ता है, तब वैल्यू फ़ंड्स चमकते हैं और अभी के डेटा से लगता है कि ऐसा ही कुछ हो सकता है. हम यहां वैल्यू फ़ंड्स के ट्रैक रिकॉर्ड, उनके लंबे समय के प्रदर्शन और उन फ़ंड्स की पड़ताल कर रहे हैं जो चुपके-चुपके बाज़ार को पछाड़ रहे हैं.
किसी भी म्यूचुअल फ़ंड से जुड़ी ख़बर पढ़ें, तो आपको वही घिसे-पिटे शब्द सुनाई देंगे: स्मॉल कैप, फ़्लेक्सी कैप, इंटरनेशनल फ़ंड्स. लेकिन एक कैटेगरी जिसका जिक्र शायद ही सुनाई दे? वो है वैल्यू फ़ंड.
दरअसल, इस फ़ाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में वैल्यू फ़ंड्स प्योर इक्विटी फ़ंड्स में दूसरी सबसे कम लोकप्रिय कैटेगरी थी. इनमें केवल ₹2,000 करोड़ से थोड़ा ज़्यादा का निवेश आया. (इनसे भी बदतर हालत केवल ELSS फ़ंड्स की थी, लेकिन इसका कारण टैक्स नियमों में बदलाव है.)
और सच कहें तो, निवेशकों का दूसरी कैटेगरीज़ की ओर मुंह मोड़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया भी नहीं जा सकता. पिछले 12 महीनों में वैल्यू फ़ंड्स ने औसतन 7 प्रतिशत से ज्यादा का निगेटिव रिटर्न दिया है, जो इक्विटी फ़ंड्स में सबसे ख़राब प्रदर्शन वाली कैटेगरीज़ में से एक है. व्यक्तिगत स्तर पर, केवल तीन फ़ंड्स ही मुनाफ़े में रह पाए, जबकि एक साल के ट्रैक रिकॉर्ड वाले बाक़ी 24 एक्टिव वैल्यू फ़ंड्स घाटे में रहे.
तो, इतने ख़राब प्रदर्शन के बाद भी हम वैल्यू फ़ंड्स की बात क्यों कर रहे हैं? जवाब है: वैल्यूएशन. 5 सितंबर 2025 तक BSE 500 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 24.5 है, जो स्क्रीनर और ट्रेंडलाइन के अनुसार इसके लंबे समय के औसत P/E से कम है.
इस प्रकार, बाज़ार अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे ट्रेड करता है, तब वैल्यू फ़ंड्स आपके पोर्टफ़ोलियो में एक मज़बूत हथियार बन सकते हैं. आइए, समझते हैं कि क्यों?
वैल्यू/कॉन्ट्रा फ़ंड्स आखिर हैं क्या?
वैल्यू या कॉन्ट्रा फ़ंड्स ऐसे डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड हैं जो उन शेयरों को ख़रीदते हैं जो उनकी वास्तविक क़ीमत की तुलना में कम वैल्यूएशन पर मिलते हैं. इसे शेयर बाज़ार में सस्ते सौदे खोजने की तरह समझिए. आप अच्छे बिज़नस को तलाशते हैं जो अस्थायी रूप से बाज़ार की नज़रों से दूर हैं और सस्ते में उपलब्ध हैं.
ये रणनीति एक साधारण सिद्धांत पर टिकी है: बाज़ार कम समय में ज़्यादा प्रतिक्रिया देता है, लेकिन लंबे समय में शेयरों की क़ीमतें उनकी असली क़ीमत की ओर लौटती हैं. सस्ते में शेयर ख़रीदकर वैल्यू फ़ंड्स इस गिरावट को भुनाने और बेहतर रिटर्न देने की कोशिश करते हैं.
जब वैल्यू फ़ंड्स ने दिखाया दम
इतिहास बताता है कि जब बाज़ार अपने औसत वैल्यूएशन से नीचे ट्रेड करता है, तब वैल्यू फ़ंड्स अच्छा प्रदर्शन करते हैं. पिछले पांच सालों में 12 नवंबर 2021 से 23 जुलाई 2024 का समय इसका एक अच्छा उदाहरण है, जब BSE 500 का P/E इसके औसत ऐतिहासिक मूल्य से कम था.
इस दौरान BSE 500 TRI ने 16.5 प्रतिशत का सालाना रिटर्न दिया. लेकिन वैल्यू फ़ंड्स ने इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन किया. मौजूद 19 वैल्यू फ़ंड्स में:
- केवल एक फ़ंड बेंचमार्क से पीछे रहा.
- प्रभावशाली रूप से, 14 फ़ंड्स ने 20 प्रतिशत से ज़्यादा रिटर्न दिया, जिसमें JM वैल्यू (28.6 प्रतिशत सालाना रिटर्न), SBI कॉन्ट्रा (26.6 प्रतिशत), HSBC वैल्यू (25.3 प्रतिशत), टेम्पलटन इंडिया वैल्यू (24.5 फीसदी) और कोटक कॉन्ट्रा (24.2 प्रतिशत) सबसे आगे रहे.
इसके उलट, फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स (जिन्हें स्टॉक चुनने की ज़्यादा आजादी होती है और वैल्यूएशन मेट्रिक्स पर टिके रहने की ज़रूरत नहीं) इस दौरान तुलनात्मक रूप से कमज़ोर रहे. उस समय मौजूद 22 फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स में से केवल पांच ने 20 प्रतिशत से ज़्यादा का वार्षिक रिटर्न दिया और 10 फ़ंड्स BSE 500 TRI के 16.5 प्रतिशत रिटर्न को भी नहीं हरा पाए.
ये साफ है: जब बाज़ार का वैल्यूएशन कम होता है, तब वैल्यू फ़ंड्स अक्सर बाजी मार लेते हैं.
रोलिंग रिटर्न पर ग़ौर करें
बेशक, केवल एक समय अवधि को देखना काफ़ी नहीं है. ये जानने के लिए कि क्या वैल्यू फ़ंड्स लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, हमने पिछले पांच सालों में उनके पांच साल के डेली रोलिंग रिटर्न की जांच की. हमने उन एक्टिव वैल्यू फ़ंड्स को चुना जिनका 10 साल का इतिहास था.
लेकिन पहले, "रोलिंग रिटर्न" का मतलब क्या है?
रोलिंग रिटर्न को क्रिकेट में बल्लेबाज की औसत की तरह समझिए. विराट कोहली का एक या दो मैचों में स्कोर देखने से ज़्यादा कुछ नहीं पता चलता. लेकिन सैकड़ों पारियों में उनकी औसत देखें, तो आपको उनकी असली काबिलियत का अंदाजा होता है.
रोलिंग रिटर्न भी फ़ंड्स के लिए यही करते हैं. किसी एक अवधि के प्रदर्शन को देखने के बजाय, ये कई ओवरलैपिंग पांच साल की अवधियों में रिटर्न कैलकुलेट करता है. इससे एक बार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है और आपको पता चलता है कि लंबे समय में फ़ंड कितना भरोसेमंद है.
इसे ध्यान में रखते हुए, देखिए कि पिछले पांच सालों में BSE 500 TRI के 16.26 प्रतिशत के मुकाबले वैल्यू फ़ंड्स ने कैसा प्रदर्शन किया.
| फ़ंड | 5 साल के डेली रोलिंग रिटर्न (%) |
|---|---|
| SBI Contra | 20.78 |
| JM Value | 18.58 |
| Kotak Contra | 18.98 |
| ICICI Pru Value | 18.53 |
| Invesco India Contra | 18.42 |
| Nippon India Value | 18.36 |
| HSBC Value | 17.83 |
| Templeton India Value | 17.5 |
| UTI Value | 16.75 |
| Tata Value | 16.26 |
| HDFC Value | 15.64 |
| ABSL Value | 13.35 |
| Quantum Value | 13.35 |
| Groww Value | 12.68 |
नतीजा: 15 में से 11 वैल्यू फ़ंड्स ने इस पैमाने पर इंडेक्स को मात दी. ये एक शानदार स्ट्राइक रेट है, जो दिखाता है कि लंबे समय में वैल्यू फ़ंड्स आपके पोर्टफ़ोलियो में एक कारगर हथियार हो सकते हैं.
हम डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स को क्यों तरजीह देते हैं
वैल्यू रिसर्च में हम हमेशा फ़्लेक्सी कैप, मल्टी कैप, लार्ज एंड मिड कैप और हां, वैल्यू फ़ंड्स जैसे डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स के महत्व पर जोर देते हैं.
क्यों? क्योंकि ये फ़ंड्स आपकी सारी पूंजी को एक ही जगह नहीं लगाते. ये आपके पैसे को अलग-अलग सेक्टर्स और मार्केट कैपिटलाइजेशन में बांटते हैं, जिससे आपको अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों का फ़ायदा मिलता है. इसका मतलब है कि अगर एक सेक्टर या मार्केट कैप सेगमेंट में गिरावट आती है, तो बाकी हिस्से इसे संतुलित कर सकते हैं.
सेक्टोरल या थीमैटिक फ़ंड्स इसके उलट हैं. ये तब बहुत आकर्षक लगते हैं जब उनकी थीम चल रही हो, जैसे टेक बूम के दौरान IT फ़ंड्स या महामारी के समय फार्मा फ़ंड्स. लेकिन समस्या ये है कि जब हालात बदलते हैं, तो ये बुरी तरह गिर सकते हैं और आपके पोर्टफ़ोलियो को नीचे खींच सकते हैं.
कुल मिलाकर, डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स को आपके निवेश पोर्टफ़ोलियो के ऑल-वेदर टायर्स की तरह समझिए. ये थीम फ़ंड्स की तरह किसी ख़ास दौर में रोमांचक तो नहीं होंगे, लेकिन हर तरह की परिस्थिति में आपको स्थिर और आगे बढ़ने में मदद करेंगे.
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हमारी प्रीमियम सर्विस वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपके लक्ष्यों और जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से सही फ़ंड चुनने में मदद करती है. साथ ही, सभी वैल्यू फ़ंड्स एक जैसे नहीं होते. जैसा कि रोलिंग रिटर्न दिखाते हैं कि SBI कॉन्ट्रा, JM वैल्यू, कोटक कॉन्ट्रा और ICICI प्रू वैल्यू जैसे कुछ फ़ंड्स ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि कुछ पीछे रह गए.
फ़ंड एडवाइजर न केवल आपको लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले फ़ंड्स चुनने में मदद करता है, बल्कि ये रिटर्न से आगे जाकर फ़ंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड, रिस्क-एडजस्टेड प्रदर्शन और अन्य महत्वपूर्ण मेट्रिक्स का मूल्यांकन भी करता है.
हमारी बेस्ट बाय लिस्ट में कौन से वैल्यू फ़ंड्स हैं, जानना चाहते हैं?

