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पराग पारिख म्यूचुअल फ़ंड्स ने अगस्त में 5 नए स्टॉक में की ख़रीदारी

आइए जानें विस्तार से

आइए जानें विस्तार सेAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः पराग पारिख फ़ाइनेंशियल एडवाइज़री सर्विसेज़ (PPFAS) शायद ही कभी बड़े क़दम उठाती है, इसलिए इसके छोटे बदलाव भी काफ़ी अहम माने जाते हैं. पिछले महीने इसने चुपचाप अपने पोर्टफ़ोलियो में पांच कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाई है. क्या ये इसके अगले बड़े विनर्स की झलक हो सकती है?

पराग पारिख फ़ाइनेंशियल एडवायज़री सर्विसेज़ (PPFAS) ने भारत की सबसे अलग पहचान रखने वाली फ़ंड हाउस में अपनी पहचान बनाई है. जहां ज़्यादातर फ़ंड हाउस हर मौक़े पर नए स्कीम लॉन्च करने में लगे रहते हैं, वहीं PPFAS ने धीमी और स्थिर राह चुनी है. अपने 12 साल के इतिहास में, इसने सिर्फ़ छह म्यूचुअल फ़ंड लॉन्च किए हैं, जो आज की भीड़ भरी म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री में बेहद दुर्लभ है.

और फिर भी, ये एक ट्रेंडसेटर रहा है. इसका ख़ास Parag Parikh Flexi Cap Fund भारत में उन शुरुआती फ़ंड्स में से था जिसने अमेरिकी शेयरों में भारी निवेश किया. 2020 में इस फ़ंड का क़रीब एक-तिहाई एसेट Alphabet, Amazon और Meta जैसी ग्लोबल दिग्गज कंपनियों में लगा था. हालांकि रेगुलेटरी लिमिट्स के चलते इस एक्सपोज़र को बाद में कम किया गया है, लेकिन फिर भी ये फ़ंड अपने साथियों से अलग नज़र आता है.

धीमी और टिकाऊ फ़िलॉसफ़ी

PPFAS के चीफ़ इन्वेस्टमेंट ऑफ़िसर राजीव ठक्कर, फ़ंड हाउस की धैर्यपूर्ण सोच को पूरी तरह से दर्शाते हैं. जहां ज़्यादातर फ़ंड मैनेजर हर नए मार्केट ट्रेंड के पीछे भागकर पोर्टफ़ोलियो बदलते रहते हैं, वहीं PPFAS अपने दृढ़ निश्चय पर अडिग रहता है.

दरअसल, पिछले साल जब फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड की परफ़ॉर्मेंस अपने साथियों से कम रही, तब ठक्कर ने शांतिपूर्वक कहा था: “ऐसे दौर आएंगे जब हम कमज़ोर दिखेंगे और हमने ये बात यूनिटहोल्डर्स से साफ़ कर दी है. फ़िलहाल मैं कमतर प्रदर्शन करके भी खुश हूं.”

शॉर्ट-टर्म दर्द सहकर लॉन्ग-टर्म में मुनाफ़ा पाने की ये सोच, इस फ़ंड को उन निवेशकों का पसंदीदा बना देती है जो स्थिरता को तवज्जो देते हैं. फ़ंड हाउस का लोगो “प्रोफ़ेसर टॉर्टॉइज़” भी इसी धैर्य, समझदारी और दीर्घजीविता का प्रतीक है.

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अगस्त में पांच अहम ख़रीद

PPFAS के सोच-समझकर किए गए “बाय-एंड-होल्ड” स्टाइल को देखते हुए, इसके हर पोर्टफ़ोलियो बदलाव पर नज़र रखना ज़रूरी है. अगस्त में फ़ंड हाउस ने पांच कंपनियों में हिस्सेदारी थोड़ी-सी बढ़ाई:

  • CCL Products: हिस्सेदारी 0.20% से बढ़कर 0.49% हुई, जो इस कॉफ़ी और फ़ूड इंग्रीडिएंट कंपनी में भरोसा बढ़ने का संकेत है.
  • E.I.D. - Parry (India): एक्सपोज़र 2.13% से बढ़कर 2.40% हो गया, जिससे ये शुगर और न्यूट्रास्यूटिकल खिलाड़ी इसके बड़े दांवों में शामिल हो गया.
  • Dr Reddy’s Laboratories: हिस्सेदारी 0.11% बढ़ी, जो इस फ़ार्मा दिग्गज में इसके भरोसे को और मज़बूत करता है.
  • Axis Bank: होल्डिंग में 0.09% की मामूली ग्रोथ; ख़ास बात ये है कि PPFAS के फ़ंड लॉन्च से ही Axis Bank इसकी होल्डिंग्स में शामिल है.
  • Kotak Mahindra Bank: हिस्सेदारी 0.08% बढ़ी, जिससे साफ़ है कि ये हाई क्वालिटी वाले बैंकिंग फ्रेंचाइज़ी में अपना निवेश लगातार बढ़ा रहा है.

हालांकि Dr Reddy’s, Axis और Kotak Mahindra की प्रतिशत ग्रोथ मामूली लग सकती है, लेकिन याद रहे कि ये लार्ज-कैप कंपनियां हैं. इनमें 10–20 बेसिस पॉइंट की ग्रोथ का मतलब है बड़े स्तर पर पूंजी लगाई गई है.

ये सभी बदलाव PPFAS की स्टाइल से पूरी तरह मेल खाते हैं. कोई बड़ा पोर्टफ़ोलियो टर्नओवर नहीं, बल्कि उन कंपनियों में क्रमिक निवेश जिनको ये अच्छी तरह समझता है. यही इसकी लंबे समय से चली आ रही स्ट्रैटेजी रही है.

उदाहरण के तौर पर, फ़ंड के लॉन्च से ही Axis Bank और ICRA इसकी होल्डिंग्स में बने हुए हैं और ICICI Bank इसमें 2014 के मध्य से शामिल है. ये इसकी “बाय-एंड-होल्ड” सोच की गवाही देता है.

साफ़ संदेश यही है कि पराग पारिख म्यूचुअल फ़ंड का संतुलित और धैर्यपूर्ण नज़रिया चुपचाप अपना काम करता जा रहा है. हर नए मार्केट ट्रेंड का पीछा करने के बजाय, ये उन कंपनियों पर भरोसा बढ़ाता है जिन्हें ये अच्छी तरह जानता है. इसी स्टाइल ने समय के साथ धैर्य रखने वाले निवेशकों को वेल्थ बनाने में मदद की है.

दिलचस्प बात ये है कि इसका लॉन्ग-टर्म और नपा-तुला नज़रिया वैल्यू रिसर्च की सोच से भी मेल खाता है. हमारे CEO धीरेंद्र कुमार अक्सर ज़ोर देते हैं कि सफ़ल निवेश सिर्फ़ “हॉट टिप्स” के पीछे भागने से नहीं, बल्कि अपनी खुद की आदतों और प्रतिक्रियाओं पर क़ाबू रखने से आता है. असल जोखिम अक्सर मार्केट से नहीं, बल्कि निवेशकों की अपनी ग़लतियों से आता है.

धीरेंद्र ने इन बातों को अपनी किताब Money, Markets & Mistakes में विस्तार से लिखा है. थीम के आधार पर बनी ये किताब समझाती है:

  • निवेशक मनोविज्ञान और बिहेवियरल इकोनॉमिक्स: क्यों हम भावनात्मक ग़लतियां करते हैं और इन्हें कैसे रोकें.
  • निवेश की बुनियादी बातें: ऐसे सिद्धांत जो हर मार्केट साइकिल में साबित होते हैं.
  • म्यूचुअल फ़ंड स्ट्रैटेजी और मार्केट ट्रेंड्स: शोर और असली संकेत में फ़र्क कैसे करें और अनुशासन बनाए रखें.

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