कवर स्टोरी

10 तेज़ी से बढ़ते स्मॉल-कैप शेयर, जिनमें फ़ंड्स ने जून-अगस्त में की तगड़ी ख़रीदारी

मज़बूत फ़ाइनेंशियल फ़िल्टर और म्यूचुअल फ़ंड्स की एक्टिविटी देखकर हमने ऐसे तेज़ी से बढ़ते स्मॉल-कैप चुने हैं जिनके पीछे इंस्टिट्यूशनल सपोर्ट नज़र आ रहा है.

म्यूचुअल फ़ंड्स ने ख़रीदे टॉप 10 स्मॉल-कैप शेयर. क्या कोई है आपके पास?Aman Singhal/AI-Generated Image

सारांशः पिछले 25 सालों में स्मॉल-कैप ज़्यादातर मौक़ों पर मिड और लार्ज-कैप से बेहतर रहे हैं. इस स्टोरी में हम इस बेहतर प्रदर्शन के बारे में बता रहे हैं, सही तरीक़े से चुनने का फ़्रेमवर्क समझा रहे हैं और 10 ऐसे स्मॉल-कैप बता रहे हैं जिनकी तेज़ ग्रोथ और मज़बूत क्वालिटी ने इंस्टीट्यूशंस का ध्यान खींचा है.

अगर स्टॉक मार्केट को एक परिवार मानें तो लार्ज-कैप होंगे समझदार बुज़ुर्ग - स्थिर और भरोसेमंद. मिड-कैप होंगे मंझले अंकल-आंटीज़, जो अनुभवी होने के साथ-साथ अब भी एनर्जी से भरे हुए हैं. और स्मॉल-कैप? ये हैं मार्केट के टीनएजर्स. महत्वाकांक्षी, अनप्रेडिक्टेबल और कभी-कभी लापरवाह भी.

ये कंपनियां पोर्टफ़ोलियो को आसमान की आतिशबाजी जैसी रोशनी जैसा चमका सकती हैं लेकिन ग़लती हुई तो नुकसान भी बड़ा हो सकता है. फिर भी हैरानी की बात ये है कि स्मॉल-कैप ने इंडियन मार्केट में सबसे ज़्यादा रिटर्न दिए हैं. इन्हें नज़रअंदाज़ करना मतलब आने वाले कल के बड़े वेल्थ क्रिएटर्स को मिस करना.

कैसे स्मॉल-कैप आगे निकले

स्मॉल-कैप के पास ग्रोथ के लिए ज़्यादा गुंजाइश होती है और इनमें मिड और फिर लार्ज-कैप बनने की क्षमता होती है. जब ऐसा होता है तो ये बड़ी वेल्थ बनाते हैं. हमने इसे ऐसे टेस्ट किया:

हमने ऐसी कंपनियां चुनीं जो अपनी कैटेगरी में रहीं या ऊपर गईं (स्मॉल से मिड, स्मॉल से लार्ज, मिड से लार्ज). पिछले 25 सालों के हर पांच साल के पीरियड में स्मॉल-कैप ने 21.6% सालाना का मीडियन रिटर्न दिया. मिड-कैप का रिटर्न 19.5% सालाना और लार्ज-कैप का सिर्फ़ 13.5% सालाना रहा. ये सिर्फ़ जीतना नहीं है, बल्कि पूरे मैदान का चक्कर लगाना है.

साथ ही, हर पांच साल में स्मॉल-कैप ने मिड-कैप को 52%  मौक़ों पर और लार्ज-कैप को 72%  मौक़ों पर पछाड़ा. मतलब टीनएजर्स ने बड़ों को ज़्यादातर बार हरा दिया.

तेज़, स्थिर और धीमे

स्मॉल-कैप मार्केट के स्प्रिंटर हैं, मिड-कैप उनके पीछे दौड़ते रहते हैं और लार्ज-कैप स्थिर चाल चलते हैं.

कैटेगरी 5 साल का मीडियन रिटर्न (% सालाना)
स्मॉल-कैप 21.6% सालाना
मिड-कैप 19.5% सालाना
लार्ज-कैप 13.5% सालाना
डेटा: FY00 से FY25 तक के 5-ईयर रोलिंग रिटर्न्स पर आधारित

दूसरी तरफ़

हर सुपरहीरो की एक कमज़ोरी होती है. स्मॉल-कैप की भी है: हालात बिगड़े तो ये बुरी तरह गिरते हैं.

मुश्किल दौर को देखिए:

  • 2015 से 2020 तक स्मॉल-कैप ने -1.3% सालाना का रिटर्न दिया. पांच साल तेज़ चले लेकिन कहीं नहीं पहुंचे. मिड-कैप ने 6.4% सालाना और लार्ज-कैप ने 1% सालाना रिटर्न दिया.
  • 2007 से 2012 तक रिटर्न घटकर 8.5% सालाना रह गए. मिड-कैप ने 15.5% सालाना और लार्ज-कैप ने 13.4% सालाना दिया.
  • 2008 से 2013 तक ये और गिरे और रिटर्न सिर्फ़ 3.6% सालाना तक. (मिड-कैप– 13.2% सालाना, लार्ज-कैप– 6.7% सालाना)

मतलब स्मॉल-कैप में ज़्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है.

ये हाई रिस्क, हाई रिवार्ड का अनोखा मामला है. तेज़ी के दौर में स्मॉल-कैप मल्टीबैगर रिटर्न देते हैं. लेकिन गिरावट के दौर में सबसे ज़्यादा गिरते भी यही हैं. इसलिए इन्हें खाने में मिर्च की तरह ट्रीट करो - थोड़ी हो तो स्वाद बढ़ाती है, ज़्यादा हो गई तो जायका बिगाड़ देती है.

तो, सही स्मॉल-कैप कैसे चुनें?

  • देखिए स्मार्ट मनी कहां जा रहा है?
    म्यूचुअल फ़ंड्स के पास रिसर्च टीम, मैनेजमेंट तक पहुंच और पोर्टफ़ोलियो को साइज़ तय करने का अनुशासन होता है. 

फ़ंड्स जब किसी स्मॉल-कैप को ख़रीदने लगते हैं तो मतलब कंपनी ने कुछ अहम टेस्ट पास किए हैं: ग्रोथ की संभावना, गवर्नेंस और बैलेंस शीट की मज़बूती. ये तुरंत ख़रीदने का इशारा नहीं है लेकिन एक अच्छा शुरुआती सिग्नल ज़रूर है.

याद रहे कि फ़ंड्स हमेशा सही नहीं होते. कई बार उनकी डील्स पोर्टफ़ोलियो रीबैलेंसिंग का हिस्सा होती हैं. इसलिए म्यूचुअल फ़ंड्स की ख़रीद को संकेत समझो, आदेश नहीं.

  • फ़ाइनेंशियल फ़िल्टर लगाइए फ़ंड-फ़ेवरेट्स से पहले
    नज़र तेज़ करने के लिए पहले कुछ और पैमानों का इस्तेमाल करो. इस स्टोरी के लिए हमने स्मॉल-कैप यूनिवर्स पर दो फ़िल्टर लगाए:
    • पांच साल का टैक्स के बाद की प्रॉफ़िट ग्रोथ सालाना 20% से ज़्यादा
    • पांच साल का मीडियन ROE 12% से ज़्यादा

इसके बाद हमने देखा कि जून से अगस्त 2025 के बीच किन स्मॉल-कैप में फ़ंड्स ने हिस्सेदारी बढ़ाई. इससे हमें 10 हाई-क्वालिटी, तेज़ी से बढ़ते स्मॉल-कैप मिले जिन पर हाल में इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की नज़र भी पड़ी.

नीचे उन 3 स्टॉक्स के बारे में बताया गया है, जिनमें म्यूचुअल फ़ंड ने सबसे ज़्यादा ख़रीदारी की.

3) Awfis Space Solutions

Awfis Space Solutions भारत की सबसे बड़ी फ़्लेक्सिबल वर्कस्पेस कंपनी है. इसका मॉडल है कैपिटल-लाइट शेयर्ड वर्कस्पेस. FY21 से FY25 के बीच इसका रेवेन्यू 8 गुना बढ़कर 162 करोड़ से 1,208 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया.

कंपनी आज 18 शहरों में 200 से ज़्यादा सेंटर्स चला रही है, जिनमें 1.34 लाख सीटें हैं. दो-तिहाई सीटें शेयरिंग मॉडल पर हैं जिससे कैपिटल का बोझ कम होता है. इसका प्लेटफ़ॉर्म कोवर्किंग, मैनेज्ड ऑफ़िस, डिज़ाइन-एंड-बिल्ड और मोबिलिटी सॉल्यूशन को कवर करता है - जो इसे बाकी से आगे रखता है.

ओवरऑल ऑक्यूपेंसी 73% और मैच्योर सेंटर्स में 84% पर स्टेबल है. डिमांड अब बड़ी कंपनियों और ग्लोबल सेंटर्स की तरफ़ है, जो ज़्यादा टिकाऊ ग्राहक होते हैं.

इससे जुड़े रिस्क हैं: ऑफ़िस डिमांड का साइक्लिकल होना, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और नई कैपेसिटी को कैश फ़्लो में बदलने की चुनौती. वैल्यूएशन ऊंचा है - स्टॉक 81 गुने PE और 11 गुना EV/EBITDA पर ट्रेड हो रहा है.

2) GNG Electronics

GNG Electronics (Electronics Bazaar) इंडिया के रिफ़र्बिश्ड ICT मार्केट के गिने-चुने बड़े प्लेयर्स में से है. ये इंडस्ट्री ज़्यादातर अनऑर्गनाइज़्ड है. कंपनी नवी मुंबई, शारजाह और डलास में पांच यूनिट्स चलाती है और 35 देशों में सेल करती है.

इसकी ताक़त है 1-3 साल की रिप्लेसमेंट वारंटी देना, जो रिफ़र्बिशिंग में दुर्लभ है. Microsoft Authorised Refurbisher और R2v3 सर्टिफ़िकेशन, HP और Lenovo जैसे OEMs के ऑडिट इसके सोर्सिंग और प्राइसिंग को मज़बूूत करते हैं.

बिज़नेस  - प्रोक्योरमेंट से रिफ़र्बिशिंग और मल्टी-चैनल डिस्ट्रीब्यूशन तक - पूरी तरह इंटीग्रेटेड है. इसके पास 3,000 से ज़्यादा कस्टमर्स का नेटवर्क और मज़बूत ऑनलाइन फ़ीडबैक है.

इससे जुड़े रिस्क हैं: हाई वर्किंग-कैपिटल, शॉर्ट टेक्नोलॉजी साइकल और डेट पर आधारित पिछली ग्रोथ. IPO के बाद डिलेवरेजिंग ने फ़्लेक्सिबिलिटी बढ़ाई है. स्टॉक ~62 गुना PE पर ट्रेड हो रहा है - इसमें ये मान लिया गया है कि कंपनी कैश फ़्लो डिसिप्लिन बनाए रखेगी और लगातार डिलीवर करेगी.

1) Ellenbarrie Industrial Gases

EIGL इंडस्ट्रियल गैस कुछ भारतीय मालिकाना हक वाली कंपनियों में से है, जहां आमतौर पर ग्लोबल प्लेयर्स का दबदबा होता है. इसके पास 9 यूनिट्स हैं और ईस्टर्न और साउदर्न कैटेगरी में ये लीडर है. इसके 1,800 से ज़्यादा कस्टमर हैं और लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट इसकी कमाई को स्टेबल रखते हैं.

कंपनी की ख़ासियत है आर्गन पर फ़ोकस, जिसकी कीमत ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से कहीं ज़्यादा है. मार्जिन लगभग दोगुने होते हैं. साथ ही, EIGL के पास भारत का बड़ा लॉजिस्टिक्स फ़्लीट है जिससे ये स्टील, फ़ार्मा, हेल्थकेयर, डिफ़ेन्स और स्पेस तक पहुंच बनाती है.

कंपनी ने हाल में 770 TPD कैपेसिटी बढ़ाई और IPO के बाद डेट घटाकर फ़्लेक्सिबिलिटी बढ़ाई है. फिर भी बिज़नेस में कैपिटल की ज़्यादा ज़रूरत होती है और स्टील से जुड़ा रिस्क तथा बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है. अभी स्टॉक 95 गुने के PE पर ट्रेड हो रहा है. लॉन्ग-टर्म ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी ऑनसाइट प्रोजेक्ट कितनी मज़बूती से करती है और आर्गन मिक्स कितना बढ़ाती है.

छोटे लेकिन दमदार

जून-अगस्त 2025 के बीच जिन 10 स्मॉल-कैप में म्यूचुअल फ़ंड्स ने हिस्सेदारी बढ़ाई है, उनके नाम नीचे दिए गए हैं:

कंपनी का नाम 5 साल का टैक्स के बाद प्रॉफ़िट ग्रोथ (% सालाना) 5 साल का मीडियन ROE (%) स्टॉक रेटिंग म्यूचुअल फ़ंड हिस्सेदारी में बढ़त (%)*
Ellenbarrie Industrial Gases 22.6% सालाना 18.5% - 10.68%
GNG Electronics 70.9% सालाना 33.7% - 1.92%
Awfis Space Solutions 80.7% सालाना 13.6% 1 1.80%
Pitti Engineering 51.0% सालाना 18.8% 3 0.97%
Crizac 32.2% सालाना 59.4% - 0.90%
Apcotex Industries 26.6% सालाना 17.9% 4 0.69%
Pearl Global Industries 60.4% सालाना 17.1% 3 0.68%
Jamna Auto Industries 30.4% सालाना 20.4% 4 0.65%
Quality Power Electrical Equipments 98.2% सालाना 40.3% - 0.57%
AGI Greenpac 46.1% सालाना 13.4% 4 0.53%
*जून से अगस्त 2025 के बीच

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ये लेख पहली बार सितंबर 25, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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