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मिड vs स्मॉल कैप इंडेक्स: जानें मुक़ाबले में कौन पड़ा भारी?

हमने निफ़्टी मिडकैप 150 TRI और निफ़्टी स्मॉलकैप 250 TRI के लंबे समय के प्रदर्शन और हाल की स्थिरता की तुलना की

मिड-कैप vs स्मॉल-कैप इंडेक्स: ये एक चौंकाने वाली एकतरफ़ा प्रतिद्वंद्विता हैAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः क्या आपको कोई अंदाज़ा है? इस रेस में एक इंडेक्स ने हर बार जीत दर्ज की. वो भी, सात-वर्ष के पीरियड्स में पूरे 1,200 से ज़्यादा बार.

जब निवेशक ऊंचे रिटर्न की तलाश करते हैं, तो वे अक्सर मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों की ओर रुख करते हैं. और ये सही भी है - पिछले 10 सालों में दोनों कैटेगरी ने सालाना औसतन 15% से ज़्यादा रिटर्न दिया है.

ये निवेशकों के व्यवहार में भी साफ़ दिखता है. AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फ़ंड्स इन इंडिया) के आंकड़ों के मुताबिक़, स्मॉल-कैप फ़ंड्स में 2.66 करोड़, जबकि मिड-कैप फ़ंड्स में 2.3 करोड़ फ़ोलियो हैं. यानी ज़्यादा उतार-चढ़ाव के बावजूद स्मॉल-कैप फ़ंड्स ने ज़्यादा व्यक्तिगत निवेशकों को आकर्षित किया है (क्योंकि हर फ़ोलियो एक निवेशक अकाउंट का प्रतिनिधित्व करता है).

तो सवाल है - अगर दोनों ही कैटेगरी हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड वाली हैं, तो लंबे समय में कौन बेहतर साबित होती है? जवाब जानने के लिए हमने डेटा पर ग़ौर किया.

प्रदर्शन

सिर्फ़ एक, तीन या पांच साल जैसी तय अवधियों के रिटर्न देखने के बजाय हमने 9 अक्तूबर 2020 से 9 अक्तूबर 2025 तक के सात-साल के डेली रोलिंग रिटर्न का एनालिसिस किया.

चलिए, आपको आसान भाषा में बताते हैं. रोलिंग रिटर्न बताता है कि हर संभव सात-साल के पीरियड्स में क्या रिटर्न मिला - जैसे 9 अक्तूबर 2013 से 9 अक्तूबर 2020 तक, फिर 10 अक्तूबर 2013 से 10 अक्तूबर 2020 तक, और इसी तरह आगे. इससे ये पता चलता है कि समय के साथ किसी इंडेक्स का प्रदर्शन कितना स्थिर रहा.

ये तरीक़ा मार्केट टाइमिंग के प्रभाव को कम कर देता है. यानी किसी “सही या ग़लत” समय पर निवेश शुरू करने का असर खत्म हो जाता है और प्रदर्शन का असल पैटर्न साफ़ दिखाई देता है - कौन-सा इंडेक्स लगातार बेहतर रहा.

हमने सात साल की अवधि इसलिए चुनी, क्योंकि वैल्यू रिसर्च का मानना है कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप फ़ंड्स में निवेश कम से कम सात साल तक बने रहना चाहिए - तभी इनकी अस्थिरता औसत हो पाती है.

नतीजा: बड़े अंतर से मिड कैप्स का दबदबा

जब हमने अक्तूबर 2020 से अक्तूबर 2025 के बीच के सभी 1,233 सात-वर्षीय रिटर्न पीरियड्स का औसत देखा, तो पाया

इंडेक्स
सात-साल का औसत रोलिंग रिटर्न
निफ़्टी मिडकैप 150 TRI 17.90%
निफ़्टी स्मॉलकैप 250 TRI 14.70%

मिड-कैप इंडेक्स ने स्मॉल-कैप इंडेक्स पर 3.2 प्रतिशत अंकों की बढ़त बनाई, जो समय के साथ एक बहुत बड़ा अंतर बन जाता है.

और चौंकाने वाली बात ये रही - पूरे पांच साल के स्टडी पीरियड में स्मॉल-कैप इंडेक्स एक बार भी मिड-कैप इंडेक्स से बेहतर नहीं रहा. चाहे आप कोई भी सात-वर्षीय अवधि चुनें - मिड कैप्स हर बार आगे निकले.

यहां तक कि बाज़ार में गिरावट के दौर में भी मिड-कैप्स ज़्यादा मज़बूत साबित हुए. उदाहरण के लिए, हालिया करेक्शन के दौर में जब भारतीय बाज़ार लगभग 19% गिरा (सितंबर 2024 से फ़रवरी 2025 के बीच), मिड-कैप इंडेक्स 20.5% गिरा जबकि स्मॉल-कैप इंडेक्स 24.6% लुढ़क गया.

कुल मिलाकर, मिड-कैप्स ने न सिर्फ़ लंबे समय में बेहतर ग्रोथ दी, बल्कि मार्केट शॉक्स को भी बेहतर तरीक़े से झेला.

क्यों आउटपरफ़ॉर्म करते हैं मिड कैप्स

इस लगातार बढ़त के कई स्ट्रक्चरल कारण हैं

1. ‘स्वीट स्पॉट’ का फ़ायदा: मिड-कैप कंपनियां आमतौर पर स्टार्टअप के फेज़ से आगे निकल चुकी होती हैं, लेकिन उनके पास अभी भी ग्रोथ की गुंजाइश होती है. ये कंपनियां अपना बिज़नेस मॉडल साबित कर चुकी होती हैं, संस्थागत निवेशकों को आकर्षित कर चुकी होती हैं और अक्सर स्केलेबल (यानि बढ़ने की क्षमता वाले) सेक्टरों में काम करती हैं.

वहीं स्मॉल-कैप कंपनियां ज़्यादातर नई, अस्थिर और एक खराब तिमाही में भी भारी उतार-चढ़ाव वाली होती हैं.

2. इंडेक्स की कमज़ोरी: स्मॉल-कैप इंडेक्स में आने वाली कई कंपनियों के बारे में सार्वजनिक जानकारी बहुत सीमित होती है. इसी कारण, इनके सलेक्शन की तरीक़ा बहुत सख़्त नहीं होता. कभी-कभी छोटी, कम लिक्विडिटी वाली या कमज़ोर प्रबंधन वाली कंपनियां भी अस्थायी स्टॉक रैली की वजह से इंडेक्स में शामिल हो जाती हैं - जिससे कुल इंडेक्स की क्वालिटी घट जाती है. इसके विपरीत, मिड-कैप इंडेक्स में तुलनात्मक रूप से स्थिर और मज़बूत कंपनियां शामिल होती हैं, जिससे इनका प्रदर्शन ज़्यादा टिकाऊ रहता है.

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निवेशकों के लिए क्या मायने हैं

नतीजा साफ़ हैं - मिड-कैप इंडेक्स न सिर्फ़ रिटर्न के मामले में, बल्कि स्थिरता के लिहाज़ से भी स्मॉल-कैप इंडेक्स से बेहतर रहा है.

पैसिव निवेशकों के लिए ये समझना बेहद अहम है. अगर आप मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स फ़ंड या ETF में से किसी एक को चुन रहे हैं, तो मिड-कैप इंडेक्स लंबी अवधि में बेहतर विकल्प है - ये ग्रोथ की संभावना देता है, लेकिन स्मॉल-कैप जैसी तेज़ अस्थिरता नहीं लाता.

हालांकि, इसका मतलब ये नहीं कि स्मॉल-कैप फ़ंड्स को नज़रअंदाज़ किया जाए. इंडेक्स स्तर पर स्मॉल-कैप्स पिछड़े हो सकते हैं, लेकिन एक्टिव स्मॉल-कैप फ़ंड्स अब भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. हमारे इसी सात-साल के रोलिंग डेटा (1,233 पीरियड्स) के एनालिसिस के अनुसार, 14 में से 13 एक्टिव स्मॉल-कैप फ़ंड्स ने निफ़्टी स्मॉलकैप 250 TRI से औसतन बेहतर प्रदर्शन किया.

यही वजह है कि एक्टिव फ़ंड मैनेजर्स कमज़ोर कंपनियों से बच सकते हैं, उभरते लीडर्स पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और समय-समय पर पोर्टफ़ोलियो को रीबैलेंस करते हैं - जो एक स्थिर इंडेक्स नहीं कर पाता.

इसलिए, पैसिव स्मॉल-कैप एक्सपोज़र कम आकर्षक दिख सकता है, लेकिन एक्टिव स्मॉल-कैप फ़ंड्स अब भी उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जिनकी जोखिम सहने की क्षमता ज़्यादा है और निवेश अवधि लंबी है.

SIP से शुरुआत करें

बिलकुल सही - मिड और स्मॉल-कैप फ़ंड्स दोनों में निवेश SIP के ज़रिए करना सबसे बेहतर होता है. हमारे हालिया एनालिसिस में ये भी सामने आया कि स्मॉल-कैप्स में SIP निवेश लम्पसम निवेश से कहीं बेहतर साबित हुआ.

अगर आप जानना चाहते हैं कि किन फ़ंड्स से शुरुआत करें, कौन-से पोर्टफ़ोलियो आपके लिए बेहतर होंगे और निवेश के लिए सही रणनीति क्या है - तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र को एक्सप्लोर करें. ये हमारी प्रीमियम सर्विस है जो आपको एक मज़बूत और अच्छा पोर्टफ़ोलियो बनाने में मदद करती है.

आज ही फ़ंड एडवाइज़र पर ग़ौर करें 

ये भी पढ़ेंः पैसिव फ़ंड्स क्यों ऐसे निवेशकों के लिए हैं बेस्ट, जो जल्दी परेशान हो जाते हैं?

ये लेख पहली बार अक्तूबर 15, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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