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सारांशः 4-स्टार और ख़राब साल. क्या फिर भी इन स्मॉल-कैप फ़ेवरेट में निवेश बनाए रखना सही है? (वैसे, निप्पॉन इंडिया स्मॉल-कैप भी इन्हीं में से एक है…)
इक्विटी फ़ंड्स कभी भी रंग बदल सकते हैं. और इन्हें रेट करने वाले हम जैसे लोग कभी-कभी थोड़ा असहज दिख सकते हैं.
स्मॉल-कैप फ़ंड्स को ही लीजिए. वैल्यू रिसर्च ने ऐसे छह फ़ंड्स को चार स्टार दिए हैं. लेकिन 2025 में इनमें से चार ने उम्मीद के मुताबिक़ प्रदर्शन नहीं किया. सबसे ज़्यादा झटका टाटा स्मॉल-कैप फ़ंड को लगा है, जो इस साल लगभग 6% नीचे गिर चुका है. यहां तक कि इस कैटेगरी का दिग्गज निप्पॉन इंडिया स्मॉल-कैप फ़ंड भी गिरावट से नहीं बचा. ये अब तक 2.1% गिर चुका है, हालांकि निफ़्टी स्मॉलकैप 250 TRI के 2.7% की गिरावट के मुक़ाबले ये कुछ बेहतर रहा है.
इन चार 4-स्टार फ़ंड्स का 2025 में अब तक का प्रदर्शन:
| फ़ंड | 2025 रिटर्न (%) |
|---|---|
| टाटा स्मॉल-कैप | -6 |
| फ़्रैंकलिन इंडिया स्मॉलर कंपनियां | -4.2 |
| निप्पॉन इंडिया स्मॉल-कैप | -2.1 |
| एडेलवाइस स्मॉल-कैप | -1 |
पर क्या ये गिरावट इन्हें “खराब फ़ंड” बना देती है? बिल्कुल नहीं.
वैल्यू रिसर्च की रेटिंग कैसे काम करती है
हमारी स्टार रेटिंग किसी एक बुरे साल या शॉर्ट-टर्म गिरावट पर आधारित नहीं होती.
ये किसी फ़ंड के लॉन्ग-टर्म, रिस्क एडजस्टेड परफ़ॉर्मेंस का क्वांटिटेटिव आकलन है, जो समान कैटेगरी के साथ तुलना करती है. सरल शब्दों में, रेटिंग दो चीज़ों को जोड़ती है - पहला, फ़ंड ने कितना रिटर्न दिया और दूसरा, वो रिटर्न हासिल करने में कितना जोखिम लिया. इससे बनता है “रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न स्कोर”.
किसी कैटेगरी के टॉप 10% फ़ंड्स को पांच स्टार और अगले 22.5% को चार स्टार मिलते हैं.
इक्विटी और हाइब्रिड फ़ंड्स के लिए हम तीन और पांच साल के प्रदर्शन को मिलाते हैं, जिसमें पांच साल को 60% वेटेज दिया जाता है. इसलिए जब किसी फ़ंड को 4 या 5-स्टार रेटिंग मिलती है, तो वो उसके लॉन्ग-टर्म निरंतर प्रदर्शन को दर्शाती है, न कि हालिया तिमाही को.
लेकिन याद रखें, रेटिंग किसी फ़ंड की शुरुआत है, न कि आख़िरी राय. निवेशक के लक्ष्य, समय और उतार-चढ़ाव झेलने की क्षमता उतनी ही अहम हैं.
इन फ़ंड्स की रेटिंग अभी भी क्यों ज़्यादा है?
जैसा कि कहा गया, 4 या 5-स्टार रेटिंग किसी फ़ंड के लॉन्ग-टर्म ट्रैक रिकॉर्ड को दर्शाती है, न कि उसके हाल के महीनों के प्रदर्शन को.
इसलिए हमें देखना चाहिए कि इन चार फ़ंड्स ने पिछले पांच साल, यानी 28 अक्तूबर 2020 से 28 अक्तूबर 2025 तक कैसा प्रदर्शन किया.
| फ़ंड | पांच साल का सालाना रिटर्न (%) |
|---|---|
| टाटा स्मॉल-कैप | 31.2 |
| एडेलवाइस स्मॉल-कैप | 30.8 |
| निप्पॉन इंडिया स्मॉल-कैप | 33.9 |
| फ़्रैंकलिन इंडिया स्मॉल कैप | 30 |
सभी फ़ंड्स ने स्मॉल-कैप इंडेक्स के 29.1% सालाना रिटर्न को पछाड़ा है. यही वजह है कि इनकी रेटिंग अब भी ऊंची है, भले ही 2025 अभी तक इनका साल नहीं रहा.
निरंतरता की जांच
अब सिर्फ़ पॉइंट-टू-पॉइंट रिटर्न पर न रुकें.
रोलिंग रिटर्न से पता चलता है कि कोई फ़ंड अलग-अलग अवधियों में कितना स्थिर प्रदर्शन करता है. ये किसी तय शुरुआत और अंत पर निर्भर नहीं रहता. ये तरीक़ा ज़्यादा निष्पक्ष है क्योंकि ये टाइमिंग की किस्मत को संतुलित करता है.
हमने 28 अक्तूबर 2020 से 28 अक्तूबर 2025 के बीच हर पांच साल की अवधि के रिटर्न देखे. जिन फ़ंड्स का 10 साल से ज़्यादा का रिकॉर्ड था, उनमें निप्पॉन इंडिया और फ़्रैंकलिन इंडिया शामिल थे.
- निप्पॉन इंडिया स्मॉल-कैप: औसतन 25.9% सालाना रिटर्न दिए, जबकि निफ़्टी स्मॉल-कैप इंडेक्स ने 18.6%. और सबसे दिलचस्प बात ये कि निप्पॉन इंडिया का फ़ंड पिछले पांच सालों की हर पांच वर्षीय अवधि में इंडेक्स को 100% बार पछाड़ने में सफ़ल रहा. मतलब हर बार ज़्यादा रिटर्न दिया. ये असाधारण निरंतरता है.
असल में, फ़ंड का पांच साल का रिटर्न 10 में से सात मौक़ों पर 20 प्रतिशत से ज़्यादा रहा है.
- फ़्रैंकलिन इंडिया स्मॉलर कंपनीज़: औसतन 19.5% रिटर्न दिए और इंडेक्स को 73% मौक़ों पर मात दी.
टाटा और एडेलवाइस स्मॉल-कैप फ़ंड्स का क्या?
ये दोनों फ़ंड तुलनात्मक रूप से नए हैं और इनके पास 10 साल का ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है. इसलिए हमने इनके कैलेंडर-ईयर के प्रदर्शन को देखा.
- टाटा स्मॉल-कैप फ़ंड (लॉन्च नवंबर 2018) ने अपने बेंचमार्क को छह में से चार साल मात दी.
- एडेलवाइस स्मॉल-कैप फ़ंड (लॉन्च फ़रवरी 2019) ने 2020 से अब तक छह में से पांच बार बेंचमार्क को पछाड़ा.
और जब उतार-चढ़ाव की बात आती है - जिसे स्टैंडर्ड डेविएशन (SD) के आधार पर मापा जाता है, तो दोनों फ़ंड अपने साथियों और इंडेक्स से ज़्यादा स्थिर रहे हैं. यानी इनके रिटर्न में उतार-चढ़ाव कम रहा है.
- टाटा: 16.05 प्रतिशत SD
- एडेलवाइस: 15.9 प्रतिशत SD
- कैटेगरी एवरेज: 17.05 प्रतिशत
- इंडेक्स: 18.9 प्रतिशत
हमारा नज़रिया
भले ही इन चार 4-स्टार फ़ंड्स के लिए साल 2025 अब तक उम्मीदों से कमतर रहा है, लेकिन किसी भी इक्विटी फ़ंड को एक साल के प्रदर्शन के आधार पर नहीं आंकना चाहिए. ये बात स्मॉल-कैप फ़ंड्स के लिए और भी सही है, जहां कम से कम सात साल की निवेश अवधि रखना समझदारी मानी जाती है. अगर आपकी निवेश अवधि इससे कम है, तो बेहतर होगा कि आप अन्य इक्विटी या हाइब्रिड फ़ंड्स पर विचार करें.
तो 5-स्टार स्मॉल-कैप फ़ंड्स का क्या हाल है?
अगर आप जानना चाहते हैं कि टॉप-रेटेड स्मॉल-कैप फ़ंड्स कैसा कर रहे हैं, तो वैल्यू रिसर्च की वेबसाइट पर पूरी लिस्ट देख सकते हैं. यहां आप इनके शॉर्ट और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के पॉइंट-टू-पॉइंट प्रदर्शन देख सकते हैं और जान सकते हैं कि अलग-अलग मार्केट साइकल में इनका ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है.
अगर आप इन फ़ंड्स के रोलिंग रिटर्न को गहराई से समझना चाहते हैं - जो पॉइंट-टू-पॉइंट डेटा से कहीं ज़्यादा भरोसेमंद तरीक़ा है - तो ये सब वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है.
ये भी पढ़ें: इस स्मॉल-कैप फ़ंड को हमने दी 4-स्टार रेटिंग
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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