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सारांशः पांच फोकस्ड फ़ंड ₹10,000 करोड़ से ज़्यादा एसेट्स मैनेज कर रहे हैं, फिर भी ये कैटेगरी फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स की तुलना में काफ़ी छोटी है. क्या इनसे दूर रहने वाले निवेशक सही हैं या फ़ोकस्ड फ़ंड वाक़ई एक छिपा हुआ अवसर हैं? एक दशक के प्रदर्शन और उतार-चढ़ाव के आंकड़े इस पर रोशनी डालते हैं.
फ़ोकस्ड फ़ंड और फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में अंतर बहुत मामूली है. दोनों ही लार्ज, मिड और स्मॉल कैप शेयरों में निवेश कर सकते हैं. मुख्य फ़र्क़ ये है कि फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड जितने चाहें उतने शेयर रख सकते हैं, जबकि फ़ोकस्ड फ़ंड को 30 शेयरों की सीमा में रहना पड़ता है.
दोनों की निवेश रणनीति लगभग समान होने के बावजूद, निवेशकों की पसंद साफ़ है. म्यूचुअल फ़ंड्स के संगठन (AMFI) के अनुसार, 30 सितंबर 2025 तक फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स के पास ₹5.12 लाख करोड़ की एसेट्स हैं, जबकि फ़ोकस्ड फ़ंड्स का साइज़ सिर्फ़ ₹1.63 लाख करोड़ है -यानी लगभग तीन गुना कम.
तो क्या निवेशक एक संभावित अवसर को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं? आइए देखते हैं.
10 साल का प्रदर्शन
हमने फ़ंड्स के 5-ईयर रोलिंग रिटर्न्स के आधार पर कैलकुलेशन की, जो प्रदर्शन मापने का एक अधिक सटीक तरीक़ा है. असल में, ये केवल किसी एक बिंदु पर नहीं, बल्कि समय के साथ प्रदर्शन की निरंतरता को दिखाता है.
इसे ऐसे समझें - अगर आप सिर्फ़ एक एग्जाम का रिज़ल्ट देखें तो तस्वीर अधूरी होगी, लेकिन कई वर्षों के औसत अंकों से स्थिरता का असली अंदाज़ा मिलता है. यही रोलिंग रिटर्न करते हैं. 10 साल की हिस्ट्री वाले 13 फ़ोकस्ड फ़ंड्स ने औसतन 16.4% वार्षिक रिटर्न दिया.
वहीं समान अवधि वाले 18 फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स का औसत रिटर्न 17.1% रहा. इससे साफ़ है कि प्रदर्शन में फ़्लेक्सी-कैप्स को मामूली बढ़त मिली है.
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एक ही फ़ंड हाउस के भीतर तुलना
एनालिसिस को और दिलचस्प बनाने के लिए हमने आठ फंड हाउस के ऐसे पेयर देखे, जिनके पास 10 साल का रिकॉर्ड वाला एक फ़ोकस्ड और एक फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड था.
नतीजा बराबरी का रहा - चार फ़ोकस्ड फ़ंड जीते और चार फ़्लेक्सी-कैप्स ने बढ़त हासिल की.
लेकिन जब अस्थिरता (volatility) यानी स्टैंडर्ड डेविएशन (standard deviation) को शामिल किया गया, तो सिर्फ़ दो फोकस्ड फ़ंड ही अपने इन-हाउस फ़्लेक्सी-कैप प्रतिद्वंद्वियों को रिटर्न और स्थिरता दोनों में पछाड़ सके.
ध्यान रखने की बात है कि ऊंचे स्टैंडर्ड डेविएशन का मतलब रिटर्न में ज़्यादा उतार-चढ़ाव होता है; जबकि कम डेविएशन का मतलब है स्थिर और संतुलित प्रदर्शन.
एक ही AMC के फ़्लेक्सी कैप और फ़ोकस्ड फ़ंड्स की तुलना
| फ़ंड हाउस | फ़्लेक्सी कैप रिटर्न | फ़्लेक्सी कैप का स्टैंडर्ड डेविएशन | फ़ोकस्ड का रिटर्न | फ़ोकस्ड का स्टैंडर्ड डेविएशन | कौन रहा बेहतर |
|---|---|---|---|---|---|
| ABSL | 16 | 17.3 | 15.4 | 15.9 | Flexi |
| Bandhan | 13.4 | 15.9 | 14.7 | 16.5 | Focused |
| DSP | 17.5 | 17.6 | 14.3 | 17.8 | Flexi |
| Franklin India | 17.5 | 16.6 | 17.8 | 18 | Focused |
| HDFC | 18.6 | 18.4 | 17.2 | 17.9 | Flexi |
| JM | 19.6 | 17.3 | 14.3 | 19.8 | Flexi |
| Motilal Oswal | 13.1 | 17.3 | 14.1 | 17.1 | Focused |
| SBI | 15.5 | 16.1 | 17.3 | 15.7 | Focused |
| नोट: डायरेक्ट प्लान्स; रिटर्न 5-ईयर डेली रोलिंग रिटर्न पर आधारित हैं; स्टैंडर्ड डेविएशन पिछले 10 वर्षों पर आधारित है | |||||
अस्थिरता का टेस्ट
बड़ी तस्वीर देखें तो फ़ोकस्ड फ़ंड्स की वोलैटिलिटी थोड़ी ज़्यादा रही है.
पिछले 10 वर्षों में इनका स्टैंडर्ड डेविएशन 17.3%, जबकि फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स का 16.6% रहा.
अतिरिक्त उतार-चढ़ाव के कारण क्या हैं? असल में, फ़ोकस्ड फ़ंड्स में निवेश ज़्यादा केंद्रित होता है. 30 शेयरों की सीमा होने के कारण किसी एक कंपनी के ख़राब प्रदर्शन का असर पूरे पोर्टफ़ोलियो पर ज़्यादा पड़ता है.
वहीं, फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स औसतन 60 शेयरों में निवेश करते हैं, जिससे जोखिम का फैलाव बेहतर हो जाता है.
आखिरी बात
औसतन, फ़ोकस्ड फ़ंड्स ने फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स की तुलना में थोड़े कम रिटर्न और थोड़ा ज़्यादा उतार-चढ़ाव दिखाया है.
लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया जाए. कुछ फ़ोकस्ड फ़ंड्स ने ऊंचा रिटर्न और कम अस्थिरता - दोनों का बेहतरीन संयोजन पेश किया है.
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