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सारांशः अगर 10 साल पहले ₹1 लाख इन दो मिड-कैप स्टॉक्स में लगाए गए होते, तो आज वो ₹6 लाख से ज़्यादा के हो गए होते. यानी इन्होंने निवेशकों की संपत्ति को 6 से 9 गुना तक बढ़ाया है. फिर भी इनका वैल्यूएशन हैरान करने वाला रूप से कम है. नीचे जानिए कौन से दो स्टॉक्स हमारे ग्रोथ और वैल्यू के टेस्ट में पास हुए.
जब मिड-कैप स्टॉक्स की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हों, तब ऐसे स्टॉक्स खोजना जो लगातार निवेशकों की संपत्ति बढ़ा रहे हों और फिर भी वाजिब दाम पर मिल रहे हों, बहुत मुश्किल है. लेकिन हमारे नए स्क्रीन ने ऐसे दो ‘शांत कंपाउंडर’ दिखाए हैं.
वैल्यू रिसर्च स्टॉक स्क्रीनर का इस्तेमाल करते हुए हमने मिड-कैप कंपनियों में उन्हें खोजा जो:
- पिछले 10 सालों में कम से कम 20% का सालाना रिटर्न दे चुकी हैं.
- जिनका वैल्यूएशन स्कोर सात या उससे ज़्यादा है. यानी अपनी पिछली परफ़ॉर्मेंस के बावजूद ये अभी भी वाजिब दाम पर उपलब्ध हैं.
नतीजा? सिर्फ़ दो नाम इस लिस्ट में आए.
दोनों कंपनियों ने पिछले दशक में निवेशकों की संपत्ति को 6–9 गुना बढ़ाया है, वो भी लगातार कमाई और अच्छे रिटर्न के साथ. फिर भी इनका मौजूदा P/E मल्टिपल - क़रीब 7 गुना और 10 गुना - अपने पांच साल के औसत के आसपास है और मार्केट में दिख रही ओवरवैल्यूएशन का असर इनमें नहीं दिखता.
ये रहे वो दो मिड-कैप स्टॉक्स जिन्होंने टेस्ट पास किया:
1) चंबल फ़र्टिलाइज़र्स एंड केमिकल्स
चंबल फ़र्टिलाइज़र्स एंड केमिकल्स भारत की प्रमुख प्राइवेट यूरिया निर्माता कंपनी है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 13% हिस्सा रखती है. राजस्थान में इसकी तीन प्लांट्स की कुल क्षमता 3.4 मिलियन टन है. ये यूनिट्स देश के कई कृषि राज्यों में यूरिया की बड़ी सप्लायर हैं.
उत्तर भारत में फैले मज़बूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की वजह से कंपनी ने अच्छी प्रॉफ़िटेबिलिटी बनाए रखी है - पिछले पांच सालों में औसत ROE (इक्विटी पर रिटर्न) 24% और ROCE (लगाई गई पूंजी पर रिटर्न) 22% रहा है. लगातार बढ़ता EPS (प्रति शेयर कमाई) और ट्रेडिंग-मन्युफ़ैक्चरिंग का संतुलित मिश्रण इसकी मज़बूत ऑपरेशंस को दिखाता है.
2) नेशनल एल्युमिनियम कंपनी
नेशनल एल्युमिनियम कंपनी (NALCO) एक ऐसी मेटल कंपनी है जो पूरी तरह आत्मनिर्भर है - खुद बॉक्साइट निकालती है, उसे एल्युमिना में बदलती है और फिर उससे एल्युमिनियम बनाती है. इसकी बिजली और कोयले की ज़रूरतें भी खुद के संसाधनों से पूरी होती हैं.
एल्युमिनियम से कंपनी की लगभग तीन-चौथाई आय आती है और इसके ऑपरेशंस पूरी क्षमता पर चल रहे हैं. मज़बूत कमाई के दौर के बाद अब NALCO ₹30,000 करोड़ का निवेश कर रही है ताकि रिफ़ाइनिंग और स्मेल्टिंग क्षमता बढ़ाई जा सके. जिससे आगे की ग्रोथ की तैयारी हो रही है.
| कंपनी | 10 साल का रिटर्न (सालाना %) | P/E | रेटिंग | क्वालिटी स्कोर | ग्रोथ स्कोर | वैल्यूएशन स्कोर | मोमेंटम स्कोर |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चंबल फ़र्टिलाइज़र्स एंड केमिकल्स | 24.13 | 10.29 | 04-मई | 09-अक्टूबर | 06-अक्टूबर | 08-अक्टूबर | 01-अक्टूबर |
| नेशनल एल्युमिनियम कंपनी | 20.03 | 7.54 | 05-मई | 10-अक्टूबर | 09-अक्टूबर | 07-अक्टूबर | 09-अक्टूबर |
| डेटा 6 नवंबर 2025 तक का है | |||||||
दोनों कंपनियां न सिर्फ़ लंबे समय के शेयर प्राइस परफ़ॉर्मेंस और वाजिब वैल्यूएशन के लिए जानी जाती हैं, बल्कि वैल्यू रिसर्च के रेटिंग पैरामीटर्स में भी मज़बूत प्रदर्शन करती हैं. दोनों का क्वालिटी और वैल्यूएशन स्कोर ऊंचा है - जो दिखाता है कि इनकी बुनियाद, कैपिटल एलोकेशन और बैलेंस शीट सब मज़बूत हैं.
| स्टॉक | 5 साल का EPS ग्रोथ (सालाना %) | औसत ROE (5 का साल %) | औसत ROCE (5 का साल %) |
|---|---|---|---|
| चंबल फ़र्टिलाइज़र्स एंड केमिकल्स | 6.48 | 24.09 | 22.51 |
| नेशनल एल्युमिनियम कंपनी | 153.99 | 19.27 | 25.06 |
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