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2 दमदार मिड-कैप कंपनियां, जिनका रेवेन्यू 5 साल में 13 गुना और 123 गुना बढ़ा

वैल्यू रिसर्च रेटिंग में टॉप और पिछले पांच वर्षों में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली दो मिड कैप कंपनियां

वैल्यू रिसर्च रेटिंग में टॉप और पिछले पांच वर्षों में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली दो मिड कैप कंपनियांAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः पिछले पांच सालों में, एक मिड कैप कंपनी का रेवेन्यू 100 गुना से ज़्यादा बढ़ा है, जबकि दूसरी ने 13 गुना की छलांग लगाई है. ये ऐसा उछाल है, जिसकी कल्पना कम ही लोगों ने की होगी. कौन हैं ये अपवाद और किन वजहों ने इन्हें आगे बढ़ाया? नीचे जानते हैं विस्तार से.

रेवेन्यू में दमदार बढ़ोतरी अक्सर बिज़नेस में मज़बूत मोमेंटम का संकेत होती है. ये मांग की ताक़त और कंपनी की स्केलेबिलिटी (विस्तार क्षमता) को दिखाती है.

मिड कैप कंपनियों के मामले में ये संकेत और अहम हो जाता है. ये कंपनियां उस मोड़ पर होती हैं जहां वे स्टार्टअप चरण से आगे निकल चुकी होती हैं, लेकिन अब भी इतनी छोटी कि तेज़ी से विस्तार कर सकें. अगर मिड कैप कंपनियां लगातार तेज़ी से रेवेन्यू बढ़ा रही हैं, तो संभव है कि वे बड़े उछाल के मुहाने पर हों.

ऐसी कंपनियों को पहचानने के लिए हमने वैल्यू रिसर्च स्टॉक स्क्रीनर पर दो फ़िल्टर लगाए:

  • ऐसी मिड कैप कंपनियां जिनकी 5 साल की सालाना रेवेन्यू ग्रोथ 50% से ज़्यादा रही हो - यानी पांच साल में कम से कम सात गुनी बिक्री.
  • और जिनकी वैल्यू रिसर्च स्टॉक रेटिंग में 5 में से 5-स्टार रेटिंग हो - ताकि बैलेंस शीट और ऑपरेशनल क्वालिटी मज़बूत रहे.

BFSI (बैंकिंग, फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ और इंश्योरेंस) सेक्टर को छोड़ दें तो सिर्फ़ 10 कंपनियां पहली कसौटी पर खरी उतरीं. लेकिन इनमें से किसी को भी पूरी 5-स्टार रेटिंग नहीं मिली.

इसलिए हमने उन दो कंपनियों को चुना जिन्हें 4-स्टार रेटिंग मिली है. दिलचस्प बात ये है कि दोनों को अंतिम स्टार केवल वैल्यूएशन स्कोर की वजह से नहीं मिला - यानी मार्केट पहले ही इनके तेज़ ग्रोथ को पहचान चुका है.

फिर भी, रेटिंग्स बदल सकती हैं. अगर वैल्यूएशन थोड़ा ठंडा पड़े या फ़ंडामेंटल्स और मज़बूत हों, तो ये स्टॉक्स और आकर्षक बन सकते हैं.

फ़िलहाल, वे आपके रिसर्च रडार पर एक स्थान के हकदार हैं - उदाहरण के तौर पर, मिड कैप में जैसी ऊंची क्वालिटी वाली ग्रोथ दिखती है.

1) महाराष्ट्र स्कूटर्स: बजाज एम्पायर की शांत प्रतिनिधि

जो कंपनी अब स्कूटर बनाना बंद कर चुकी है, उसने खुद को एक नए रूप में ढाल लिया है. महाराष्ट्र स्कूटर्स पहले दोपहिया उद्योग के लिए पार्ट्स बनाती थी, लेकिन अब ये एक होल्डिंग कंपनी बन चुकी है.

इसकी 90% से ज़्यादा एसेट्स निवेशों में लगी है - खास तौर पर बजाज ऑटो, बजाज फ़िनसर्व, बजाज फ़ाइनेंस और बजाज होल्डिंग्स एंड इन्वेस्टमेंट में. बाकी हिस्सा ऊंची क्वालिटी वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगा है. पहले घाटे में रहा मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट, अब पूरी तरह बंद किया जा चुका है.

अब इसकी ग्रोथ प्रोडक्ट सेल्स से नहीं, बल्कि निवेशित कंपनियों के प्रदर्शन, पूंजी लाभ और डिविडेंड से तय होती है. यानी ये निवेशकों को बजाज ग्रुप की फ़ाइनेंशियल और ऑटोमोबाइल कंपनियों में अप्रत्यक्ष निवेश का अवसर देती है, जो एक तरह से कम लागत वाला बजाज ग्रुप प्रॉक्सी है.

हालांकि, ज़्यादातर होल्डिंग कंपनियों की तरह, इसका स्ट्रक्चर कुछ अकाउंटिंग की विसंगतियां पैदा करता है - यानी इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) कम दिखाई देता है क्योंकि निवेश आधार बहुत बड़ा है. दिलचस्प ये है कि इसके नेट इन्वेस्टमेंट्स इसकी मौजूदा मार्केट कैप से ज़्यादा हैं, यानी शेयर अपने बुक वैल्यू से छूट पर ट्रेड कर रहा है - ये एक क्लासिक होल्डिंग डिस्काउंट है, जो समय के साथ वैल्यू अनलॉक कर सकता है.

2) वारी रिन्यूएबल: भारत की सौर क्रांति की सवारी

भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्रांति की कहानी में अगर किसी नाम का ज़िक्र ज़रूर होना चाहिए, तो वो है वारी रिन्यूएबल्स टेक्नोलॉजीज़. 1999 में स्थापित और वारी ग्रुप से जुड़ी ये कंपनी अब भारत की अग्रणी सोलर EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) कंपनियों में से एक है.

हमने इसकी ग्रोथ 2021 से मानी है, जब कंपनी नए स्वामित्व में आई और वारी एनर्जीज़ का हिस्सा बनी. इससे पहले ये संगम रिन्यूएबल्स नाम से एक अलग इकाई थी - उन वर्षों को इस विश्लेषण में शामिल नहीं किया गया है.

आज कंपनी के पास 12 GW की भारत की सबसे बड़ी सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है और ये मैन्युफैक्चरिंग व प्रोजेक्ट एक्सिक्यूशन दोनों में सक्रिय है. इसका EPC बिज़नेस, जो कुल रेवेन्यू का लगभग 98% हिस्सा है, अदाणी, रिलायंस, एलएंडटी, NTPC और मुंबई मेट्रो जैसे बड़े क्लाइंट्स को टर्नकी सोलर प्रोजेक्ट्स देता है.

इसकी ऑर्डर बुक भी तेज़ी दर्शाती है. उसके पास फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की पहली तिमाही तक 3,100 MWp से ज़्यादा का अनएक्ज़ीक्यूटेड पाइपलाइन, जो दो वर्षों में लगभग चार गुना बढ़ी है. हालांकि EPC मार्जिन आमतौर पर कम होते हैं, लेकिन वारी की स्केल, एक्सिक्यूशन ट्रैक रिकॉर्ड और शीर्ष कॉर्पोरेट्स से साझेदारी इसे मज़बूती देती है.

भारत में ग्रीन एनर्जी अब इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ का केंद्र बन चुकी है और वारी रिन्यूएबल इस बदलाव की लहर पर मज़बूती से सवार है.

कंपनी मार्केट कैप (करोड़ ₹) 5 साल की रेवेन्यू ग्रोथ (% सालाना) कुल रेवेन्यू ग्रोथ (गुनी) क्वालिटी स्कोर ग्रोथ स्कोर वैल्यूएशन स्कोर मोमेंटम स्कोर
महाराष्ट्र स्कूटर्स 18514 68 13 8 7 2 10
वारी रिन्यूएबल* 13097 233 123 8 8 5 6
*वारी रिन्यूएबल के लिए फ़ाइनेंशियल ईयर 2021 से फ़ाइनेंशियल ईयर 2025 तक रेवेन्यू में बढ़ोतरी पर विचार किया गया

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स्क्रीनिंग टूल्स स्टॉक रेकमेंडेशन नहीं देते - वे निवेशकों को बुद्धिमानी से ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं. डेटा के ज़रिए शोर को अलग करके, आप उन कंपनियों तक पहुंच सकते हैं जिन पर रिसर्च करना वाकई सार्थक है.

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