फंड वायर

वे सुपरहिट शेयर जिन्होंने पराग पारिख फ़्लेक्सी कैप को स्टार बनाया

हमने फंड के लॉन्ग-टर्म वेल्थ बिल्डर्स, शॉर्ट-टर्म स्प्रिंटर्स, सेक्टर्स और ग्लोबल एलोकेशन्स की पहचान की, जिन्होंने फंड के लॉन्ग-टर्म रिकॉर्ड को शानदार बनाया है

हीरो स्टॉक्स जिसने पराग पारिख फ़्लेक्सी कैप को स्टार बनायाAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः हर कोई जानता है कि Parag Parikh Flexi Cap एक बेहतरीन फ़ंड है. लेकिन ज़्यादातर निवेशक वो असली इंजन नहीं देखते जो इस प्रदर्शन को चलाता है - वे स्टॉक्स जो चुपचाप 10 साल तक कंपाउंड होते रहे, वे छोटे समय के दांव जो बिल्कुल सही समय पर चले और वे विदेशी दिग्गज जो भारतीय बाज़ार लड़खड़ाने पर भी रिटर्न को स्थिर रखते रहे.

अगर कोई व्यक्ति ये समझना चाहता है कि इस फ़ंड की लॉन्ग-टर्म बढ़त को असल में क्या चलाता है (और क्या ये आगे भी ऐसा कर पाएगा), तो उसे ये पढ़ना चाहिए.

क्या इस फ़ंड को किसी परिचय की ज़रूरत भी है? इस स्तर पर, Parag Parikh Flexi Cap एक जाना-पहचाना नाम है. ये ₹1.2 लाख करोड़ से ज़्यादा मैनेज करता है, इसे इतना भरोसा हासिल है जो बहुत कम फ़ंड हासिल कर पाते हैं और अब वही पैमाना है जिससे अन्य फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड खुद को नापते हैं. इसके लंबे समय के रिटर्न (10-साल के रिटर्न देखें), गिरते बाज़ारों में इसका व्यवहार (इसकी स्थिरता देखें) और इसका भरोसे पर आधारित पोर्टफ़ोलियो (इंटरव्यू देखें) सब कुछ आपके सामने है.

इसलिए हमने इस आउटपरफ़ॉर्मेंस के असली इंजन को गहराई से समझने के लिए एनालेसिस किया. हमने उन स्टॉक्स को देखा जो सालों से पोर्टफ़ोलियो में बने रहे और लगातार कंपाउंड हुए, फ़ंड में बेहद कम बदलाव और वो ग्लोबल एलोकेशन देखने को मिला जो इसे भीड़ भरे बाज़ार में अलग बनाता है.

सदाबहार ख़ूबी: 10 साल या ज़्यादा समय तक होल्ड शेयर

Parag Parikh Flexi Cap उन दुर्लभ फ़ंड्स में से है जो सच में बाई-एंड-होल्ड (buy-and-hold) की रणनीति पर चलते हैं. जिन 159 स्टॉक्स को ये फ़ंड कभी भी होल्ड कर चुका है, उनमें से 28 स्टॉक्स कम-से-कम 10 साल तक पोर्टफ़ोलियो में रहे. और इस लॉन्ग-टर्म समूह ने ही सबसे ज़्यादा काम किया: 22.6 प्रतिशत XIRR बनाम BSE 500 TRI (बेंचमार्क) के 17 प्रतिशत.

(XIRR का एक छोटा सा मतलब. ये बस बताता है कि किसी निवेश पर असल में कितना रिटर्न मिला, वो भी असली कैशफ़्लो को ध्यान में रखकर: कब ज़्यादा ख़रीदा, कब बेचा, एलोकेशन कैसे बदले. ये एब्सॉल्यूट (absolute) या प्वाइंट-टू-प्वाइंट रिटर्न के मुकाबले ज़्यादा ईमानदार मेट्रिक है.)

इन लॉन्ग-टर्म चैंपियन्स में पांच नाम सबसे आगे निकलते हैं:

  • Maharashtra Scooters (120 महीने होल्ड): 54.96 प्रतिशत XIRR बनाम 16.03 प्रतिशत (BSE 500 TRI).
  • Persistent Systems (87 महीने): 56.10 प्रतिशत बनाम 19.99 प्रतिशत.
  • Central Depository Services (76 महीने): 56.07 प्रतिशत बनाम 20.24 प्रतिशत.
  • Mphasis (103 महीने): 45.23 प्रतिशत बनाम 23.93 प्रतिशत.
  • Zydus Wellness (94 महीने): 36.53 प्रतिशत बनाम 16.98 प्रतिशत.

लगभग 1.8 प्रतिशत एलोकेशन वाले Mphasis को छोड़कर, बाक़ी सभी पोर्टफ़ोलियो में मजबूत हिस्सेदारी थी - 3 प्रतिशत (Maharashtra Scooters) से 4.7 प्रतिशत (Persistent Systems) के बीच. इनका 35–40 प्रतिशत अतिरिक्त प्रदर्शन फ़ंड के लंबे समय के रिटर्न को स्पष्ट रूप से ऊपर ले गया.

हमने उन सभी स्टॉक्स को अलग से देखा जिन्हें फ़ंड ने 100 महीने से ज़्यादा समय तक होल्ड किया. यहां भी इन स्टॉक्स ने इंडेक्स को शानदार तरीके से पीछे छोड़ा - 21.7 प्रतिशत XIRR बनाम इंडेक्स का 16.2 प्रतिशत.

लेकिन फ़ंड की कुछ कमजोरियां भी रहीं. इन 11 लॉन्ग-टर्म होल्डिंग्स में से सिर्फ़ छह ने ही इंडेक्स को हराया, जो दिखाता है कि पर्याप्त लॉन्ग-टर्म अल्फ़ा होने के बावजूद सफलता की दर परफ़ेक्ट नहीं होती. कुछ कमज़ोर शेयर रहे - Balkrishna Industries, जो बेंचमार्क से 10 प्रतिशत पीछे रहा और HDFC Bank में हैरान करने वाली गिरावट रही, जो 4.6 प्रतिशत पीछे रहा.

और एक महत्वपूर्ण बात: ये XIRR-आधारित नंबर हैं. इसका मतलब है कि कोई स्टॉक भले ही एनुलाइज़ या एब्सॉल्यूट रिटर्न में अच्छा दिखे, फिर भी XIRR में निराश कर सकता है. क्यों? क्योंकि XIRR ये बताता है कि कब ज़्यादा और कब कम निवेश किया. ये असल रिटर्न (time-weighted), कैश फ़्लो के प्रति जागरूकता का माप है. अगर फ़ंड ने किसी स्टॉक को उसके कमज़ोर सालों में ज़्यादा होल्ड किया और अच्छे समय में उसे कम कर दिया, तो XIRR उसी ग़लत अनुमान को दिखाता है.

मतलब साफ़ है - XIRR असली कहानी बताता है, न कि वह theoretical रिटर्न जो सिर्फ़ कागज़ पर दिखता है.

छोटी रेस के घोड़े

कम बदलाव के लिए मशहूर इस फ़ंड में कुछ हालिया शॉर्ट टर्म के दांव ने चौंकाने वाला प्रदर्शन दिया है. वास्तव में, एक साल से भी कम समय होल्ड किए गए 10 स्टॉक्स ने BSE 500 TRI के XIRR को 100 प्रतिशत से ज़्यादा पीछे छोड़ा.

सबसे आगे हैं:

  • Shriram Finance (2 महीने): 317.96 प्रतिशत बनाम 23.68 प्रतिशत.
  • Federal Bank (2 महीने): 270.23 प्रतिशत बनाम 23.68 प्रतिशत.
  • Manappuram Finance (3 महीने): 180.10 प्रतिशत बनाम –24.28 प्रतिशत.
  • CAMS (10 महीने): 211.21 प्रतिशत बनाम 58.12 प्रतिशत.
  • Ultratech Cement (1 महीना): 229.00 प्रतिशत बनाम 79.84 प्रतिशत.
  • RBL Bank (5 महीने): 159.37 प्रतिशत बनाम 13.06 प्रतिशत.
  • Nesco (6 महीने): 142.37 प्रतिशत बनाम 10.10 प्रतिशत.
  • Hindustan Unilever (36 महीने): 134.49 प्रतिशत बनाम 24.26 प्रतिशत.

भले ही उसका XIRR लगभग 7,000 प्रतिशत दिखता है, लेकिन Intellect Design Arena को हमने बाहर रखा है. ये लगभग निश्चित रूप से कम बेस की वजह से है. इससे ख़ास मायने निकाले नहीं जा सकते. ये एक प्रकार की नज़र आने वाली तेज़ी है जो आपको कौशल की तुलना में समय की विचित्रताओं के बारे में ज़्यादा बताती है.

बाक़ी कम समय के दांव (sprinters) में ज़्यादातर सिर्फ़ दो-तीन महीने होल्ड किए गए थे. लेकिन कुछ अपवाद भी हैं - CAMS, Nesco और Hindustan Unilever कम-से-कम छह महीने तक पोर्टफ़ोलियो में रहे. HUL यहां ख़ास है. एक डिफेंसिव, टिकाऊ कंपाउंडर होने के बावजूद इसने तीन साल में बेंचमार्क को 100 प्रतिशत से ज़्यादा पीछे छोड़ा, जो इतनी बड़ी कंपनी के लिए असाधारण है.

हक़ीक़त में हर शॉर्ट टर्म का दांव सफल नहीं होता. सबसे ज़्यादा कमज़ोर प्रदर्शन करने वाला GlaxoSmithKline Pharmaceuticals रहा, जिसने सिर्फ़ तीन महीनों में बेंचमार्क से 100 प्रतिशत से भी ज़्यादा कम दिया. ये बताता है कि सुरक्षित माने जाने वाले नाम भी ग़लत एंट्री के टाइम पर निराश कर सकते हैं. Trent और Dabur भी पीछे रहने वाले प्रमुख शेयरों में रहे.

सेक्टर्स: कहां चूके, कहां फ़ायदे में

लॉन्ग-टर्म में फ़ाइनेंशियल्स की तरफ फ़ंड का झुकाव बहुत फ़ायदेमंद रहा. ये समूह-बैंक, NBFCs, बीमा, AMCs-ने 47.2 प्रतिशत XIRR दिया, जबकि बेंचमार्क 16.4 प्रतिशत रहा.

ऑटोमोबाइल्स भी एक मज़बूत अल्फ़ा इंजन रहा है. औसत एलोकेशन 2.1 प्रतिशत और 75 प्रतिशत सक्सेस रेट. Maharashtra Scooters (+38.9 प्रतिशत) और Eicher Motors (+41.6 प्रतिशत) ने इस आउटपरफ़ॉर्मेंस को आगे बढ़ाया.

Gujarat Gas और Indraprastha Gas जैसे लॉन्ग-टर्म होल्डिंग्स की वजह से एनर्जी ने भी 14 प्रतिशत से ज़्यादा औसत आउटपरफ़ॉर्मेंस दी.

इसके उलट, टेक्नोलॉजी- जो फ़ंड का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोज़र है - उतना फ़ायदेमंद नहीं रहा. इस कैटेगरी ने 20.9 प्रतिशत दिया, जबकि बेंचमार्क ने 25.9 प्रतिशत दिया. इसकी वजह मुख्य रूप से TCS (–24.89 प्रतिशत, 30 महीने) और Infosys (–2.11 प्रतिशत, 38 महीने) रहे.

वैश्विक स्तर पर बढ़त

जो चीज़ Parag Parikh Flexi Cap को सच में अलग बनाती है, वो इसका ग्लोबल एलोकेशन है. इसकी 10–33 प्रतिशत तक की रक़म विदेशी इक्विटी में लगाई गई है. लेकिन ये डाइवर्सिफ़िकेशन सिर्फ़ दिखावे के लिए नहीं. इसका दुनिया के सबसे मज़बूत कंपाउंडर्स में कॉन्संट्रेशन है.

लगातार ग्लोबल टेक लीडर्स पर बड़ा एलोकेशन देते हुए फ़ंड ने दो फ़ायदे हासिल किए - स्थिरता और तेज़ी.

  • Alphabet (Class C): 33.2 प्रतिशत XIRR (68 महीने). औसतन 10 प्रतिशत से ज़्यादा एलोकेशन.
  • Alphabet (Class A): 30.02 प्रतिशत (54 महीने).
  • Amazon: 21.82 प्रतिशत (82 महीने).
  • Microsoft: 17.87 प्रतिशत (67 महीने).
  • Meta: 22.3 प्रतिशत (8 साल 4 महीने).

ये ग्लोबल निवेश इस फ़ंड के लिए स्थायित्व देने वाला और बूस्टर भी रहा . इसने घरेलू उतार-चढ़ाव की भी भरपाई की और पोर्टफ़ोलियो को दुनिया की सबसे भरोसेमंद अर्निंग मशींस से जोड़े रखा.

बड़ी तस्वीर क्या कहती है?

Parag Parikh Flexi Cap की कहानी सिर्फ़ सही स्टॉक्स चुनने की कहानी नहीं है. ये समय, धैर्य, बहुत कम बदलाव और ग्लोबल एक्सपोज़र के समझदार इस्तेमाल की कहानी है.

इसके एक दशक के कंपाउंडर्स ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, इसकी शॉर्ट-टर्म की रणनीतिक कॉल सही साबित हुईं और इसके ग्लोबल दिग्गजों ने एक ऐसा स्थायित्व दिया जो घरेलू फ़ंड कम ही दे पाते हैं.

लगातार शोर वाले इस दौर में ये फ़ंड एक सरल सच दिखाता है: कॉन्विक्शन यानि भरोसा, जब उसे अनुशासन के साथ जोड़ा जाए, तो जीतता ही है.

क्या हमने इस फ़ंड को रेकमंड किया है?

एक उचित सवाल जो अनुभवी निवेशक पूछते हैं: क्या इतना बड़ा हो चुका फ़ंड अब भी तेज़ी और लचीलापन दिखा सकता है? जब कोई स्कीम बड़ा कॉर्पस मैनेज करती है, तो आलोचकों को लगता है कि उसकी सक्रियता कम हो जाती है. बड़ी रक़म को सही मौक़ों में तुरंत लगाना कठिन भी होता है और समय के साथ ये प्रदर्शन पर असर डाल सकता है.

इसके अलावा, फ़ंड का लगभग 20 प्रतिशत तक की कैश कॉल्स लेने का लंबा इतिहास रहा है. ऐसा कैश रखना तेज़ गिरावट में बचाता है, लेकिन मज़बूत रैली में ये नुकसान भी पहुंचा सकता है.

तो बड़ा सवाल ये है: क्या इसका शानदार अतीत भविष्य की भी गारंटी है? ज़रूरी नहीं. और इसी वजह से किसी व्यक्ति को सिर्फ़ अतीत के रिटर्न पर भरोसा नहीं करना चाहिए.

अगर कोई व्यक्ति ज़्यादा स्पष्ट, ज़्यादा व्यक्तिगत जवाब चाहता है, तो हमारे वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र के एनालिस्ट ये काम पहले ही कर चुके हैं. वे हज़ारों डेटा प्वाइंट्स जांचते हैं, शोर को हटाते हैं और वही फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड चुनते हैं जो किसी निवेशक के गोल्स, रिस्क लेने की क्षमता और निवेश के होराइज़न से मेल खाते हों - न कि सिर्फ़ वे जो हाल में अच्छे दिख रहे हों.

ये सबसे आसान तरीका है ये सुनिश्चित करने का कि कोई व्यक्ति सिर्फ़ पॉपुलर फ़ंड नहीं, बल्कि अपने लिए सही फ़ंड ख़रीदे.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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