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सारांशः भारत का ऑटो सेक्टर रफ़्तार पकड़ रहा है और जाने-माने निवेशक रामदेव अग्रवाल ने अपने चार पसंदीदा ऑटो कंपनियों के नाम सार्वजनिक रूप से बताए हैं: मारुति, आयशर, हीरो और M&M. हमारे आर्टिकल से पता चलता है कि इन चार कंपनियों में किन फ़ंड्स का सबसे ज़्यादा एक्सपोज़र है.
जब रामदेव अग्रवाल बोलते हैं, तो बाज़ार सुनता है. और इस बार मोतीलाल ओसवाल फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ के चेयरमैन ने पूरा ध्यान भारत के ऑटो सेक्टर पर लगाया है.
हाल ही में इकोनॉमिक टाइम्स ने अग्रवाल के हवाले से कहा: “इकॉनमी 1990 के आसपास साइकिल से मोटरसाइकिल पर आ गई थी. अब बदलाव मोटरसाइकिल से कारों की तरफ़ हो रहा है.”
वो अकेले नहीं हैं. उम्मीद बढ़ रही है कि भारत में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बढ़ती इनकम, GST में छूट, ग्रामीण डिमांड में बढ़ोतरी और सस्ती फ़ाइनेंसिंग की वजह से अपग्रेड साइकिल में जा रही है.
तो अग्रवाल किन कंपनियों को पसंद करते हैं? उन्होंने चार नाम बताए:
- आयशर मोटर्स, मज़बूत रॉयल एनफ़ील्ड बिक्री के सहारे
- हीरो मोटोकॉर्प, प्रीमियम बाइक और EV में बढ़त
- महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक मज़बूत SUV लाइनअप, ट्रैक्टर मोमेंटम और नए एक्सपोर्ट मार्केट
- मारुति सुज़ुकी, अब तक की सबसे ज़्यादा मंथली बिक्री और कारों पर GST कटौती (28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत) का फ़ायदा.
ज़ाहिर है, अगला सवाल ये है: इन चार कंपनियों में सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी किन म्यूचुअल फ़ंड्स की है?
इसके लिए हमने 30 नवंबर 2025 तक का डेटा लिया है (इंडेक्स, सेक्टोरल, थीमैटिक और हाइब्रिड फ़ंड शामिल नहीं हैं).
मारुति सुज़ुकी में सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी वाले फ़ंड
- ICICI प्रू फ़्लेक्सीकैप – 7.6 प्रतिशत
- कोटक मल्टीकैप – 5.7 प्रतिशत
- ओल्ड ब्रिज फ़ोकस्ड – 5.4 प्रतिशत
- HDFC ELSS टैक्स सेवर – 5.1 प्रतिशत
- पराग पराग ELSS टैक्स सेवर – 4.3 प्रतिशत
आयशर मोटर्स में सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी वाले फ़ंड
- NJ फ़्लेक्सी कैप – 4.9 प्रतिशत
- JM फ़ोकस्ड फ़ंड – 4.8 प्रतिशत
- एक्सिस फ़ोकस्ड फ़ंड – 4.1 प्रतिशत
- फ्रैंकलिन इंडिया फ़ोकस्ड इक्विटी – 3.8 प्रतिशत
- एक्सिस फ़्लेक्सी कैप – 3.8 प्रतिशत
हीरो मोटोकॉर्प में सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी वाले फ़ंड
- NJ ELSS टैक्स सेवर – 5.6 प्रतिशत
- कोटक मल्टीकैप – 4.6 प्रतिशत
- बैंक ऑफ़ इंडिया मल्टी कैप – 4.4 प्रतिशत
- JM मिडकैप – 4.2 प्रतिशत
- क्वांटम वैल्यू – 4.1 प्रतिशत
महिंद्रा एंड महिंद्रा में सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी वाले फ़ंड
- DSP लार्ज कैप – 6.3 प्रतिशत
- फ्रैंकलिन इंडिया लार्ज कैप – 5.7 प्रतिशत
- टॉरस फ़्लेक्सी कैप – 5.1 प्रतिशत
- फ्रैंकलिन इंडिया मल्टी कैप – 4.4 प्रतिशत
- बड़ौदा BNP परिबास फ़ोकस्ड – 4.4 प्रतिशत
कुछ पैटर्न साफ़ दिखाई देते हैं:
- कोटक मल्टीकैप लिस्ट में दो बार आता है. इसका मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प में दूसरा सबसे ज़्यादा एक्सपोज़र है.
- इन लिस्ट में फ़ोकस्ड फ़ंड का दबदबा है. आपको चारों कंपनियों में कई फ़ोकस्ड फ़ंड दिखेंगे. वजह साफ़ है. असल में, ये फ़ंड सिर्फ़ 30 स्टॉक्स में ही निवेश कर सकते हैं, इसलिए वो नैचुरली बड़े साइज़ की पोज़ीशन लेते हैं. इसलिए, अगर कोई फ़ंड मैनेजर ऑटो पर भरोसा करता है, तो ये तुरंत पोर्टफ़ोलियो में दिखाई देता है.
- कुछ ELSS (टैक्स-सेविंग फ़ंड) भी इस लिस्ट में हैं. इन फ़ंड्स का तीन साल का लॉक-इन इन्हें लंबे समय तक शेयर पकड़े रहने में सक्षम बनाता है, ख़ासकर ऐसे सेक्टरों में जो साइक्लिकल नेचर के रहे हैं.
निवेशकों के लिए सबक़?
स्टॉक चुनना रोमांचक लगता है, लेकिन इसके लिए स्किल, समय और रिस्क लेने की मज़बूत हिम्मत चाहिए. भले ही रामदेव अग्रवाल ने चार पसंदीदा ऑटो स्टॉक्स बताए हों, पर ये गारंटी नहीं कि सभी अच्छा प्रदर्शन करेंगे. अगर ऑटो साइकिल कमज़ोर पड़ा, तो इन शेयरों में ज़्यादा निवेश रखने वाला निवेशक बड़े नुक़सान का सामना कर सकता है.
इसीलिए हम सलाह देते हैं कि सीधे स्टॉक्स चुनने के बजाय फ़्लेक्सी-कैप या मल्टी-कैप फ़ंड का रास्ता अपनाएं. ये फ़ंड आपका पैसा अलग-अलग सेक्टरों और मार्केट कैप में फै़लाते हैं, जिससे किसी एक थीम के ग़लत होने का असर कम हो जाता है. आप फिर भी ऑटो सेक्टर की ग्रोथ में शामिल रहते हैं, लेकिन बिना ज़्यादा जोखिम के. ये लॉन्ग-टर्म में वेल्थ बनाने का ज़्यादा सुरक्षित और स्थिर तरीक़ा है.
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